प्रथम क्रांति भारत की (लक्ष्मी बाई )

Ram Kumar Joshi Nov 20, 2025 Hindi poems 1

यह कविता 1857 की क्रांति के उन ज्वलंत क्षणों को पुनर्जीवित करती है जब मंगल पांडे की हुंकार से लेकर झाँसी की रानी की तलवार तक हर दिशा में स्वाधीनता की आग भड़क उठी थी। साधु-संतों से लेकर बैरागियों तक सबने राष्ट्ररक्षा का संकल्प लिया। यह रचना वीरांगना लक्ष्मीबाई के साहस, अध्यात्म और बलिदान को स्मरण कराती है—एक ऐसी ज्वाला जो आज भी हमारी चेतना को आलोकित करती है।