Anushka Garg
Aug 20, 2026
India Story \बात अपने देश की
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Employee Monitoring Software कंपनियों को Cybersecurity और Productivity सुधारने में सहायता दे सकता है, लेकिन इसकी सीमा स्पष्ट न हो तो यही Technology कर्मचारियों की Privacy और Workplace Trust के लिए चुनौती बन सकती है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Aug 9, 2026
Culture
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नारी शक्ति: ना रुके, ना झुके—साहस, ममता और संकल्प को समर्पित प्रेरणादायक गीत नारी केवल एक संबंध या भूमिका का नाम नहीं है। वह ममता भी है, संघर्ष भी; करुणा भी है, साहस भी; परिवार की धुरी भी है और समाज के भविष्य को दिशा देने वाली शक्ति भी। इसी बहुआयामी व्यक्तित्व, आत्मविश्वास और अदम्य […]
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jul 30, 2026
India Story \बात अपने देश की
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जेन‑ज़ी के खिलंदड़ेपन, संघर्ष, रील संस्कृति और क्रांति में भी मस्ती व रोमांस खोजने के जज़्बे को समर्पित मौलिक हिंदी गीत की कहानी, संगीत शैली और संपूर्ण बोल।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jul 21, 2026
India Story \बात अपने देश की
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"चुप हैं जनता..." एक मौलिक हिंदी राजनीतिक व्यंग्य गीत है जो महँगाई, बेरोज़गारी, चुनावी वादों और आम आदमी की आवाज़ को लोकधुन, फोक-पॉप और प्रोटेस्ट रैप के माध्यम से प्रस्तुत करता है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Apr 27, 2026
India Story \बात अपने देश की
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भारतीय समय, सत्ता और संवेदनाओं को अपने कैमरे में कैद करने वाले Raghu Rai अब हमारे बीच नहीं रहे। उनकी तस्वीरें सिर्फ दृश्य नहीं, बल्कि इतिहास और मनुष्य की गहरी कहानियाँ हैं, जो पीढ़ियों तक हमें देखने की नई दृष्टि देती रहेंगी।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 14, 2026
People
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कबीर एक नहीं, अनेक रूपों में हमारे सामने आते हैं—पाठ्यक्रमों में, लोकगीतों में, राजनीतिक विमर्शों में। पर असली कबीर वही है जो काशी का जुलाहा है, जिसकी भाषा में करघे की खनक है और प्रश्नों की धार। वह मंदिर और मस्जिद दोनों से एक ही सवाल पूछता है—राह कहाँ है?
डॉ मुकेश 'असीमित'
Dec 29, 2025
Cinema Review
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राजेश खन्ना पहले सुपरस्टार नहीं थे, वे उस दौर का नाम थे जब सिनेमा पूजा बन गया था।
तालियाँ जब बहुत देर तक बजती रहें, तो आदमी शोर का आदी हो जाता है और खामोशी उसे डराने लगती है।
जिसने एक बार शिखर को घर समझ लिया, वह ज़िंदगी भर मैदान को कमतर मानता रहा।
काका की मुस्कान जितनी चमकदार थी, उनके भीतर का अकेलापन उतना ही गहरा।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Dec 27, 2025
India Story \बात अपने देश की
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27 दिसंबर को ग़ालिब सिर्फ़ याद नहीं आते—वे हमारे भीतर बोल उठते हैं। उनकी शायरी “फेल्ट थॉट” है: जज़्बात की नर्मी और तर्क की रोशनी का दुर्लभ मेल।
ग़ालिब को पढ़ना मतलब अपनी उलझन, तन्हाई और हैरत के लिए सही लफ़्ज़ पा लेना—और फिर उन लफ़्ज़ों के साथ थोड़ा हल्का हो जाना।
आज के डिजिटल दौर में भी ग़ालिब उतने ही ज़रूरी हैं—क्योंकि वे हमें नफ़रत से कम, समझ से ज़्यादा जोड़ते हैं।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Dec 24, 2025
People
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यह कविता अटल बिहारी वाजपेयी के उस दुर्लभ व्यक्तित्व को रेखांकित करती है, जहाँ कविता और राजनीति एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि सहचर बन जाते हैं। सत्ता के उतार–चढ़ाव के बीच भी भाषा की मर्यादा, संवाद की गरिमा और लोकतंत्र के प्रति अटूट निष्ठा—इस रचना में श्रद्धा नहीं, वैचारिक स्मरण है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Dec 5, 2025
Darshan Shastra Philosophy
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देवव्रत महेश रेखे ने सिर्फ 19 वर्ष की उम्र में शुक्ल यजुर्वेद के 2000 मंत्रों का दंडक्रम स्मृति से पारायण कर दिखाया। यह केवल धार्मिक चमत्कार नहीं, बल्कि मानव मस्तिष्क की क्षमता, वैदिक स्मृति-विज्ञान और हमारी श्रुति-परंपरा की जीवंत प्रयोगशाला है। यह कथा बताती है कि जहाँ दुनिया किताबों पर निर्भर है, वहाँ भारत अब भी चेतना पर ज्ञान लिखता है।