द्विचक्र-वाहिनी की आत्मकथा : स्मृतियों पर घूमते पहिए
“मैं तेज़ नहीं हूँ, न आधुनिक—पर मैंने चलना सिखाया है। मेरे चक्रों पर समय नहीं, स्मृतियाँ घूमती हैं।”
“मैं तेज़ नहीं हूँ, न आधुनिक—पर मैंने चलना सिखाया है। मेरे चक्रों पर समय नहीं, स्मृतियाँ घूमती हैं।”