ईरान युद्ध से बहुध्रुवीय दुनिया का मार्ग हुआ मज़बूत
ईरान युद्ध के बाद चीन, रूस और ईरान का बढ़ता रणनीतिक सहयोग केवल पश्चिम एशिया का समीकरण नहीं बदल रहा, बल्कि अमेरिकी प्रभुत्व से अलग एक बहुध्रुवीय विश्व-व्यवस्था के निर्माण को भी गति दे रहा है।
India Ki Baat
ईरान युद्ध के बाद चीन, रूस और ईरान का बढ़ता रणनीतिक सहयोग केवल पश्चिम एशिया का समीकरण नहीं बदल रहा, बल्कि अमेरिकी प्रभुत्व से अलग एक बहुध्रुवीय विश्व-व्यवस्था के निर्माण को भी गति दे रहा है।
गांव का धन्ना सेठ अमरीक सिंह धन, भय और प्रभाव के बल पर पंचायत को अपने पक्ष में कर चुका था। जब उसके अत्याचारों से त्रस्त ऐनाराम न्याय की उम्मीद लेकर पंचों के सामने पहुंचा, तो फैसला भी उसी शक्तिशाली व्यक्ति के हित में सुनाया गया। यह व्यंग्य-कथा बताती है कि निष्पक्षता का मुखौटा पहनी संस्थाएं किस तरह कमजोर से समर्पण और ताकतवर से शांति की अपेक्षा करती हैं।
“कैसे चुप रहूँ मैं” अन्याय, भ्रष्टाचार और सामाजिक उदासीनता के विरुद्ध उठी एक शक्तिशाली जनचेतना की आवाज़ है। डॉ. मुकेश असीमित द्वारा रचित यह देशभक्ति गीत सत्य, साहस, नागरिक जिम्मेदारी और सकारात्मक परिवर्तन का संदेश देता है।
जीवनभर नौकरी, परिवार और प्रतिष्ठा के लिए काम करने वाला व्यक्ति जब साठ वर्ष की आयु में अपनी वास्तविक कमाई का हिसाब करता है, तो उसके सामने एक गहरा प्रश्न खड़ा होता है—मृत्यु के बाद वह ईश्वर के पास क्या लेकर जाएगा?
लोकतंत्र : संवैधानिक प्रावधान और वास्तविक व्यवहार में बड़ा अंतर डॉ. शैलेश शुक्ला लोकतंत्र को विश्व की सर्वाधिक जनोन्मुख और उत्तरदायी शासन व्यवस्था माना जाता है। इसकी मूलअवधारणा अत्यंत सरल और आकर्षक है—सत्ता का वास्तविक स्रोत जनता होती है। जनता अपनेप्रतिनिधियों का चुनाव करती है, सरकार बनाती है और अंततः वही शासन की अंतिम स्वामिनी होती […]
बचा हुआ लोकतंत्र,, – लोकतंत्र किसके पास है ? ये प्रश्न मंच ने नीचे भरी सभा में फेंका ।इतनी जोर से फेंका कि तंत्र द्वारा घेरकर लाए गए लोक ( लोग) डर गए। लोग सोचने लगे शायद कुछ चोरी हो गया और इसका इल्ज़ाम हमपर आयेगा ।सभा में लोग एक दूसरे को संदेह की निगाह […]
बरसात में कोचिंग के तहखाने पानी से भर जाते हैं, गर्मी में बंद इमारतें आग का गोला बन जाती हैं और जर्जर स्कूलों की छतें बच्चों के सिर पर गिरती हैं। दुर्घटना के बाद मुआवजा, बयान और जाँच समिति तैयार मिलते हैं—सिर्फ जवाबदेही नहीं मिलती। इसी संवेदनहीन व्यवस्था पर करारा प्रहार है व्यंग्य रचना—“राम, बाहर तो निकल!”
लायंस क्लब सार्थक ने अपना पंचम स्थापना दिवस समारोह हर्षोल्लास से मनाया। नई कार्यकारिणी की घोषणा, नवसदस्यों का सम्मान एवं क्लब की प्रमुख सेवा गतिविधियों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया।
रक्तदान केवल रक्त देना नहीं, बल्कि किसी अनजान व्यक्ति को जीवन का दूसरा अवसर देना है। एक थैली रक्त किसी थैलेसीमिया बच्चे, दुर्घटना पीड़ित या कैंसर मरीज की धड़कन बन सकती है।
लोकतंत्र, राजनीतिक बहस, आरोप-प्रत्यारोप और पंचायत की अराजकता पर आधारित डॉ. राम कुमार जोशी का तीखा एवं हास्यपूर्ण हिंदी व्यंग्य।