डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 23, 2026
India Story \बात अपने देश की
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नक्षत्र और राशि एक ही चीज़ नहीं—वे आकाश को देखने की दो अलग खिड़कियाँ हैं।
नक्षत्र चंद्र की गति से बने हैं, राशि सूर्य के चक्र से।
पंचांग पहले गति को समझता है, फिर इकाई बनाता है—यही उसका विज्ञान है।
जब हम समझते हैं कि समय के दो मान साथ चल रहे हैं, तब त्योहारों की बदलती तारीख़ें समझ में आने लगती हैं।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 22, 2026
Book Review
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आनंदमठ केवल एक कथा नहीं, एक चेतना है—जहाँ भूख विद्रोह को जन्म देती है, भक्ति शक्ति में बदल जाती है और मातृभूमि एक भाव नहीं, एक पुकार बन जाती है। बंकिमचंद्र का यह उपन्यास हमें याद दिलाता है कि राष्ट्र केवल मानचित्र नहीं, त्याग और तपस्या से निर्मित एक जीवित अनुभव है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 21, 2026
Culture
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गणगौर केवल एक लोकपर्व नहीं, बल्कि स्त्री-जीवन की भावनाओं, आशाओं और सौंदर्य का उत्सव है। गाँव की उन गलियों में, जहाँ गीतों के साथ रिश्ते भी गूंजते थे, यह पर्व सचमुच “जीया” जाता था—न कि केवल निभाया जाता था।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 20, 2026
India Story \बात अपने देश की
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पंडित पोथी नहीं खोलता, वह सूत्र खोलता है—और गणना करता है।
पंचांग कोई स्थिर किताब नहीं, हर साल दोहराई जाने वाली एक जीवित गणितीय प्रक्रिया है।
ग्रहण भविष्यवाणी नहीं, सूर्य और चंद्र की गति का सटीक परिणाम है।
पंचांग इसलिए जीवित है क्योंकि उसने बदलाव को परंपरा का विरोध नहीं, उसका विस्तार माना।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 20, 2026
India Story \बात अपने देश की
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समस्या सुविधा में नहीं, उसे ही ज्ञान मान लेने में है।
ग्रेगोरियन कैलेंडर समय बताता है, पंचांग समय को समझाता है।
समय रेखा नहीं, एक चक्र है—लौटता हुआ, बदलता हुआ।
जब हम समय को केवल मापते नहीं, महसूस भी करते हैं—तभी समझ पूरी होती है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 20, 2026
Book Review
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हम दुर्गा सप्तशती को अक्सर केवल पूजा का ग्रंथ मानते हैं, लेकिन यह हमारे भीतर चल रहे संघर्षों की कथा है। मधु-कैटभ से लेकर रक्तबीज तक—हर असुर हमारे मन के किसी विकार का प्रतीक है, और देवी वह चेतना है जो हमें इनसे मुक्त करती है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 19, 2026
हिंदी कविता
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“छंटे कुहासा, सूरज निकले,
मन का हर अंधकार पिघले…
नव विचारों के साथ यह संवत्सर केवल तिथि नहीं,
बल्कि चेतना का एक नया उदय है।”
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 19, 2026
India Story \बात अपने देश की
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हम जिस कैलेंडर को पूरी तरह वैज्ञानिक मानते हैं, उसके भीतर धर्म, इतिहास और सत्ता की परतें छिपी हैं। BC, AD और Year Zero की उलझन यह बताती है कि समय केवल गिनती नहीं, एक मानसिक फ्रेमवर्क भी है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 19, 2026
India Story \बात अपने देश की
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हम रोज़ जिस कैलेंडर पर भरोसा करते हैं, वह केवल समय गिनने का साधन नहीं, बल्कि इतिहास, सत्ता और मानवीय समझौतों का जीवित दस्तावेज़ है। ग्रेगोरियन कैलेंडर उतना सीधा और वैज्ञानिक नहीं जितना हम मानते हैं—उसके भीतर कई परतें हैं, जिन्हें समझना ज़रूरी है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 18, 2026
India Story \बात अपने देश की
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पंचांग कोई पोथी नहीं, हर साल दोहराई जाने वाली एक जीवित गणना है।
पंडित भविष्यवाणी नहीं करता, वह खगोलीय मॉडल के आधार पर गणना करता है।
सूर्य सिद्धांत आस्था नहीं, सूत्रों और गणित की भाषा में लिखा एक खगोल ग्रंथ है।
पंचांग इसलिए जीवित है क्योंकि उसमें बदलाव को परंपरा का विरोध नहीं, उसका हिस्सा माना गया।