बचपन : अनुशासन की पहली क़ैद या स्वतंत्रता का पहला उत्सव?
हम बच्चे के हाथ में खिलौना नहीं, भविष्य थमा देते हैं।” “शरारत दोष नहीं, जीवन की पहली प्रयोगशाला है।” “थोपे गए संस्कार अनुशासन पैदा करते हैं, चेतना नहीं।” “गलती न करने का अभिनय, गलती करने से ज़्यादा अनैतिक है।” “जिस बचपन में शरारत मर जाती है, उस जीवन में साहस कभी जन्म नहीं लेता।”