डॉ मुकेश 'असीमित'
Sep 15, 2025
हिंदी कविता
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एक धनाढ्य व्यक्ति, जिसने माँ के लिए महल जैसा घर बनाया था, आज बेसुध विलाप कर रहा है। माँ की हल्की करवट पर जाग जाने वाली वही माँ, महल की ऊँची दीवारों में पुकारते-पुकारते खो गई। उसकी पीड़ा यही थी—“काश ये दीवारें बोल उठतीं।” यह कहानी महज़ शोक नहीं, आधुनिक सुविधाओं में खोई मानवीय संवेदनाओं और मौन की त्रासदी का सजीव प्रतीक है।
Kishan Tiwari
Sep 5, 2025
गजल
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किशन तिवारी 'भोपाल' की यह ग़ज़ल जीवन की पीड़ा, संघर्ष और रिश्तों की विडंबना का गहन बयान है। इसमें मोहब्बत और विश्वास के टूटे बंधन, सच पर अडिग रहना, महफ़िल में अकेलापन और सत्ता की चुप्पी जैसे बिंब पाठक को आत्ममंथन की ओर ले जाते हैं।
Vidya Dubey
Sep 3, 2025
Poems
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Life’s lessons carve resilience: smiling through pain, embracing wounds, and moving forward without complaint. This reflective piece captures the journey of learning to live with hidden sorrow, transforming agony into strength. It is about finding peace within, beyond grief and betrayal, by carrying every wound with quiet dignity.