डॉ मुकेश 'असीमित'
Apr 22, 2026
व्यंग रचनाएं
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जब ग्रीष्म ऋतु देवी का रूप धरकर पृथ्वी पर उतरती है, तो सड़कें सूनी हो जाती हैं, बिजली आंख-मिचौली खेलने लगती है, जलजीरा और आइसक्रीम जीवनदायिनी प्रतीत होते हैं, और मनुष्य वातानुकूलित गुफाओं में शरण लेने लगता है। यह व्यंग्य रचना भारतीय गर्मी की त्रासदी को हास्य, तंज और सांस्कृतिक बिंबों के साथ बेहद रोचक ढंग से प्रस्तुत करती है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Apr 20, 2026
Health And Hospitals
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“कार्ड हाथ में है, भरोसा दिल में है—लेकिन इलाज फाइलों में अटका हुआ है। ‘खाली वायदों का कार्ड’ एक ऐसा व्यंग्य है जो स्वास्थ्य योजनाओं के पीछे छिपी सच्चाई को बेनकाब करता है।”
डॉ मुकेश 'असीमित'
Apr 20, 2026
व्यंग रचनाएं
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एक सेवानिवृत्त कर्मचारी की नज़र से लिखा गया यह हास्य-व्यंग्य लेख रिटायरमेंट समारोह की औपचारिकता, दिखावटी सम्मान और भीतर के खालीपन को चुटीले अंदाज़ में प्रस्तुत करता है। ढोल, भाषण, गिफ्ट और सामाजिक व्यवहार के माध्यम से यह लेख जीवन के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़े व्यक्ति के मनोभावों को उजागर करता है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Apr 17, 2026
Humour
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What if humans never lost their tails—or worse, replaced them with something far more powerful? This biting satire explores how caste has become the invisible tail that defines identity, power, and democracy in India.
डॉ मुकेश 'असीमित'
Apr 17, 2026
व्यंग रचनाएं
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भारत की बी.पी.एल. संस्कृति पर तीखा व्यंग्य—जहाँ लग्ज़री कार वाले भी गरीब हैं और असली गरीब सिस्टम में फंसे हैं। पढ़ें लोकतंत्र की विडंबनाओं पर हास्य-व्यंग्य से भरपूर लेख।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Apr 17, 2026
Book Review
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डॉ. मुकेश असीमित का व्यंग्य संग्रह “गिरने में क्या हर्ज़ है” समकालीन समाज की विसंगतियों पर तीखा प्रहार करता है। वरिष्ठ व्यंग्यकार श्रवण कुमार उर्मलिया की यह समीक्षा न केवल इस संग्रह की साहित्यिक शक्ति को उजागर करती है, बल्कि व्यंग्य लेखन के मूल तत्वों और उसकी सामाजिक भूमिका पर भी गहन दृष्टि प्रस्तुत करती है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Apr 16, 2026
Blogs
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गंगापुर सिटी के पास स्थित नाजिम वाला तालाब—जहां 60 से अधिक प्रवासी पक्षी हर सर्दी में अपना बसेरा बनाते हैं। प्रकृति प्रेमियों और बर्ड वॉचर्स के लिए यह एक अनमोल धरोहर है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Apr 16, 2026
Blogs
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सत्य बनाम सफलता: साध्य–साधन की कसौटी पर जीवन जीवन के चौराहों पर सबसे पेचीदा प्रश्न यही उठता है सत्य चुनें या सफलता? अनुभव कहता है कि झूठ, छल और शॉर्टकट से लोग जीतते दिखते हैं; मन डगमगाता है। पर इतिहास, संस्कृति और अंतरात्मा तीनों मिलकर धीरे-धीरे एक ही निष्कर्ष पर लाते हैं: साध्य तभी पवित्र […]
डॉ मुकेश 'असीमित'
Apr 16, 2026
संस्मरण
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वाराणसी—जहां गंगा के तट पर बसता है इतिहास, आध्यात्म और जीवन का अनोखा दर्शन। इस यात्रा-वृत्तांत में जानिए काशी विश्वनाथ मंदिर, गंगा घाटों और बनारसी संस्कृति की गहराई।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Apr 15, 2026
Cinema Review
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“संकल्प”—एक ऐसी सीरीज़ जो दिमाग से खेलती है, लेकिन दिल तक पहुँचने में वक्त लेती है। क्या यह चाणक्य की रणनीति है या धीमी कहानी का जाल? पढ़िए पूरा विश्लेषण।