स्वेच्छा है भी… और नहीं भी

डॉ मुकेश 'असीमित' Apr 4, 2026 Self Help and Improvements 0

क्या मनुष्य वास्तव में स्वतंत्र है या प्रकृति और परिस्थितियों की कठपुतली? यह लेख फ्री विल की अवधारणा को गहराई से समझाते हुए बताता है कि असली स्वतंत्रता हमारे चुनाव में छिपी है।

स्वेच्छा है भी… और नहीं भी

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 31, 2026 Darshan Shastra Philosophy 0

फ्री विल पूर्ण स्वतंत्रता नहीं, बल्कि दिशा चुनने की क्षमता है—जहाँ मनुष्य प्रकृति के प्रवाह से ऊपर उठने का साहस करता है।स्वतंत्र इच्छा वहीं जन्म लेती है, जहाँ मनुष्य अपने भीतर उठे विचारों को केवल देखना नहीं, बल्कि सजगता से चुनना सीखता है।

सुविधा या सत्य : कमजोरियों की रक्षा और आत्म-सम्मान की कीमत

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 9, 2026 Self Help and Improvements 1

मनुष्य अक्सर अपनी कमजोरियों को पहचानने के बजाय उन्हें बचाने में अधिक ऊर्जा लगा देता है। सुविधा और स्वीकृति के लिए किया गया हर समझौता धीरे-धीरे आत्म-सम्मान को कमजोर करता है। वास्तविक शक्ति तब जन्म लेती है जब हम अपनी कमजोरियों को स्पष्ट रूप से स्वीकार करके सत्य का मार्ग चुनते हैं।

वस्तु और विषय : बंधन और मुक्ति के बीच का सूक्ष्म अंतर

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 7, 2026 Darshan Shastra Philosophy 0

मनुष्य की चेतना वस्तुओं को केवल वस्तु की तरह नहीं देखती, वह उनसे इच्छा, आसक्ति और पहचान जोड़ देती है। यही वस्तु को विषय बना देता है और यहीं से बंधन की शुरुआत होती है। वस्तु और विषय के इस सूक्ष्म अंतर को समझना ही मुक्ति की दिशा में पहला कदम है।

सामंजस्य या आत्म-द्रोह? झुकना कब समझदारी है और कब हार

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 1, 2026 Self Help and Improvements 0

झुकना हमेशा कमजोरी नहीं होता, पर भीतर से झुक जाना आत्म-द्रोह है। सच्चा सामंजस्य बाहरी संतुलन और भीतरी स्पष्टता के साथ जीना है—एडजस्ट करना, पर आत्म-सम्मान को गिरवी न रखना।

क्या हम सचमुच स्वतंत्र हैं — या केवल प्रोग्राम्ड जीवन जी रहे हैं?

डॉ मुकेश 'असीमित' Feb 27, 2026 Self Help and Improvements 0

हम अपने निर्णयों को स्वतंत्र मानते हैं, पर क्या वे सच में हमारे हैं? जब तक हम अपनी आदतों, भय और उधार की इच्छाओं को पहचान नहीं लेते, तब तक हम प्रतिक्रिया-प्रधान जीवन जीते हैं। जागरूकता ही वास्तविक स्वतंत्रता का प्रारंभ है।

जीवन ही दर्पण है: सत्य बाहर नहीं, अनुभव में है

डॉ मुकेश 'असीमित' Feb 26, 2026 Self Help and Improvements 0

सत्य सिद्धांतों में नहीं, हमारे दैनिक व्यवहार और निर्णयों में प्रकट होता है। जब हम अपने जीवन को साक्षी भाव से देखना शुरू करते हैं, तब अनुभव ही हमारा शिक्षक बन जाता है और सत्य स्वयं स्पष्ट होने लगता है।

अयोध्या और लंका के बीच मनुष्य का धर्म

डॉ मुकेश 'असीमित' Feb 26, 2026 Darshan Shastra Philosophy 0

अयोध्या हमारी पहचान है, लंका हमारी उपलब्धि। धर्म इन दोनों के पार है—जहाँ साहस और विवेक मिलते हैं। रामत्व अधिकार से बड़ा है, और सत्ता से मुक्त होने का नाम है।

सेल्फ-लव नहीं, सेल्फ-जागरूकता ही सच्चा प्रेम है

डॉ मुकेश 'असीमित' Feb 25, 2026 Self Help and Improvements 0

आत्म-प्रेम हर इच्छा पूरी करने का नाम नहीं, बल्कि अपने प्रति कठोर सत्यनिष्ठ होने का साहस है। जागरूकता ही वह शक्ति है जो हमें आत्म-भोग से ऊपर उठाकर वास्तविक विकास की ओर ले जाती है।

नकल में नवाचार

डॉ मुकेश 'असीमित' Feb 25, 2026 व्यंग रचनाएं 0

“हम इसे चोरी मानते ही नहीं। हम सीना ठोककर कहते हैं—यह हमारा मौलिक अधिकार है। हमने तो छह दिखाया था, आपने नौ समझ लिया तो यह आपकी दृष्टि-दोष है।” “हम विचारों की खेती कम और प्रतिलिपियों की फसल अधिक उगाते हैं।”