डॉ मुकेश 'असीमित'
Feb 28, 2026
News and Events
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एप्सटीन फाइल्स केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि उस मानसिकता का आईना हैं जो शक्ति और धन के शिखर पर बैठकर खुद को अजेय मान बैठती है। यह लेख सत्ता, सेक्स और नैतिकता के जटिल संबंधों को मनोवैज्ञानिक और सामाजिक संदर्भ में परखता है।
Ram Kumar Joshi
Feb 26, 2026
हास्य रचनाएं
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एक ज्वलंत विषय पर बहस करवाने की योजना स्टूडियो प्रबंधन के लिए अप्रत्याशित परीक्षा बन गई। वर्णमाला क्रम, विशेषज्ञता और समय-सारिणी सब धरी रह गईं—और बहस का मंच देखते ही देखते शक्ति प्रदर्शन में बदल गया।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Feb 26, 2026
Darshan Shastra Philosophy
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अयोध्या हमारी पहचान है, लंका हमारी उपलब्धि।
धर्म इन दोनों के पार है—जहाँ साहस और विवेक मिलते हैं।
रामत्व अधिकार से बड़ा है, और सत्ता से मुक्त होने का नाम है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Feb 25, 2026
व्यंग रचनाएं
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“हम इसे चोरी मानते ही नहीं। हम सीना ठोककर कहते हैं—यह हमारा मौलिक अधिकार है। हमने तो छह दिखाया था, आपने नौ समझ लिया तो यह आपकी दृष्टि-दोष है।”
“हम विचारों की खेती कम और प्रतिलिपियों की फसल अधिक उगाते हैं।”
Prem Chand Dwitiya
Feb 24, 2026
व्यंग रचनाएं
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कभी पटिए पर बैठकर शहर की राजनीति, समाज और संस्कार तय होते थे; अब वही चर्चाएँ व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम की स्क्रीन पर सिमट गई हैं। पटिया संस्कृति का यह पटाक्षेप समय की विडंबना है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Feb 24, 2026
व्यंग रचनाएं
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तलाक का असली कारण अब ईगो या संवादहीनता नहीं, दूल्हे का जूता घोषित हो चुका है। शादी में जूता चुराई नहीं, मानो वैवाहिक सत्ता परिवर्तन का शंखनाद हो गया हो।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Feb 24, 2026
Darshan Shastra Philosophy
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गीता हमें सिखाती है कि जीवन का सबसे बड़ा संकट युद्ध नहीं, निर्णयहीनता है। कर्तव्य करते हुए फलासक्ति त्यागना, समत्व में स्थिर रहना और भीतर के सत्य की शरण लेना ही गीता का सार है।
Pradeep Audichya
Feb 22, 2026
व्यंग रचनाएं
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राजमहल जैसे वैभव के बीच, असली युद्ध तंदूर पर था—एक रोटी की तलाश में खड़े आधुनिक अर्जुन।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Feb 22, 2026
लघु कथा
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हवेली की दीवारों में चिपकी यादें और पॉश कॉलोनी के सपने के बीच फँसा एक “माँ का लाडला” — यह सिर्फ घर की बहस नहीं, दो पीढ़ियों की मानसिकता का टकराव है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Feb 21, 2026
Blogs
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गीता किसी एक दर्शन का ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन का समन्वय है। सांख्य से विश्लेषण, योग से अभ्यास, वेदान्त से दृष्टि, भक्ति से करुणा और कर्मयोग से आचरण — गीता आज भी मनुष्य को संतुलन, समत्व और जिम्मेदारी का मार्ग दिखाती है।