मेरे घर की ये दीवारें-कविता रचना
मेरे घर की दीवारें सिर्फ दीवारें नहीं, वे मेरी जिंदगी की साक्षी हैं। उन्होंने मुझे नाचते-गाते, रोते, सपने बुनते, सपनों के टूटने पर टूटते, झगड़ते, मिलते-जुलते देखा है। वे मन का मरोड़, दिल का शोर और भीतर उगते अनचाहे खरपतवार तक देख चुकी हैं।