कबीर निर्गुण भजन और भक्ति भजन संग्रह | Soulful Hindi Bhajans

डॉ मुकेश 'असीमित' Aug 27, 2026 Darshan Shastra Philosophy 0

संत कबीर की निर्गुण वाणी से लेकर शिव, कृष्ण, हनुमान, गणेश, लक्ष्मी और दुर्गा स्तुति तक—सुनिए Dr Mukesh Aseemit Creations की दो भावपूर्ण YouTube भजन playlists।

मैं कौन हूँ? नाम, धर्म और देह से परे आत्मा की खोज करता निर्गुण सूफ़ियाना भजन

डॉ मुकेश 'असीमित' Aug 26, 2026 Darshan Shastra Philosophy 0

“मैं कौन हूँ?” एक मौलिक निर्गुण सूफ़ियाना भजन है, जो नाम, धर्म, देह और सामाजिक पहचानों से आगे मनुष्य के वास्तविक अस्तित्व की खोज करता है। जानिए गीत का भाव, दर्शन और इसके पीछे छिपा आत्मबोध का संदेश।

अपना सनातन धर्म: वेद से वेदान्त तक भारतीय ज्ञान-परंपरा का सरल परिचय

डॉ मुकेश 'असीमित' Aug 23, 2026 Darshan Shastra Philosophy 0

सनातन धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि सृष्टि, आत्मा, परमात्मा, वेद, उपनिषद, दर्शन, भक्ति, योग और मानव जीवन को समझने वाली विशाल ज्ञान-परंपरा है। इस लेख में पंचमहाभूत, चार वेद, षड्दर्शन, नवधा भक्ति, सप्तर्षि, 33 देवता, नवग्रह, मन्वंतर और अन्य प्रमुख वैदिक-वेदोत्तर अवधारणाओं को सरल भाषा में समझिए।

नाम बिना क्या पाया? — ‘तन माटी रो पुतला’ में निर्गुण भक्ति की पुकार

डॉ मुकेश 'असीमित' Aug 1, 2026 Darshan Shastra Philosophy 0

यह रचना संत कबीर की किसी मूल वाणी का शब्दशः गायन नहीं, बल्कि कबीर के निर्गुण दर्शन से प्रेरित डॉ. मुकेश असीमित की मौलिक प्रस्तुति है।नाम बिना क्या पाया? — तन माटी रो पुतला एक भावपूर्ण Kabir Nirgun Bhajan है, जो मनुष्य को धन, शरीर और सांसारिक वैभव के अभिमान से ऊपर उठकर सच्चे नाम की ओर देखने का संदेश देता है। यह fast version कबीर-भाव से प्रेरित एक मौलिक निर्गुण रचना है। गीत याद दिलाता है कि राजमहल, सोना-चाँदी, गाजे-बाजे और शरीर का अभिमान—सब यहीं रह जाता है। अंततः मनुष्य के साथ केवल उसके कर्म, भक्ति और सच्चे नाम का सहारा जाता है।

बालम, आवो हमारे गेह रे—भीतर बसे प्रियतम की खोज का कबीर निर्गुण भजन

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 25, 2026 Darshan Shastra Philosophy 0

भागती जिंदगी, रिश्तों की भीड़ और उपलब्धियों के बीच मन क्यों सूना रह जाता है? पढ़िए और सुनिए कबीर-भाव से प्रेरित लोक–सूफ़ी भजन “बालम, आवो हमारे गेह रे” की आत्मिक यात्रा।

तन माटी रो पुतला: कबीर भजन श्रृंखला की चौथी निर्गुण भजन प्रस्तुति

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 19, 2026 Culture 0

“तन माटी रो पुतला” डॉ. मुकेश असीमित की कबीर भजन श्रृंखला की चौथी रचना है। यह निर्गुण भजन देह-अभिमान, माया, धन और जीवन की क्षणभंगुरता पर कबीर-वाणी जैसे सहज लोक-सत्य को सूफ़ियाना-फोक संगीत शैली में प्रस्तुत करता है।

स्वेच्छा है भी… और नहीं भी

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 31, 2026 Darshan Shastra Philosophy 0

फ्री विल पूर्ण स्वतंत्रता नहीं, बल्कि दिशा चुनने की क्षमता है—जहाँ मनुष्य प्रकृति के प्रवाह से ऊपर उठने का साहस करता है।स्वतंत्र इच्छा वहीं जन्म लेती है, जहाँ मनुष्य अपने भीतर उठे विचारों को केवल देखना नहीं, बल्कि सजगता से चुनना सीखता है।

राम तत्व: सत्ता से संवेदना तक – एक आंतरिक यात्रा

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 27, 2026 Culture 0

क्या राम केवल एक ऐतिहासिक पात्र हैं या हमारे भीतर की एक चेतना? यह लेख राम को देह से तत्व तक समझने की एक गहन यात्रा है, जो बताता है कि राम किसी धर्म तक सीमित नहीं बल्कि मानवता की सर्वोच्च संवेदनशील अवस्था हैं।

भारतीय कैलेंडर और उसका वैज्ञानिक आधार: समय का जीवित व्याकरण

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 17, 2026 Darshan Shastra Philosophy 0

“यहाँ समय केवल गिना नहीं जाता, समझा भी जाता है—भारतीय पंचांग इसी जीवंत विज्ञान का प्रमाण है।”“चंद्र और सूर्य के संतुलन में बसता है भारतीय कालज्ञान—जहाँ तिथि भी बदलती है और सोच भी।”

वस्तु और विषय : बंधन और मुक्ति के बीच का सूक्ष्म अंतर

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 7, 2026 Darshan Shastra Philosophy 0

मनुष्य की चेतना वस्तुओं को केवल वस्तु की तरह नहीं देखती, वह उनसे इच्छा, आसक्ति और पहचान जोड़ देती है। यही वस्तु को विषय बना देता है और यहीं से बंधन की शुरुआत होती है। वस्तु और विषय के इस सूक्ष्म अंतर को समझना ही मुक्ति की दिशा में पहला कदम है।