युद्धोन्माद, बाज़ार और डीप स्टेट : सभ्यता के कगार पर खड़ी मानवता

डॉ मुकेश 'असीमित' Jan 10, 2026 समसामयिकी 0

“युद्ध अब अचानक नहीं फूटता—वह पहले बाज़ार में उतरता है, फिर जीवन में।” “जब शांति लाभकारी नहीं रह जाती, तब युद्ध नैतिक घोषित कर दिया जाता है।” “हर युद्ध के बाद कोई विजेता नहीं होता—सिर्फ़ आँकड़े होते हैं।” “इतिहास मनुष्य से एक ही प्रश्न पूछता है—क्या तुमने पहले से सीखा?”