समझदार होने का खामियाज़ा | हास्य-व्यंग्य | डॉ. मुकेश असीमित
समझदार कहलाना हमेशा सम्मान नहीं होता। कई बार समाज उसी आदमी से सबसे ज्यादा एडजस्टमेंट, माफी, त्याग और समझौते की उम्मीद करने लगता है। इसी विडंबना पर आधारित एक चुटीला हास्य-व्यंग्य।
समझदार कहलाना हमेशा सम्मान नहीं होता। कई बार समाज उसी आदमी से सबसे ज्यादा एडजस्टमेंट, माफी, त्याग और समझौते की उम्मीद करने लगता है। इसी विडंबना पर आधारित एक चुटीला हास्य-व्यंग्य।
महंगाई अब केवल बाजार के किसी एक हिस्से तक सीमित नहीं रही। शक्कर और प्याज जैसी ठोस वस्तुओं से लेकर तेल-पेट्रोल जैसे द्रव पदार्थों और घरेलू गैस तक—उसने पदार्थ की तीनों अवस्थाओं में आम आदमी को जकड़ लिया है। पढ़िए डॉ. प्रेमचंद द्वितीय का हास्य-व्यंग्य।
हम जिन “साँपों” को विश्वास और समर्थन का दूध पिलाते हैं, उनसे बार-बार विष ही क्यों मिलता है? पढ़िए डॉ. मुकेश ‘असीमित’ के व्यंग्य गीत “नाग पंचमी हर पल” का भावार्थ और सुनिए पूरा गीत।
जब जीवन की नैया भँवर में फँस जाए, तब हनुमान जी पर विश्वास सबसे बड़ी पतवार बनता है। जानिए भावपूर्ण लोक-भजन “तेरी डोरी थामी हनुमान” का आध्यात्मिक संदेश।
मोबाइल में सैकड़ों कॉन्टैक्ट, दर्जनों व्हाट्सऐप ग्रुप और सोशल मीडिया पर अनगिनत दोस्त—फिर भी जीवन में अकेलापन क्यों बढ़ रहा है? डॉ. प्रेमचंद द्वितीय का यह हास्य-व्यंग्य वर्चुअल दोस्ती, वास्तविक रिश्तों, रिटायरमेंट और बदलते सामाजिक जीवन पर तीखी लेकिन मनोरंजक टिप्पणी करता है।
सोशल मीडिया के डिजिटल दरबारों ने घाघ-भड्डरी की लोक-कहावतों से लेकर मौसम विभाग तक सबको पीछे छोड़ दिया है। पढ़िए मौसम की ऑनलाइन भविष्यवाणियों और किसानों की उलझनों पर डॉ. प्रेमचंद द्वितीय का चुटीला व्यंग्य।
ईरान और मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव भारत के पेट्रोल-डीजल, रुपये, महँगाई और शेयर बाजार को कैसे प्रभावित कर सकता है? Strait of Hormuz और महँगे कच्चे तेल का आपकी जेब तक पहुँचने वाला पूरा आर्थिक असर आसान भाषा में समझिए।
चिट्ठियों का वह दौर, जब नीली स्याही में रिश्तों की गर्माहट होती थी, डाकिए का इंतज़ार एक उत्सव होता था और एक काग़ज़ पूरे घर की खुशबू साथ ले आता था। आज की तेज़ डिजिटल दुनिया में आइए याद करें चिट्ठी-पाती के उसी आत्मीय ज़माने को।
क्या 2026 की GST Council Meeting के बाद कार, बाइक, AC और TV सस्ते होंगे? जानिए मौजूदा GST rates, blocked ITC, refund और छोटे व्यापारियों की compliance से जुड़े संभावित सुधार।
# मेरी OPD का शीशा मेरी OPD के दरवाज़े में एक शीशा लगा दिया गया था। जब लगाया गया था, तब कोई बहुत गहरी सोच-विचार नहीं हुई थी। बस किसी दूसरे अस्पताल में ऐसा शीशा लगा देखा और हमने भी उसकी नकल कर ली। शीशा लगाने वाले ने बड़े गर्व से उसकी खासियत बताई, […]