दोस्ती की सीमा और फेसबुक का परिवार नियोजन कार्यक्रम

डॉ मुकेश 'असीमित' Oct 30, 2025 व्यंग रचनाएं 0

फेसबुक अब भावनाओं पर भी पाबंदी लगाने वाला पहला सोशल प्लेटफॉर्म बन गया है। पाँच हज़ार दोस्त पूरे होते ही दिल कहता है “Accept,” और सिस्टम कहता है “Limit Reached!” अब दोस्ती भी जनसंख्या नियंत्रण का शिकार हो गई है — और हम सब “Friends in Waiting” की सूची में खड़े हैं।

दोस्ती और उधार-हास्य व्यंग्य रचना

डॉ मुकेश 'असीमित' Sep 18, 2025 Blogs 2

दोस्ती अमृत है, मगर उधार की चिपचिपाहट इसे छाछ बना देती है। वही दोस्त जो आपकी माँ का हाल पूछता था, अचानक आपकी क्रेडिट कार्ड लिमिट साफ़ कर देता है। रिकवरी के लिए आप गुड मॉर्निंग भेजते हैं और जवाब का इंतज़ार वैसा ही करते हैं जैसे पहले क्रश के ‘हम्म्म’ का। और जब वह अंडरग्राउंड हो जाए, तो समझिए आपकी दोस्ती अब एक व्हाट्सऐप ग्रुप की भावनात्मक कर्ज़ बैठक बन चुकी है।”

दोस्त बदल गए हैं यार-कविता रचना

डॉ मुकेश 'असीमित' Aug 4, 2025 Poems 2

समय की धारा में बहते हुए रिश्तों का यह मार्मिक चित्रण है — जहाँ कभी हँसी-ठिठोली, सपनों की साझेदारी और चाय की चौपाल थी, वहाँ अब दिखावटी पोस्ट और व्यस्तताएँ हैं। 'दोस्त बदल गए हैं यार' न केवल एक वाक्य है, बल्कि एक पीढ़ी की सामूहिक टीस है, जो अपनी जड़ों की तलाश में आज भी पलटकर देखती है।