हनुमान जी का नामांकन और जाति का कॉलम
जब हनुमान जी चुनाव लड़ने पहुँचे, तो उन्हें सबसे बड़ा संकट रावण नहीं, बल्कि ‘जाति’ कॉलम में मिला। यह व्यंग्य भारतीय लोकतंत्र के उस कटु सत्य को उजागर करता है, जहाँ इंसानियत से पहले जाति पूछी जाती है।
India Ki Baat
जब हनुमान जी चुनाव लड़ने पहुँचे, तो उन्हें सबसे बड़ा संकट रावण नहीं, बल्कि ‘जाति’ कॉलम में मिला। यह व्यंग्य भारतीय लोकतंत्र के उस कटु सत्य को उजागर करता है, जहाँ इंसानियत से पहले जाति पूछी जाती है।
Mardaani 3 में Rani Mukerji की दमदार वापसी, लेकिन क्या फिल्म उम्मीदों पर खरी उतरती है? पढ़ें पूरा हिंदी रिव्यू—स्टोरी, ट्विस्ट, क्लाइमेक्स और कमजोरियों का विश्लेषण।
तीन अक्षरों का नाम—TVF। लेकिन असर ऐसा कि सालों तक पीछा नहीं छोड़ता। इस बार कहानी है Physics Wallah की—जहाँ एक साधारण टीचर 8000 करोड़ ठुकरा देता है। मोटिवेशन, इमोशन और सस्पेंस का अनोखा मिश्रण।
मुंबई में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में ऋत्विक घटक के सिनेमा, विचारधारा और उनके योगदान पर गहन चर्चा हुई, साथ ही दो महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।
भारत में सड़क दुर्घटनाओं के बढ़ते आंकड़ों के बीच एक अनदेखा लेकिन गंभीर कारण—अतिक्रमण—कैसे आम नागरिकों की जान के लिए खतरा बन चुका है, इस लेख में उसी पर गहन विश्लेषण किया गया है।
एक साधारण-सी घटना—तीर चलाना—कैसे समाज में असाधारण प्रतिक्रियाओं का कारण बन जाती है, यह व्यंग्य उसी मानसिकता की पड़ताल करता है, जहां व्यक्ति से ज्यादा उसकी छवि और उस पर होने वाली प्रतिक्रियाएं मायने रखती हैं।
आशा भोंसले की आवाज़ केवल संगीत नहीं थी, वह समय की धड़कन थी। उनके जाने की खबर एक युग के अवसान जैसी है, लेकिन उनके गीत आज भी हर भावना में जीवित हैं।
जब कानून के रक्षक ही कानून तोड़ने लगें, तो न्याय, विश्वास और लोकतंत्र कैसे खोखले हो जाते हैं—इस गहन विश्लेषणात्मक लेख में संस्थागत विफलता, भ्रष्टाचार और सामाजिक पतन की पड़ताल।
पाँच राज्यों के 824 विधानसभा सीटों पर हो रहे चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन की लड़ाई नहीं, बल्कि महँगाई, विकास और राजनीतिक बहुलवाद के बीच भारत की लोकतांत्रिक परिपक्वता की बड़ी परीक्षा हैं।
क्या केवल संवैधानिक सुधार सदियों पुराने सामाजिक अन्याय को मिटा सकते हैं? डॉ. अंबेडकर के विचार हमें बताते हैं कि असली क्रांति कानून से नहीं, चेतना से शुरू होती है।