Dr Shailesh Shukla
Mar 28, 2026
समसामयिकी
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होरमुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण केंद्र है, जिसके बंद होने से तेल कीमतों में भारी वृद्धि, वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और विशेष रूप से ऊर्जा आयातक देशों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 28, 2026
व्यंग रचनाएं
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बीमारी से ज्यादा थका देने वाला होता है रिश्तेदारों का हाल-चाल महाकुंभ—जहाँ हर कोई डॉक्टर भी है, जज भी और जांच अधिकारी भी।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 27, 2026
Culture
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क्या राम केवल एक ऐतिहासिक पात्र हैं या हमारे भीतर की एक चेतना? यह लेख राम को देह से तत्व तक समझने की एक गहन यात्रा है, जो बताता है कि राम किसी धर्म तक सीमित नहीं बल्कि मानवता की सर्वोच्च संवेदनशील अवस्था हैं।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 27, 2026
Cinema Review
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धुरंधर फिल्म अंडरकवर एजेंट्स की उस सच्चाई को सामने लाती है, जिसे सिनेमा अक्सर नजरअंदाज कर देता है। आदित्य धर ने यहाँ मिशन नहीं, बल्कि उस मनुष्य की यात्रा दिखाई है, जो दर्द, अन्याय और संघर्ष से गुजरकर एक ऑपरेटिव बनता है। यह फिल्म ग्लैमर नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और त्याग की कठोर सच्चाई कहती है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 26, 2026
व्यंग रचनाएं
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“मक्खनमहापुराण” चापलूस्योपनिषद् का उत्तर-आधुनिक संस्करण है, जहाँ प्रशंसा और चाटुकारिता के बीच की महीन रेखा पर तीखा व्यंग्य किया गया है। यह रचना दिखाती है कि कैसे ‘मक्खनयोग’ आज के दफ्तर, साहित्य, राजनीति और सामाजिक जीवन का अनिवार्य शास्त्र बन चुका है—जहाँ योग्यता से ज्यादा ‘लोचदार जीभ’ और सही समय पर किया गया लेपन ही सफलता की असली कुंजी है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 26, 2026
व्यंग रचनाएं
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आज का मंचीय कवि सम्मेलन कविता का नहीं, प्रदर्शन का उत्सव बन गया है—जहाँ कविता घूंघट में सिमटी रहती है और चुटकुले, अभिनय और जुगाड़ का नाच चलता रहता है।
Dr Shailesh Shukla
Mar 26, 2026
Culture
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आज का बच्चा कहानियों से नहीं, एल्गोरिद्म से सीख रहा है।
क्या हम सुविधा के नाम पर उसके भावनात्मक विकास से समझौता कर रहे हैं?
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 24, 2026
व्यंग रचनाएं
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“भाइयो-बहनो, आज अगर हम रपट जाएँ… तो हमें न उठइयो।” लोकतंत्र के इस विचित्र महोत्सव में हर वर्ग अपनी-अपनी शैली में फिसल रहा है—कोई वादों पर, कोई सच्चाई पर, कोई सिद्धांत पर… और आम आदमी, वह तो रोज़ की आदत से फिसल ही रहा है।
Dr Shailesh Shukla
Mar 24, 2026
शोध लेख
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कृत्रिम मेधा शिक्षा को तेज़, व्यक्तिगत और सुलभ बना रही है, लेकिन इसके साथ ही रचनात्मकता, नैतिकता और समानता जैसी चुनौतियाँ भी सामने आ रही हैं। इस बदलते दौर में शिक्षक की भूमिका समाप्त नहीं, बल्कि और अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है—एक मार्गदर्शक और संवेदनशील निर्माता के रूप में।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 23, 2026
India Story \बात अपने देश की
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नक्षत्र और राशि एक ही चीज़ नहीं—वे आकाश को देखने की दो अलग खिड़कियाँ हैं।
नक्षत्र चंद्र की गति से बने हैं, राशि सूर्य के चक्र से।
पंचांग पहले गति को समझता है, फिर इकाई बनाता है—यही उसका विज्ञान है।
जब हम समझते हैं कि समय के दो मान साथ चल रहे हैं, तब त्योहारों की बदलती तारीख़ें समझ में आने लगती हैं।