तंत्र का असली स्वरूप और तांत्रिक बाज़ार का भ्रम : युवाओं को कैसे भरमा रहा है नकली तंत्र

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 13, 2026 Lifestyle 1

तंत्र भारतीय आध्यात्मिक परंपरा की एक गंभीर साधना-पद्धति रहा है, जिसका उद्देश्य चेतना का विस्तार और ऊर्जा का संतुलन था। लेकिन समय के साथ इसके नाम पर भय, चमत्कार और अंधविश्वास का एक पूरा बाज़ार खड़ा हो गया है। आज आवश्यकता है कि हम असली तंत्र और उसके नाम पर चल रहे भ्रम के बीच अंतर समझें।

वस्तु और विषय : बंधन और मुक्ति के बीच का सूक्ष्म अंतर

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 7, 2026 Darshan Shastra Philosophy 0

मनुष्य की चेतना वस्तुओं को केवल वस्तु की तरह नहीं देखती, वह उनसे इच्छा, आसक्ति और पहचान जोड़ देती है। यही वस्तु को विषय बना देता है और यहीं से बंधन की शुरुआत होती है। वस्तु और विषय के इस सूक्ष्म अंतर को समझना ही मुक्ति की दिशा में पहला कदम है।

आत्मबोध से विश्वबोध तक — चेतना की वह यात्रा जो मनुष्य को ‘मैं’ से ‘हम’ बनाती है

डॉ मुकेश 'असीमित' Nov 11, 2025 Darshan Shastra Philosophy 0

“मनुष्य की सबसे लंबी यात्रा कोई भौगोलिक नहीं होती — वह भीतर जाती है। आत्मबोध से विश्वबोध तक की यह यात्रा ‘मैं’ से ‘हम’ बनने की प्रक्रिया है — जहाँ व्यक्ति स्वयं को जानकर समस्त सृष्टि से एकात्म हो जाता है। जब ‘स्व’ का दीप जलता है, तब ‘सर्व’ का सूरज उगता है — यही चेतना की परिपूर्णता है।”

नासदीय सूक्त की दार्शनिक व्याख्या

डॉ मुकेश 'असीमित' Oct 28, 2025 Darshan Shastra Philosophy 0

ऋग्वेद का नासदीय सूक्त ब्रह्मांड की उत्पत्ति पर विश्व के सबसे प्राचीन दार्शनिक चिंतन में से एक है। यह कहता है कि जब न अस्तित्व था न अनस्तित्व, तभी कुछ अप्रकट ऊर्जा ने सृष्टि का आरंभ किया। “काम” या इच्छा पहली हलचल थी जिसने ब्रह्मांड को गति दी। यह सूक्त हमें सिखाता है कि प्रश्न ही ज्ञान का प्रथम चरण हैं—और रहस्य ही सृष्टि की सबसे बड़ी सुंदरता।

गोवर्धन पूजा — धरती, धारण और धारणा का उत्सव

डॉ मुकेश 'असीमित' Oct 21, 2025 Important days 0

गोवर्धन लीला केवल एक पौराणिक प्रसंग नहीं, बल्कि मानव चेतना की यात्रा है—जहाँ कृष्ण भक्त के रक्षक, गुरु और प्रेमस्वरूप हैं। इंद्र का गर्व, ब्रजवासियों की श्रद्धा और गिरिराज का सहारा—ये सब मिलकर बताते हैं कि ईश्वर हमें संकट से नहीं, अहंकार से मुक्त करते हैं। यह कथा सामूहिक शरणागति, भक्ति की सरलता और धर्म के जीवंत दर्शन का उत्सव है—जहाँ पर्वत केवल पत्थर नहीं, बल्कि करुणा का प्रतीक बन जाता है।

बाबा बर्फानी की वो अद्भुत यात्रा-भाग प्रथम

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 11, 2025 Travel 4

इस व्यंग्यात्मक यात्रा संस्मरण में लेखक ने अमरनाथ यात्रा के अनुभव को व्यंग्य, यथार्थ और करुणा के त्रिकोण में पिरोया है। हेलिकॉप्टर टिकट से लेकर खच्चर की पीठ तक, और फिर पालकी से 500 सीढ़ियों तक की इस यात्रा में न केवल शरीर की थकान है, बल्कि मन के द्वंद्व भी हैं। दर्शन की लालसा, टपकती टेंट, टूटती कोहनी, और बाबा बर्फानी की एक झलक—सब कुछ मानो एक दर्शनशास्त्र बन जाता है। अंत में लेखक का वाक्य “बाबा जिसे बुलाते हैं, वही जाता है” इस पूरे अनुभव को आध्यात्मिक रूप में समेट देता है।

“जय जगन्नाथ”-कविता-बात अपने देश की

Neha Jain Jun 29, 2025 Poems 0

पुरी का जगन्नाथ धाम, आस्था और अध्यात्म का अद्भुत संगम है। रथयात्रा के उत्सव में धड़कता है प्रभु का हृदय, जो भक्तों से मिलने स्वयं निकलते हैं। रथ, ढोल-नगाड़े, भक्तों का प्रेम – सब मिलकर इस दृश्य को अलौकिक बना देते हैं। यहाँ आकर आत्मा भी ‘जय जगन्नाथ’ गाने लगती है।