लोकतंत्र में सरकार की आलोचना देशद्रोह नहीं: प्रेस स्वतंत्रता पर गंभीर विमर्श

Dr Shailesh Shukla May 22, 2026 शोध लेख/विमर्श 0

लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति सत्ता से प्रश्न पूछने की स्वतंत्रता में निहित होती है। यह लेख अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, प्रेस की स्वायत्तता, मीडिया की जिम्मेदारी और लोकतांत्रिक मूल्यों पर गहन चिंतन प्रस्तुत करता है।

शांतिपूर्ण और प्रगतिशील विश्व के निर्माण में भारत की हो सकती हैं महत्वपूर्ण भूमिका

डॉ मुकेश 'असीमित' May 9, 2026 शोध लेख/विमर्श 0

आज का विश्व गहरे संकटों और विभाजनों से गुजर रहा है। ऐसे समय में भारत अपनी सांस्कृतिक चेतना, लोकतांत्रिक अनुभव, संतुलित विदेश नीति और युवा शक्ति के कारण विश्व को एक नई दिशा देने की क्षमता रखता है। यह लेख विश्व निर्माण में भारत की संभावित और आवश्यक भूमिका का विश्लेषण करता है।

न्यायपालिका, आलोचना और लोकतंत्र : क्या न्यायालयों को आलोचना से भयभीत होना चाहिए?

Dr Shailesh Shukla May 6, 2026 India Story \बात अपने देश की 0

लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति उसकी आलोचना सहने की क्षमता होती है। न्यायपालिका संविधान की संरक्षक अवश्य है, किंतु क्या वह आलोचना से ऊपर हो सकती है? यह लेख न्यायपालिका की गरिमा, अवमानना कानून, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक जवाबदेही के बीच संतुलन की गंभीर पड़ताल करता है।

शब्द से एल्गोरिद्म तक : हिंदी पत्रकारिता की 200 वर्षों की तकनीकी यात्रा

Dr Shailesh Shukla May 3, 2026 शोध लेख/विमर्श 0

हिंदी पत्रकारिता की दो शताब्दियों की यात्रा केवल समाचारों का इतिहास नहीं, बल्कि तकनीकी विकास, सामाजिक परिवर्तन और विचारों के विस्तार की जीवंत गाथा है—जो आज कृत्रिम बुद्धि के युग तक पहुँच चुकी है।

हिंदी पत्रकारिता में कृत्रिम मेधा के प्रयोग का भारतीय समाज पर प्रभाव

Dr Shailesh Shukla May 3, 2026 शोध लेख/विमर्श 0

हिंदी पत्रकारिता में कृत्रिम मेधा का प्रवेश केवल तकनीकी परिवर्तन नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक, भाषिक और नैतिक चुनौती भी है। यह लेख इसी बदलाव के प्रभावों का गंभीर विवेचन करता है।

हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष: संघर्ष, चेतना और डिजिटल युग की नई दिशा

Dr Shailesh Shukla Apr 28, 2026 India Story \बात अपने देश की 0

1826 के उदन्त मार्तण्ड से लेकर डिजिटल और AI युग तक हिंदी पत्रकारिता की 200 वर्षों की यात्रा, संघर्ष, विकास और चुनौतियों का विस्तृत विश्लेषण।

कृत्रिम मेधा और पारिवारिक जीवन : बच्चों के विकास पर प्रभाव

Dr Shailesh Shukla Mar 26, 2026 Culture 0

आज का बच्चा कहानियों से नहीं, एल्गोरिद्म से सीख रहा है। क्या हम सुविधा के नाम पर उसके भावनात्मक विकास से समझौता कर रहे हैं?

कृत्रिम मेधा आधारित शिक्षा : क्या शिक्षक की भूमिका बदलेगी या समाप्त होगी?

Dr Shailesh Shukla Mar 24, 2026 शोध लेख/विमर्श 1

कृत्रिम मेधा शिक्षा को तेज़, व्यक्तिगत और सुलभ बना रही है, लेकिन इसके साथ ही रचनात्मकता, नैतिकता और समानता जैसी चुनौतियाँ भी सामने आ रही हैं। इस बदलते दौर में शिक्षक की भूमिका समाप्त नहीं, बल्कि और अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है—एक मार्गदर्शक और संवेदनशील निर्माता के रूप में।

विकास का विस्तृत वितान: सूक्ष्म उद्योगों से सशक्त होता उत्तर प्रदेश और सुदृढ़नेतृत्व की सार्थक साधना

Dr Shailesh Shukla Mar 23, 2026 शोध लेख/विमर्श 0

उत्तर प्रदेश ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। 2000 करोड़ से अधिक के ऋण स्वीकृति, हजारों इकाइयों को सहायता और उच्च स्ट्राइक रेट के साथ यह मॉडल न केवल आर्थिक विकास बल्कि सामाजिक सशक्तिकरण का भी प्रतीक बनकर उभरा है।

आखिर क्यों देश भर में निरंतर लोकप्रिय हो रहा है विकास का उत्तर प्रदेश मॉडल

Dr Shailesh Shukla Mar 22, 2026 शोध लेख/विमर्श 1

क्या कारण है कि उत्तर प्रदेश का विकास मॉडल आज पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है? आर्थिक प्रगति, निवेश, अवसंरचना और प्रशासनिक सुधारों का यह समन्वित मॉडल विकास की नई परिभाषा प्रस्तुत करता है।