मेडिकल कॉन्फ़्रेंस: मेरे संस्मरणों से

डॉ मुकेश 'असीमित' May 18, 2026 संस्मरण 0

मेडिकल कॉन्फ़्रेंस ज्ञान-वृद्धि के लिए होती हैं, ऐसा ब्रोशर कहता है। लेकिन डॉक्टरों, फार्मा स्टॉलों, गिफ्ट बैगों, फूड कोर्ट और फैमिली ज़ोन के बीच ज्ञान बेचारा अक्सर आख़िरी पन्ने पर चिपका हुआ मिलता है। यह संस्मरण उसी अकादमिक मेले का हास्य-व्यंग्यात्मक चित्र है।

“हम ही हैं राष्ट्र, हमसे ही है राष्ट्र”

Dr Shailesh Shukla May 15, 2026 व्यंग रचनाएं 1

“जनता भविष्य नहीं देख पाती, इसलिए जनता है; और हम भविष्य पहले देख लेते हैं, इसलिए अधिकारी हैं।” “व्यवस्था नहीं सड़ी… व्यवस्था तो बहुत फलदायी है।” “मैंने केवल अवसर लिए, नियमों को समझा और संबंध निभाए।” “जब ‘मैं ही राष्ट्र’ हूँ, तो राष्ट्र की संपत्ति और मेरी संपत्ति में अंतर कैसा?” “पहले जमीन अपने नाम कराओ, फिर विकास का इंतजार करो।”

वादों की वाणी, विश्वास का विध्वंस : घोषणा पत्र की राजनीति पर लोकतांत्रिक लगाम

Dr Shailesh Shukla May 11, 2026 आलोचना ,समीक्षा 0

चुनावी घोषणा पत्र लोकतंत्र का सार्वजनिक वचन होते हैं, लेकिन आज वे अक्सर राजनीतिक प्रचार का साधन बनकर रह गए हैं। यह लेख चुनावी वादों की जवाबदेही, राजनीतिक नैतिकता और लोकतांत्रिक विश्वास की पुनर्स्थापना पर गंभीर विमर्श प्रस्तुत करता है।

मृतक वोटर का पुनर्जन्म-हास्य व्यंग्य

डॉ मुकेश 'असीमित' May 11, 2026 Blogs 0

वोट क्यों कटे? सिर्फ इसलिए कि आदमी मर गया? चुनाव हार रहे प्रत्याशी कह रहे हैं कि उनके सबसे भरोसेमंद वोटर यानी मृत आत्माएँ ही वोटर लिस्ट से हटा दी गईं। इस हास्य-व्यंग्य में वोटर लिस्ट, SIR नियम, पुनर्जन्म और लोकतंत्र की आत्मा के बहाने चुनावी राजनीति पर करारा कटाक्ष है।

शांतिपूर्ण और प्रगतिशील विश्व के निर्माण में भारत की हो सकती हैं महत्वपूर्ण भूमिका

डॉ मुकेश 'असीमित' May 9, 2026 शोध लेख/विमर्श 0

आज का विश्व गहरे संकटों और विभाजनों से गुजर रहा है। ऐसे समय में भारत अपनी सांस्कृतिक चेतना, लोकतांत्रिक अनुभव, संतुलित विदेश नीति और युवा शक्ति के कारण विश्व को एक नई दिशा देने की क्षमता रखता है। यह लेख विश्व निर्माण में भारत की संभावित और आवश्यक भूमिका का विश्लेषण करता है।

पर्यावरण संरक्षण एवं सुधार पर केंद्रित हो विकास की हर नीति

Dr Shailesh Shukla May 8, 2026 Agriculture/environment 0

पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन क्यों आवश्यक है? जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, सतत विकास, जल संरक्षण, जंगल, ऊर्जा और भारत के भविष्य पर आधारित विस्तृत हिंदी लेख पढ़ें।

शोक सभा में जाने की कला: बाब्बन चाचा की फील्ड ट्रेनिंग

डॉ मुकेश 'असीमित' May 8, 2026 व्यंग रचनाएं 0

शोक सभा में जाना भी एक सामाजिक परीक्षा है। बाब्बन चाचा इस परीक्षा में इतने अनुभवी हैं कि संवेदना व्यक्त करते-करते रिश्ता, पुट्टी और प्रॉपर्टी तक की चर्चा छेड़ देते हैं।

साहित्य में विज्ञान का विलोम प्रयोग

डॉ मुकेश 'असीमित' May 7, 2026 व्यंग रचनाएं 0

जब साहित्य प्रयोगशाला बन जाए, पुरस्कार गुरुत्वाकर्षण से गिरने लगें और चापलूसी ‘सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट’ की जगह ले ले — तब न्यूटन, आर्किमिडीज़ और डार्विन भी व्यंग्य में प्रवेश कर जाते हैं। डॉ. मुकेश ‘असीमित’ का समकालीन साहित्य पर तीखा, चुटीला और वैज्ञानिक कटाक्ष।

न्यायपालिका, आलोचना और लोकतंत्र : क्या न्यायालयों को आलोचना से भयभीत होना चाहिए?

Dr Shailesh Shukla May 6, 2026 India Story \बात अपने देश की 0

लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति उसकी आलोचना सहने की क्षमता होती है। न्यायपालिका संविधान की संरक्षक अवश्य है, किंतु क्या वह आलोचना से ऊपर हो सकती है? यह लेख न्यायपालिका की गरिमा, अवमानना कानून, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक जवाबदेही के बीच संतुलन की गंभीर पड़ताल करता है।