देवव्रत, वेद और स्मृति की पराकाष्ठा : एक बालक, दो हज़ार मंत्र और अनंत परंपरा

डॉ मुकेश 'असीमित' Dec 5, 2025 Darshan Shastra Philosophy 0

देवव्रत महेश रेखे ने सिर्फ 19 वर्ष की उम्र में शुक्ल यजुर्वेद के 2000 मंत्रों का दंडक्रम स्मृति से पारायण कर दिखाया। यह केवल धार्मिक चमत्कार नहीं, बल्कि मानव मस्तिष्क की क्षमता, वैदिक स्मृति-विज्ञान और हमारी श्रुति-परंपरा की जीवंत प्रयोगशाला है। यह कथा बताती है कि जहाँ दुनिया किताबों पर निर्भर है, वहाँ भारत अब भी चेतना पर ज्ञान लिखता है।

बेग़म अख़्तर : सुरों की मलिका

डॉ मुकेश 'असीमित' Nov 29, 2025 India Story 0

बेग़म अख़्तर—एक नाम जो सिर्फ़ संगीत नहीं, दर्द, रूह और नफ़ासत का दूसरा नाम है। फैज़ाबाद की एक हवेली से शुरू होकर लखनऊ की महफ़िलों तक पहुँची यह आवाज़ किसी उस्ताद की देन नहीं, बल्कि टूटे हुए बचपन और संघर्षों से पैदा हुई कशिश का चमत्कार थी। ठुमरी, दादरा और ग़ज़ल को उन्होंने ऐसी आत्मा दी कि वे सिर्फ़ गाने न रहकर अनुभव बन गए। शादी के बाद संगीत छिन गया तो depression घेर लिया, पर जब उन्होंने फिर गाना शुरू किया—वे बेग़म अख़्तर बन गईं। उनकी ग़ज़लें आज भी वही हलचल जगाती हैं—जैसे कोई भूली हुई याद अचानक सांस ले उठे।

भारतीय सिनेमा जगत — जाने कहाँ गए वो दिन

डॉ मुकेश 'असीमित' Nov 26, 2025 Blogs 0

“सिनेमाघर कभी मनोरंजन का देवालय था, जहाँ चाय-कुल्फी की आवाजें, तंबाकू की पिचकारियाँ, आगे की सीटों की रुई निकालने की परंपरा और इंटरवल का महाभारत—सब मिलकर एक सामूहिक उत्सव बनाते थे। वह जमाना गया, जब फिल्में हमें हमारी रियलिटी से कुछ पल उड़ा ले जाती थीं।”

युद्ध का नित नया बदलता चेहरा

डॉ मुकेश 'असीमित' Nov 25, 2025 Foreign Affair 0

युद्ध का इतिहास दरअसल मनुष्य नहीं, तकनीक की कहानी है। नरमार की भोथरी गदा से लेकर ड्रोन, AI, सैटेलाइट और हाइपरसोनिक मिसाइलों तक—हर दौर में विजेता वही बना जिसने दूर से, सस्ते में और सुरक्षित प्रहार करने की कला सीख ली। युद्धभूमि बदल चुकी है, हम अब भी पुराने सपनों में अटके हैं।

महाभारत: भारत की सबसे पुरानी मैनेजमेंट हैंडबुक

डॉ मुकेश 'असीमित' Nov 23, 2025 India Story 0

महाभारत सिर्फ युद्ध की कहानी नहीं, बल्कि मानव-व्यवहार, नेतृत्व, रणनीति, कॉन्ट्रेक्ट-मैनेजमेंट, समय-निर्णय और टीम-डायनैमिक्स की सबसे पुरानी केस-स्टडी है। अर्जुन की जिज्ञासा, दुर्योधन का एटिट्यूड, युधिष्ठिर की गलतियाँ और कृष्ण की नेतृत्व-शैली, आज के किसी भी कॉर्पोरेट संगठन पर समान रूप से लागू होती हैं। महाभारत हमें सिखाती है कि प्रश्न पूछना बुद्धिमत्ता है, सही गेम चुनना स्ट्रेटेजी है, समय पर निर्णय लेना दक्षता है, और नेतृत्व का असली रूप प्रतिष्ठा नहीं, ज़मीन पर उतरकर सारथी बनना है।

स्वाभिमान का स्वर: 150 वर्ष वंदे मातरम्

डॉ मुकेश 'असीमित' Nov 11, 2025 Important days 0

“वंदे मातरम् केवल दो शब्द नहीं, एक दीर्घ श्वास है जो इस उपमहाद्वीप की नसों में आज भी बहती है। डेढ़ सदी बाद भी यह गीत हमें याद दिलाता है कि भारत केवल भौगोलिक रेखाओं का जोड़ नहीं, एक जीवित अनुभूति है। यह गीत राजनीति से ऊपर उठकर नागरिक-धर्म का गान है — एक ऐसा धर्म जो मनुष्यता को श्रेष्ठ मानता है, और मातृभूमि को ‘भूमि’ से ‘मां’ बना देता है।”

हादसों का इन्तजार है

Ram Kumar Joshi Nov 5, 2025 India Story 0

देशभर में बढ़ते सड़क हादसे अब सिर्फ समाचार नहीं, बल्कि हमारी संवेदनहीन व्यवस्था का आईना हैं। जहाँ नियम पालन करने वाले मरते हैं, और व्यवस्था सिर्फ बयान जारी करती है। ट्रैफिक पुलिस की आँखें खुली हैं — मगर देखती नहीं। जब तक जिम्मेदारी सिर्फ फाइलों में रहेगी, सड़कें श्मशान बनती रहेंगी।

भारत की बेटियाँ: एक राग, एक विजय — Women’s ICC Champions

डॉ मुकेश 'असीमित' Nov 3, 2025 India Story 0

“कप्तानों से बढ़कर, यह जीत उन सपनों की है जो साथ दौड़ते हैं—एक राग, एक भारत।” “जब विविध सुर मिलते हैं, जीत का आलाप अपने आप जन्म लेता है—भारत विश्वविजेता।” “साहस, संयम और संगति—इन्हीं तीन रंगों से तिरंगा ट्रॉफी छू लेता है।”

गोपाष्टमी : गो, गृह और गंगा की तरह पवित्र — हमारी सभ्यता का अदृश्य आधार

डॉ मुकेश 'असीमित' Oct 31, 2025 Culture 0

गोपाष्टमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता की जड़ों का उत्सव है — वह दिन जब हम यह स्मरण करते हैं कि हमारी संस्कृति, हमारी खेती, और हमारा जीवन — सब गो के उपकार पर टिका है। गोबर से लीपे आँगन, दूध से पोषित पीढ़ियाँ और बैल से चलती हल की रेखाएँ — यही तो भारत का असली तंत्र है।

छट पर्व –जहाँ अस्त हुए सूरज को भी पूजा जाता है

डॉ मुकेश 'असीमित' Oct 26, 2025 Culture 0

छठ पर्व अब बिहार की सीमाओं से निकलकर विश्वभर में भारतीय आस्था का प्रतीक बन चुका है। यह केवल सूर्य उपासना नहीं, बल्कि मनुष्य और प्रकृति के संवाद का जीवंत पर्व है — जहाँ श्रम, श्रद्धा और संतुलन मिलकर जीवन के हर अंधकार को प्रकाश में बदल देते हैं। लोकल से ग्लोबल तक, छठ भारतीय संस्कृति की आत्मा को उजागर करता है।