हनुमान जी का नामांकन और जाति का कॉलम

डॉ मुकेश 'असीमित' Apr 14, 2026 व्यंग रचनाएं 0

जब हनुमान जी चुनाव लड़ने पहुँचे, तो उन्हें सबसे बड़ा संकट रावण नहीं, बल्कि ‘जाति’ कॉलम में मिला। यह व्यंग्य भारतीय लोकतंत्र के उस कटु सत्य को उजागर करता है, जहाँ इंसानियत से पहले जाति पूछी जाती है।

Mardaani 3 Review: रानी मुखर्जी की वापसी, लेकिन कहानी क्यों रह गई अधूरी?

डॉ मुकेश 'असीमित' Apr 14, 2026 Cinema Review 0

Mardaani 3 में Rani Mukerji की दमदार वापसी, लेकिन क्या फिल्म उम्मीदों पर खरी उतरती है? पढ़ें पूरा हिंदी रिव्यू—स्टोरी, ट्विस्ट, क्लाइमेक्स और कमजोरियों का विश्लेषण।

TVF की नई सीरीज़ Review: फिजिक्स वाला की असली कहानी | Emotion, Motivation और Reality का Powerful मिश्रण

डॉ मुकेश 'असीमित' Apr 14, 2026 Cinema Review 1

तीन अक्षरों का नाम—TVF। लेकिन असर ऐसा कि सालों तक पीछा नहीं छोड़ता। इस बार कहानी है Physics Wallah की—जहाँ एक साधारण टीचर 8000 करोड़ ठुकरा देता है। मोटिवेशन, इमोशन और सस्पेंस का अनोखा मिश्रण।

फिल्मकार ऋत्विक घटक पर महत्वपूर्ण चर्चा और दो पुस्तकों का विमोचन

डॉ मुकेश 'असीमित' Apr 13, 2026 News and Events 0

मुंबई में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में ऋत्विक घटक के सिनेमा, विचारधारा और उनके योगदान पर गहन चर्चा हुई, साथ ही दो महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।

सड़क दुर्घटनाओं की बड़ी वजह है अतिक्रमण : क्या प्रशासन कभी जगेगा?

Dr Shailesh Shukla Apr 13, 2026 India Story \बात अपने देश की 2

भारत में सड़क दुर्घटनाओं के बढ़ते आंकड़ों के बीच एक अनदेखा लेकिन गंभीर कारण—अतिक्रमण—कैसे आम नागरिकों की जान के लिए खतरा बन चुका है, इस लेख में उसी पर गहन विश्लेषण किया गया है।

तीर चल दिया मां — इस बार तुक्का नहीं था

डॉ मुकेश 'असीमित' Apr 13, 2026 व्यंग रचनाएं 0

एक साधारण-सी घटना—तीर चलाना—कैसे समाज में असाधारण प्रतिक्रियाओं का कारण बन जाती है, यह व्यंग्य उसी मानसिकता की पड़ताल करता है, जहां व्यक्ति से ज्यादा उसकी छवि और उस पर होने वाली प्रतिक्रियाएं मायने रखती हैं।

अभी न जाओ छोड़कर… — एक स्वर का अवसान

डॉ मुकेश 'असीमित' Apr 12, 2026 India Story \बात अपने देश की 0

आशा भोंसले की आवाज़ केवल संगीत नहीं थी, वह समय की धड़कन थी। उनके जाने की खबर एक युग के अवसान जैसी है, लेकिन उनके गीत आज भी हर भावना में जीवित हैं।

जब सिपाही ही चोर हो : संस्थाओं के पतन और लोकतंत्र का संकट

Dr Shailesh Shukla Apr 12, 2026 हिंदी लेख 0

जब कानून के रक्षक ही कानून तोड़ने लगें, तो न्याय, विश्वास और लोकतंत्र कैसे खोखले हो जाते हैं—इस गहन विश्लेषणात्मक लेख में संस्थागत विफलता, भ्रष्टाचार और सामाजिक पतन की पड़ताल।

चुनावी रणक्षेत्र : पाँच राज्य, 824 सीटें और भारतीय राजनीति की नई परीक्षा

Dr Shailesh Shukla Apr 11, 2026 India Story \बात अपने देश की 0

पाँच राज्यों के 824 विधानसभा सीटों पर हो रहे चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन की लड़ाई नहीं, बल्कि महँगाई, विकास और राजनीतिक बहुलवाद के बीच भारत की लोकतांत्रिक परिपक्वता की बड़ी परीक्षा हैं।

गाँधी बनाम अम्बेडकर: सुधार बनाम विद्रोह

डॉ मुकेश 'असीमित' Apr 10, 2026 Blogs 0

क्या केवल संवैधानिक सुधार सदियों पुराने सामाजिक अन्याय को मिटा सकते हैं? डॉ. अंबेडकर के विचार हमें बताते हैं कि असली क्रांति कानून से नहीं, चेतना से शुरू होती है।