डॉ मुकेश 'असीमित'
Apr 23, 2026
व्यंग रचनाएं
0
विश्व पुस्तक दिवस पर यह व्यंग्य लेख उस दौर को याद करता है जब किताबें दोस्त थीं, किराये पर चलती थीं, तकिये के नीचे छुपाई जाती थीं और मोरपंख के साथ विद्या माता को समर्पित रहती थीं। आज के डिजिटल समय में किताबें पढ़ी कम, कोट और सेल्फ़ी ज़्यादा की जाती हैं—इसी विडंबना को लेख ने चुटीले अंदाज़ में पकड़ा है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Apr 23, 2026
Humour
0
What if a book were treated like a newborn child? This satirical piece hilariously compares the journey of writing and publishing a book to pregnancy, childbirth, and the chaos of expectations that follow.
डॉ मुकेश 'असीमित'
Apr 22, 2026
Culture
0
धरती संकेत दे रही है, पर मनुष्य उन्हें अनसुना कर रहा है। विश्व पृथ्वी दिवस क्या केवल उत्सव बनकर रह गया है या यह आत्मपरीक्षण का अवसर है—यह लेख इसी प्रश्न को गहराई से टटोलता है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Apr 22, 2026
व्यंग रचनाएं
0
जब ग्रीष्म ऋतु देवी का रूप धरकर पृथ्वी पर उतरती है, तो सड़कें सूनी हो जाती हैं, बिजली आंख-मिचौली खेलने लगती है, जलजीरा और आइसक्रीम जीवनदायिनी प्रतीत होते हैं, और मनुष्य वातानुकूलित गुफाओं में शरण लेने लगता है। यह व्यंग्य रचना भारतीय गर्मी की त्रासदी को हास्य, तंज और सांस्कृतिक बिंबों के साथ बेहद रोचक ढंग से प्रस्तुत करती है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Apr 20, 2026
Health And Hospitals
0
“कार्ड हाथ में है, भरोसा दिल में है—लेकिन इलाज फाइलों में अटका हुआ है। ‘खाली वायदों का कार्ड’ एक ऐसा व्यंग्य है जो स्वास्थ्य योजनाओं के पीछे छिपी सच्चाई को बेनकाब करता है।”
Dr Shailesh Shukla
Apr 20, 2026
Science Talk (विज्ञान जगत )
1
कृत्रिम मेधा (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव ने समाज, अर्थव्यवस्था और वैश्विक सुरक्षा के सामने गंभीर चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। यह लेख एआई से उत्पन्न संकटों—डीपफेक, रोजगार पर प्रभाव, एल्गोरिथमिक बायस, स्वायत्त हथियारों और पर्यावरणीय जोखिमों—का गहन विश्लेषण करता है और यह प्रश्न उठाता है कि क्या हम इसके लिए तैयार हैं।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Apr 20, 2026
व्यंग रचनाएं
0
एक सेवानिवृत्त कर्मचारी की नज़र से लिखा गया यह हास्य-व्यंग्य लेख रिटायरमेंट समारोह की औपचारिकता, दिखावटी सम्मान और भीतर के खालीपन को चुटीले अंदाज़ में प्रस्तुत करता है। ढोल, भाषण, गिफ्ट और सामाजिक व्यवहार के माध्यम से यह लेख जीवन के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़े व्यक्ति के मनोभावों को उजागर करता है।
Dr Shailesh Shukla
Apr 19, 2026
समसामयिकी
0
भारत में डिजिटल क्रांति ने जहां अवसर दिए, वहीं एक नई चुनौती भी खड़ी कर दी—डिजिटल लत। यह लेख बताता है कि कैसे स्क्रीन के बढ़ते समय ने बच्चों, रिश्तों और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित किया है।
Dr Shailesh Shukla
Apr 19, 2026
समसामयिकी
0
भारत की अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ रही है, फिर भी वैश्विक रैंकिंग में वह छठे स्थान पर खिसक गई—यह विरोधाभास केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि विकास, वितरण और वास्तविक समृद्धि की गहरी कहानी है।
Ram Kumar Joshi
Apr 18, 2026
हिंदी कविता
1
एक तीखा व्यंग्य जो सत्ता परिवर्तन, बुलडोज़र राजनीति और रसूखदारों के बदलते चेहरे पर करारा कटाक्ष करता है। पढ़ें यह समकालीन सामाजिक-राजनीतिक कविता।