फ़िल्म “Accused”: आरोपों, महत्वाकांक्षा और अधूरी कहानी का सिनेमाई मुक़दमा

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 7, 2026 Cinema Review 0

नेटफ्लिक्स की फिल्म Accused एक सफल सर्जन डॉ. गीतिका की कहानी है, जिसका जीवन तब उलट जाता है जब उस पर कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगते हैं। विषय गंभीर और समकालीन है, लेकिन कमजोर लेखन और अधूरे किरदारों के कारण फिल्म अपनी संभावनाओं को पूरी तरह साकार नहीं कर पाती।

डॉ. शैलेश शुक्ला की 5 लघुकथाएँ

Dr Shailesh Shukla Mar 7, 2026 लघु कथा 1

डॉ. शैलेश शुक्ला की ये पाँच लघुकथाएँ — वारिस, नमक का हक़, कागज़ की ढाल, जाति की छतरी और मुफ़्त का नशा — हमारे समाज की गहरी विडंबनाओं को उजागर करती हैं। लालच, विश्वासघात, व्यवस्था की असमानता, जातिगत राजनीति और मुफ़्तखोरी की मानसिकता पर ये कथाएँ संक्षिप्त होते हुए भी तीखा सामाजिक प्रश्न खड़ा करती हैं।

भ्रष्टाचार सर्वोत्तम व्यवहारअस्ति

Dr Shailesh Shukla Mar 7, 2026 व्यंग रचनाएं 1

सरकारी व्यवस्था की सुस्त गति में यदि कोई शक्ति अचानक फाइलों को पंख लगाकर उड़ाती दिखाई देती है, तो वह है भ्रष्टाचार। यह व्यंग्य लेख बताता है कि कैसे रिश्वत की अनौपचारिक व्यवस्था आम नागरिक, अधिकारी और ठेकेदार—सभी के लिए “सुविधाजनक तंत्र” बन चुकी है।

मिलती पेंशन तो काहे का टेंशन,नो मेंशन?

Dinesh Gangarde Mar 7, 2026 व्यंग रचनाएं 2

जब नौकरी विदा लेती है तो जीवन में एक नई नायिका प्रवेश करती है—पेंशन। यह ऐसी प्रेमिका है जो हर महीने समय पर आती है, मूड नहीं बदलती और बुढ़ापे में आत्मसम्मान और सुकून का सहारा बन जाती है। हास्य-व्यंग्य के अंदाज़ में पेंशन की इसी “वफादार महबूबा” पर यह रोचक लेख।

वस्तु और विषय : बंधन और मुक्ति के बीच का सूक्ष्म अंतर

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 7, 2026 Darshan Shastra Philosophy 0

मनुष्य की चेतना वस्तुओं को केवल वस्तु की तरह नहीं देखती, वह उनसे इच्छा, आसक्ति और पहचान जोड़ देती है। यही वस्तु को विषय बना देता है और यहीं से बंधन की शुरुआत होती है। वस्तु और विषय के इस सूक्ष्म अंतर को समझना ही मुक्ति की दिशा में पहला कदम है।

घर: ईंट-पत्थरों से आगे, अपनेपन का निवास

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 6, 2026 Culture 1

घर और मकान के अंतर पर आधारित यह विचारात्मक आलेख बताता है कि घर केवल भौतिक संरचना नहीं, बल्कि रिश्तों, स्मृतियों और अपनत्व की गर्माहट से निर्मित एक जीवित अनुभव है। जब तक उसमें अपने और अपनापन न हो, तब तक सबसे आलीशान मकान भी केवल एक खाली ढांचा रह जाता है।

Hurt as a Mirror: Growth Beyond Comfort

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 5, 2026 Self Help and Improvements 0

Modern culture often encourages comfort and emotional protection, but true growth frequently begins where we feel hurt. Pain can reveal the hidden illusions and dependencies within us, showing where we still rely on external approval or circumstances for our identity. When we stop avoiding hurt and begin to understand it, suffering transforms into a mirror for self-awareness and maturity.

लायंस क्लब सार्थक ने धूमधाम से मनाया होली उत्सव

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 4, 2026 News and Events 0

लायंस क्लब सार्थक द्वारा आयोजित होली उत्सव में लगभग 20 परिवारों ने भाग लिया। रंग, गुलाल, डीजे संगीत और पारंपरिक रसिया-लांगुरिया के साथ तीन घंटे तक चला यह पारिवारिक आयोजन हंसी-मजाक और ठिठोली से सराबोर रहा।

The Ego’s Victim Drama

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 4, 2026 Self Help and Improvements 0

The ego rarely appears as arrogance; it often hides behind the mask of a victim. It seeks sympathy rather than solutions, because clarity would dissolve the identity it has carefully built. Freedom begins the moment we see this inner drama and recognize our role in it.

The Fear of Death and the False Identity of the Ego

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 3, 2026 Darshan Shastra Philosophy 0

The fear of death does not arise from death itself, but from the ego’s false identification with body, mind, and memory. When we mistake the changing for the self, insecurity and fear follow. Freedom begins the moment we recognize ourselves as the witness—not the role, not the form, but the aware presence behind them.