मिलती पेंशन तो काहे का टेंशन,नो मेंशन?
#दिनेश गंगराड़े,
जिंदगी तो बेवफा है एक दिन ठुकरायेगी,मौत महबूबा है अपनी साथ लेकर जाएगी,नौकरी
जिंदगी है और पेंशन मौत है।अंत तक चलेगी पर अब बदलाव की चर्चा हो रही है?यदि नसीब हो रही है पेंशन,तो दंपत्ति में कायम है बुढापे में भी ट्रेक्शन(खिंचाव)और पड़ौसन का भी अट्रैक्शन?मिलती पेंशन तो शरीर में हड्डियों का जमा है सूत-सांवल में ट्रेक्शन।आप उछल-कूद रहे है जस्ट लाईक माईक जैक्शन?पेंशन है तो जारी है हर एक्शन ।भाई जिसने प्राप्त की एजुकेशन, उसे ही मिली ये पेंशन।सेवानिवृत को जब मिले पेंशन,ये खबर उसके लिए ऊर्जादायक इंफॉर्मेशन।गर नसीब हुई पेंशन तो ये चौथेपन का सार्थक स्टेशन!पेंशन से हर क्रियाएं बुढापे में हो रही क्रिएशन।जब बालों में चांदी जैसी चमक हो, घुटनों में मधुर संगीत गूंजे,और बिना चश्मे के दुनिया में कुछ न दिखे, तब नौकरीपेशा महबूबा कहती हैं“अब मैं सेवानिवृत्त हो रही हूँ, लेकिन मैं आपको ऐसी नायिका दे रही हूँ जो आपको कभी नहीं छोड़ेगी।उस नायिका का नाम है पेंशन!वाह, वाह ये है ऐसी वफादार प्रेमिका, जो हर महीने आती है और कहती है“डार्लिंग, मैं आ गई हूँ, अब मैं पूरे महीने तुम्हारे साथ रहूँगी!ये नखरे नहीं करती,कभी डेट मिस नहीं करती, कभी ब्रेकअप नहीं करती,
कभी मूड खराब नहीं करती।ये है ऐसी सरल, सुंदर और संस्कारी नायिका,इन्हें देखकर दिल कहता है मैं तुमसे प्यार करती हूँ जीवन भर!जवानी में नौकरी पहली नज़र के प्यार जैसी होती है, लेकिन पेंशन.जीवन भर के हनीमून जैसी होती है मीठा, शांत, स्थिर और सहारा देने वाला।और जब शाम को हम चाय और नाश्ते के साथ बैठते हैं और रेडियो पर पुराने गाने बजते हैं तब पेंशनभोगी महबूबा
आपका हाथ थामकर कहती हैं.डरो मत, मेरे हीरो मैं यहाँ हूँ, पूरी फिल्म में तुम्हारे साथ।अंत में, यह समझ में आता है की.सेलेरी एक अस्थायी प्रेमिका है,लेकिन पेंशन जीवन की असली नायिका है, जो आखिरी दृश्य तक तुम्हारा साथ देगी और फिल्म को सुखद अंत देगी।यदि आपको मिल रही है पेंशन,तो काहे का टेंशन?आप,अपनी घराली के साथ रहते बिंदास,पर हरेक परिजन को रहता आपका अटेंशन,इसका आप नही करते कभी मेंशन किंतु सबको,रिश्तेदारों को रहता आपकीं पेंशन का टेंशन?आप, अपनी लुगाई के साथ बने रहते ,पहलवान सैमसन,ये है तो आपके जीवन में है सामान्य गति,मोशन,सुबह-शाम है सहज,सरल,सामान्य शौच,इजी मोशन।रिटायरमेंट लाईफ है जीवन का अलग सेक्शन, किंतु कई परिवार में मतकमाऊ औलाद होने पर इस पेंशन के कारण परिवार में हो जाते है फ़्रेक्शन?रंडवा होने पर भी कई महिलाओं का इस पेंशन पर होता अट्रैक्शन?इसलिए नसीब में, जिंदे है तब तक उठाते रहो पेंशन,रिश्तेदार कहते है ये हराम की कमाई है क्योंकि उनको नही मिलती?पर आप अपनी इकलौती, सातफेरी पत्नी के साथ बने रहो माइकल जैक्सन, बताते चलो लोगों को एक्शन,और लोगों की देखते रहो रिएक्शन?इस जीवन निर्वाह भत्ता,उर्फ पेंशन,के बारे में आप रहो नॉट मेंशन।दुआ करते रहे कि आपको नसीब होती रहे पेंशन,आप घर मे बने रहो रॉयल जानसन?बुढापे का सम्मानजनक लोकेशन है पेंशन।नसीब होती रहे ये टेम पर तो सहज,सरल है हर ऑपरेशन।मिले पेंशन,तो समाज-परिवार में आपकी सही पोजीशन, सही आपका हर डिसीजन।आप नजर मिलाकर कर सकते हो समाज से डिस्कशन(वार्तालाप)यदि ले रहे हो पेंशन,तो दे सकते हो परिजन को हर सजेशन,ये है बुजुर्गों के संकटकाल का बेहतर ऑप्शन,ईफ़ यू टेक पेंशन,एवेलेबल इच् एंड एवरी लोशन एन्ड टेक ईच टाइप पोशन(काढ़ा),पेंशनर और पेंशन,लड़की के पिता का भी बदल देता है नोशन(धारणा)पेंशन से हर परिस्थितियों में भी कर सकते है इंवेशन(आक्रमण)गर जारी है पेंशन,तो सुलभ है बुढापे में भी हर प्रोविजन।समय पर मिले टनाटन पेंशन,तो सुबह-शाम करते रहे मेडिटेशन(योग)यदि खासी नसीब हो पेंशन तो चौथेपन में भी दे सकते हो रिशेप्शन?जिंदगी दौड़ेगी सिंपल मोशन,आप अपने रहन-सहन में कर सकते है रिवीजन?
(,अप्रसारित, अप्रकाशित,)
प्रेषक-दिनेश गंगराड़े,पेंशनर
Comments ( 2)
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डॉ. शैलेश शुक्ला की 5 लघुकथाएँ - Baat Apne Desh Ki
4 hours ago[…] मिलती पेंशन तो काहे का टेंशन,नो मेंशन? […]
डॉ मुकेश 'असीमित'
4 hours agoदिनेश गंगराड़े जी की यह रचना पेंशन को केवल आर्थिक साधन नहीं बल्कि बुढ़ापे की “वफादार महबूबा” के रूप में प्रस्तुत करती है। हल्के-फुल्के हास्य, तुकबंदी और सामाजिक कटाक्ष के माध्यम से लेखक ने यह दिखाया है कि पेंशन बुढ़ापे में सम्मान, आत्मविश्वास और पारिवारिक समीकरणों को किस तरह प्रभावित करती है। व्यंग्यात्मक शैली में लिखी गई यह रचना पाठक के चेहरे पर मुस्कान भी लाती है और जीवन की एक वास्तविक सच्चाई की ओर संकेत भी करती है।