राष्ट्रीय गधा पालन योजना

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 12, 2026 व्यंग रचनाएं 0

सरकार की पशुपालन योजना में गाय-भैंस को तो जगह मिल गई, पर गधे को अभी भी पहचान का इंतजार है। गधा गणना में घटती संख्या ने विशेषज्ञों को चौंका दिया है। इस व्यंग्य में गधा संरक्षण, पति पंजीकरण और पड़ोसी देशों की गधाग्राही अर्थव्यवस्था के बहाने समाज और व्यवस्था पर हल्का-फुल्का कटाक्ष किया गया है।

राजनीति में ‘काम कर दिया’ की संस्कृति : विरोध, तमाशा और लोकतंत्र की गिरती मर्यादा

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 11, 2026 समसामयिकी 0

एआई समिट के बाद राहुल गांधी के बयान से उठे विवाद ने केवल एक राजनीतिक बहस को नहीं जन्म दिया, बल्कि यह भी उजागर किया कि भारतीय राजनीति में विरोध और व्यवधान के बीच की रेखा कितनी धुंधली होती जा रही है। क्या लोकतंत्र में असहमति अब प्रदर्शन और सुर्खियों का खेल बनती जा रही है?

साहित्य: जीवन, संस्कृति और समाज का रचनात्मक दर्पण

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 10, 2026 शोध लेख 1

साहित्य केवल शब्दों का संग्रह नहीं बल्कि मनुष्य के अनुभवों, संवेदनाओं और समाज की चेतना का जीवित दस्तावेज़ है। यह लेख साहित्य की अवधारणा, कला-संस्कृति और समाज से उसके संबंध तथा हिंदी साहित्य के प्रमुख वादों—छायावाद, प्रगतिवाद, प्रयोगवाद और नई कविता—को रोचक और प्रवाहपूर्ण ढंग से समझाता है।

सुविधा या सत्य : कमजोरियों की रक्षा और आत्म-सम्मान की कीमत

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 9, 2026 Self Help and Improvements 1

मनुष्य अक्सर अपनी कमजोरियों को पहचानने के बजाय उन्हें बचाने में अधिक ऊर्जा लगा देता है। सुविधा और स्वीकृति के लिए किया गया हर समझौता धीरे-धीरे आत्म-सम्मान को कमजोर करता है। वास्तविक शक्ति तब जन्म लेती है जब हम अपनी कमजोरियों को स्पष्ट रूप से स्वीकार करके सत्य का मार्ग चुनते हैं।

स्वयं में निवेश: सफल दिखने से आगे का वास्तविक विकास

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 8, 2026 Self Help and Improvements 1

आज के समय में सफल दिखना अक्सर वास्तविक विकास से अधिक महत्व पा गया है। पर सच्चा परिवर्तन बाहरी चमक से नहीं, भीतर की समझ, चरित्र और जागरूकता से जन्म लेता है। जीवन का सबसे मूल्यवान निवेश वही है जो हम स्वयं के विकास में करते हैं।

काहे का महिला दिवस…?

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 8, 2026 Important days 0

महिला दिवस पर मंचों, भाषणों और सोशल मीडिया के शोर के बीच एक सवाल बार-बार उठता है—क्या सचमुच महिलाओं के जीवन में कुछ बदलता है? यह व्यंग्य रचना उसी विडंबना को उजागर करती है, जहाँ सम्मान के समारोह तो बहुत हैं, पर असली महिला आज भी श्रम, जिम्मेदारियों और असमानताओं के चक्र में उलझी हुई है।

फ़िल्म “Accused”: आरोपों, महत्वाकांक्षा और अधूरी कहानी का सिनेमाई मुक़दमा

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 7, 2026 Cinema Review 0

नेटफ्लिक्स की फिल्म Accused एक सफल सर्जन डॉ. गीतिका की कहानी है, जिसका जीवन तब उलट जाता है जब उस पर कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगते हैं। विषय गंभीर और समकालीन है, लेकिन कमजोर लेखन और अधूरे किरदारों के कारण फिल्म अपनी संभावनाओं को पूरी तरह साकार नहीं कर पाती।

वस्तु और विषय : बंधन और मुक्ति के बीच का सूक्ष्म अंतर

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 7, 2026 Darshan Shastra Philosophy 0

मनुष्य की चेतना वस्तुओं को केवल वस्तु की तरह नहीं देखती, वह उनसे इच्छा, आसक्ति और पहचान जोड़ देती है। यही वस्तु को विषय बना देता है और यहीं से बंधन की शुरुआत होती है। वस्तु और विषय के इस सूक्ष्म अंतर को समझना ही मुक्ति की दिशा में पहला कदम है।

घर: ईंट-पत्थरों से आगे, अपनेपन का निवास

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 6, 2026 Culture 1

घर और मकान के अंतर पर आधारित यह विचारात्मक आलेख बताता है कि घर केवल भौतिक संरचना नहीं, बल्कि रिश्तों, स्मृतियों और अपनत्व की गर्माहट से निर्मित एक जीवित अनुभव है। जब तक उसमें अपने और अपनापन न हो, तब तक सबसे आलीशान मकान भी केवल एक खाली ढांचा रह जाता है।

Hurt as a Mirror: Growth Beyond Comfort

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 5, 2026 Self Help and Improvements 0

Modern culture often encourages comfort and emotional protection, but true growth frequently begins where we feel hurt. Pain can reveal the hidden illusions and dependencies within us, showing where we still rely on external approval or circumstances for our identity. When we stop avoiding hurt and begin to understand it, suffering transforms into a mirror for self-awareness and maturity.