हनुमान जयंती विशेष: बल, भक्ति और विश्वास का अद्भुत संगम

डॉ मुकेश 'असीमित' Apr 2, 2026 Important days 0

हनुमान जयंती पर प्रस्तुत यह लेख हनुमान जी के पराक्रम से आगे बढ़कर उनके भक्ति, विश्वास और आंतरिक शक्ति के स्वरूप को समझने का प्रयास है—जहाँ हर मनुष्य के भीतर छिपे सामर्थ्य को जगाने का संदेश मिलता है।

अप्रैल फूल बनाया — उनको ग़ुस्सा आया

डॉ मुकेश 'असीमित' Apr 1, 2026 Important days 0

अप्रैल फूल अब एक दिन का त्योहार नहीं रहा, बल्कि समाज का स्थायी चरित्र बन चुका है—जहाँ राजनीति, मीडिया और सोशल मीडिया मिलकर रोज़ाना जनता को नए-नए रूपों में मूर्ख बनाते हैं, और जनता इसे मनोरंजन समझकर स्वीकार भी कर लेती है।

राम तत्व: सत्ता से संवेदना तक – एक आंतरिक यात्रा

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 27, 2026 Culture 0

क्या राम केवल एक ऐतिहासिक पात्र हैं या हमारे भीतर की एक चेतना? यह लेख राम को देह से तत्व तक समझने की एक गहन यात्रा है, जो बताता है कि राम किसी धर्म तक सीमित नहीं बल्कि मानवता की सर्वोच्च संवेदनशील अवस्था हैं।

गणगौर  : स्मृतियों के आँगन में सजी एक जीवित परंपरा

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 21, 2026 Culture 0

गणगौर केवल एक लोकपर्व नहीं, बल्कि स्त्री-जीवन की भावनाओं, आशाओं और सौंदर्य का उत्सव है। गाँव की उन गलियों में, जहाँ गीतों के साथ रिश्ते भी गूंजते थे, यह पर्व सचमुच “जीया” जाता था—न कि केवल निभाया जाता था।

दुर्गा सप्तशती: भीतर के असुरों से युद्ध और देवी का जागरण

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 20, 2026 Book Review 0

हम दुर्गा सप्तशती को अक्सर केवल पूजा का ग्रंथ मानते हैं, लेकिन यह हमारे भीतर चल रहे संघर्षों की कथा है। मधु-कैटभ से लेकर रक्तबीज तक—हर असुर हमारे मन के किसी विकार का प्रतीक है, और देवी वह चेतना है जो हमें इनसे मुक्त करती है।

काहे का महिला दिवस…?

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 8, 2026 Important days 0

महिला दिवस पर मंचों, भाषणों और सोशल मीडिया के शोर के बीच एक सवाल बार-बार उठता है—क्या सचमुच महिलाओं के जीवन में कुछ बदलता है? यह व्यंग्य रचना उसी विडंबना को उजागर करती है, जहाँ सम्मान के समारोह तो बहुत हैं, पर असली महिला आज भी श्रम, जिम्मेदारियों और असमानताओं के चक्र में उलझी हुई है।

शिव चतुर्दशी : शिव का अर्थ, शिवत्व का रहस्य और हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी

डॉ मुकेश 'असीमित' Feb 13, 2026 Culture 1

शिव केवल देवता नहीं, एक आंतरिक अवस्था हैं। मन, बुद्धि, अहंकार और चित्त के पार जो शुद्ध प्रेम बचता है, वही शिवत्व है। शिव चतुर्दशी पर पढ़ें — शिव के वास्तविक अर्थ, निराकार-साकार स्वरूप और आत्मसाधना पर एक गहन विचार।

सांता क्लॉज को एक चिट्ठी

डॉ मुकेश 'असीमित' Dec 24, 2025 Culture 0

यह व्यंग्यात्मक चिट्ठी एक मध्यमवर्गीय व्यक्ति की उन इच्छाओं का दस्तावेज़ है, जो सरकारों, बैंकों और व्यवस्थाओं से निराश होकर सीधे सांता क्लॉज़ तक पहुँचती हैं। मोज़ों से लेकर स्विस अकाउंट, बिजली बिल से लेकर बॉस की मीटिंग तक—यह रचना हास्य, विडंबना और करुणा के बीच झूलती एक सच्ची सामाजिक तस्वीर पेश करती है।

५ दिसंबर—सेवा, संघर्ष और यात्रा का दिन: गर्ग हॉस्पिटल की कहानी

डॉ मुकेश 'असीमित' Dec 5, 2025 Health And Hospitals 0

एक ताँत की कुर्सी और एक टेबल से शुरू हुई यह यात्रा—आज 30 बेड के पंजीकृत हॉस्पिटल, MRI, CT, C-ARM और डिजिटल एक्स-रे जैसी सुविधाओं तक पहुँच चुकी है। ५ दिसंबर न सिर्फ अस्पताल का स्थापना दिवस है, बल्कि उस लेखकीय यात्रा की भी याद दिलाता है, जिसकी शुरुआत ‘ख़ाँ की बारात’ से हुई थी। यही दिन सिखाता है कि सेवा छोटे कदमों से शुरू होती है, पर मंज़िल सामूहिक भरोसे से बनती है

दिव्यांग दिवस : अपूर्ण देह में पूर्ण आकाश की उड़ान

डॉ मुकेश 'असीमित' Dec 3, 2025 Important days 1

दिव्यांग दिवस हमें याद दिलाता है कि मनुष्य का माप उसकी देह की सीमाओं से नहीं, उसके हृदय की ऊँचाई से होता है। जो अपूर्ण देह में भी पूर्ण आकाश लेकर चलते हैं—उनकी तेजस्विता, साहस और जीवन-संघर्ष समाज के लिए प्रेरणा बनते हैं। यह दिवस हमें दया नहीं, सम्मान और समानता का संकल्प देता है।