भगवान बचाए ऐसे रिश्तेदारों से!
बीमारी से ज्यादा थका देने वाला होता है रिश्तेदारों का हाल-चाल महाकुंभ—जहाँ हर कोई डॉक्टर भी है, जज भी और जांच अधिकारी भी।
बीमारी से ज्यादा थका देने वाला होता है रिश्तेदारों का हाल-चाल महाकुंभ—जहाँ हर कोई डॉक्टर भी है, जज भी और जांच अधिकारी भी।
क्या राम केवल एक ऐतिहासिक पात्र हैं या हमारे भीतर की एक चेतना? यह लेख राम को देह से तत्व तक समझने की एक गहन यात्रा है, जो बताता है कि राम किसी धर्म तक सीमित नहीं बल्कि मानवता की सर्वोच्च संवेदनशील अवस्था हैं।
धुरंधर फिल्म अंडरकवर एजेंट्स की उस सच्चाई को सामने लाती है, जिसे सिनेमा अक्सर नजरअंदाज कर देता है। आदित्य धर ने यहाँ मिशन नहीं, बल्कि उस मनुष्य की यात्रा दिखाई है, जो दर्द, अन्याय और संघर्ष से गुजरकर एक ऑपरेटिव बनता है। यह फिल्म ग्लैमर नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और त्याग की कठोर सच्चाई कहती है।
“मक्खनमहापुराण” चापलूस्योपनिषद् का उत्तर-आधुनिक संस्करण है, जहाँ प्रशंसा और चाटुकारिता के बीच की महीन रेखा पर तीखा व्यंग्य किया गया है। यह रचना दिखाती है कि कैसे ‘मक्खनयोग’ आज के दफ्तर, साहित्य, राजनीति और सामाजिक जीवन का अनिवार्य शास्त्र बन चुका है—जहाँ योग्यता से ज्यादा ‘लोचदार जीभ’ और सही समय पर किया गया लेपन ही सफलता की असली कुंजी है।
आज का मंचीय कवि सम्मेलन कविता का नहीं, प्रदर्शन का उत्सव बन गया है—जहाँ कविता घूंघट में सिमटी रहती है और चुटकुले, अभिनय और जुगाड़ का नाच चलता रहता है।
आज का बच्चा कहानियों से नहीं, एल्गोरिद्म से सीख रहा है। क्या हम सुविधा के नाम पर उसके भावनात्मक विकास से समझौता कर रहे हैं?
“भाइयो-बहनो, आज अगर हम रपट जाएँ… तो हमें न उठइयो।” लोकतंत्र के इस विचित्र महोत्सव में हर वर्ग अपनी-अपनी शैली में फिसल रहा है—कोई वादों पर, कोई सच्चाई पर, कोई सिद्धांत पर… और आम आदमी, वह तो रोज़ की आदत से फिसल ही रहा है।
कृत्रिम मेधा शिक्षा को तेज़, व्यक्तिगत और सुलभ बना रही है, लेकिन इसके साथ ही रचनात्मकता, नैतिकता और समानता जैसी चुनौतियाँ भी सामने आ रही हैं। इस बदलते दौर में शिक्षक की भूमिका समाप्त नहीं, बल्कि और अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है—एक मार्गदर्शक और संवेदनशील निर्माता के रूप में।
उत्तर प्रदेश ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। 2000 करोड़ से अधिक के ऋण स्वीकृति, हजारों इकाइयों को सहायता और उच्च स्ट्राइक रेट के साथ यह मॉडल न केवल आर्थिक विकास बल्कि सामाजिक सशक्तिकरण का भी प्रतीक बनकर उभरा है।
क्या कारण है कि उत्तर प्रदेश का विकास मॉडल आज पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है? आर्थिक प्रगति, निवेश, अवसंरचना और प्रशासनिक सुधारों का यह समन्वित मॉडल विकास की नई परिभाषा प्रस्तुत करता है।