कैसे चुप रहूँ मैं – देशभक्ति एवं जनचेतना गीत

डॉ मुकेश 'असीमित' Jun 24, 2026 Blogs 0

“कैसे चुप रहूँ मैं” अन्याय, भ्रष्टाचार और सामाजिक उदासीनता के विरुद्ध उठी एक शक्तिशाली जनचेतना की आवाज़ है। डॉ. मुकेश असीमित द्वारा रचित यह देशभक्ति गीत सत्य, साहस, नागरिक जिम्मेदारी और सकारात्मक परिवर्तन का संदेश देता है।

राम, बाहर तो निकल! | कोचिंग हादसों और सिस्टम की नाकामी पर तीखा व्यंग्य

डॉ मुकेश 'असीमित' Jun 23, 2026 व्यंग रचनाएं 0

बरसात में कोचिंग के तहखाने पानी से भर जाते हैं, गर्मी में बंद इमारतें आग का गोला बन जाती हैं और जर्जर स्कूलों की छतें बच्चों के सिर पर गिरती हैं। दुर्घटना के बाद मुआवजा, बयान और जाँच समिति तैयार मिलते हैं—सिर्फ जवाबदेही नहीं मिलती। इसी संवेदनहीन व्यवस्था पर करारा प्रहार है व्यंग्य रचना—“राम, बाहर तो निकल!”

लायंस क्लब सार्थक का पंचम स्थापना दिवस समारोह उत्साहपूर्वक संपन्न

डॉ मुकेश 'असीमित' Jun 17, 2026 News and Events 0

लायंस क्लब सार्थक ने अपना पंचम स्थापना दिवस समारोह हर्षोल्लास से मनाया। नई कार्यकारिणी की घोषणा, नवसदस्यों का सम्मान एवं क्लब की प्रमुख सेवा गतिविधियों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया।

किसी और की धड़कनों की उम्मीद है — एक थैली रक्त की

डॉ मुकेश 'असीमित' Jun 13, 2026 Health And Hospitals 0

रक्तदान केवल रक्त देना नहीं, बल्कि किसी अनजान व्यक्ति को जीवन का दूसरा अवसर देना है। एक थैली रक्त किसी थैलेसीमिया बच्चे, दुर्घटना पीड़ित या कैंसर मरीज की धड़कन बन सकती है।

विश्व पर्यावरण दिवस पर एक हरित संकल्प: “पेड़ लगा ले यार रे…”

डॉ मुकेश 'असीमित' Jun 5, 2026 Agriculture/environment 0

विश्व पर्यावरण दिवस पर डॉ. मुकेश असीमित का गीत “पेड़ लगा ले यार रे” एक हरित अभियान है। इस गीत पर रील बनाकर पेड़ लगाने की मुहिम से जुड़ें।

रिश्वत के नए मॉडल – रिश्वत अब एप-आधारित है

डॉ मुकेश 'असीमित' May 30, 2026 व्यंग रचनाएं 0

क्या होगा जब रिश्वत भी UPI, EMI और क्रेडिट स्कोर पर मिलने लगे? प्रस्तुत है एक तीखा हास्य-व्यंग्य, जिसमें भ्रष्टाचार 2.0, BribeSync, रिश्वत क्रेडिट स्कोर और डिजिटल घूस की कल्पना के माध्यम से व्यवस्था की विडंबनाओं पर करारा कटाक्ष किया गया है।

बात में वज़न होना चाहिए

डॉ मुकेश 'असीमित' May 29, 2026 व्यंग रचनाएं 0

आज के समय में सिर्फ बात करना काफी नहीं है, बात में वज़न भी होना चाहिए। राजनीति से लेकर मीडिया, ज्योतिष, अर्थव्यवस्था और चिकित्सा जगत तक हर जगह "भारी" शब्द का बोलबाला है। डॉ. मुकेश असीमित का यह व्यंग्य उसी मानसिकता पर चुटीला कटाक्ष है, जहाँ हल्की बातों की कोई कीमत नहीं और हर चीज़ को खबर बनने के लिए भारी होना ज़रूरी है।

टाइम ट्रैवल: ब्रह्मांड की पुरानी फाइल में नई नोटशीट

डॉ मुकेश 'असीमित' May 28, 2026 ललित निबंध 0

टाइम ट्रैवल का सपना हर आदमी ने कभी-न-कभी देखा है—काश अतीत में जाकर दो-चार गलतियाँ सुधार आते। लेकिन ब्रह्मांड कोई तहसील का बाबू नहीं कि पुरानी फाइल में नई नोटशीट लगाकर मामला निपटा दे।

आम का मौसम : मधुमेही मनुष्य का मीठा महाभारत

डॉ मुकेश 'असीमित' May 27, 2026 ललित निबंध 0

आम कोई आम फल नहीं जी। खासकर हम जैसे डायबिटीज़ के मारे लोगों के लिए आम वैसा है जैसे सामने महबूबा खड़ी हो—महकती, मुस्कराती, रस टपकाती—और हम ग्लूकोमीटर की अदालत में अपराधी की तरह खड़े हों।

अखिल भारतीय साहित्य परिषद् गंगापुर शाखा की साहित्यिक संगोष्ठी सम्पन्न, ‘तत्वमसि’ उपन्यास पर हुआ सार्थक विमर्श

डॉ मुकेश 'असीमित' May 25, 2026 News and Events 0

गंगापुर सिटी में अखिल भारतीय साहित्य परिषद् की साहित्यिक संगोष्ठी में ‘तत्वमसि’ उपन्यास, आत्मबोध, विश्वबोध और साहित्य की सामाजिक भूमिका पर गहन चर्चा हुई। डॉ. मुकेश गर्ग ने उपन्यास की समीक्षा प्रस्तुत की।