लायंस क्लब सार्थक की बीओडी बैठक सम्पन्न
लायंस क्लब सार्थक की बीओडी बैठक में वर्ष 2026–27 के लिए नई कार्यकारिणी की घोषणा की गई, जिसमें लायन उमेश शर्मा को अध्यक्ष, डॉ. चंद्रकांत सिंघल को सचिव और राजेश मंगल को कोषाध्यक्ष चुना गया।
लेखक का नाम: डॉ. मुकेश गर्ग निवास स्थान: गंगापुर सिटी, राजस्थान पिन कोड -३२२२०१ मेल आई डी -thefocusunlimited€@gmail.com पेशा: अस्थि एवं जोड़ रोग विशेषज्ञ लेखन रुचि: कविताएं, संस्मरण, व्यंग्य और हास्य रचनाएं प्रकाशित पुस्तक “नरेंद्र मोदी का निर्माण: चायवाला से चौकीदार तक” (किताबगंज प्रकाशन से ) काव्य कुम्भ (साझा संकलन ) नीलम पब्लिकेशन से काव्य ग्रन्थ भाग प्रथम (साझा संकलन ) लायंस पब्लिकेशन से अंग्रेजी भाषा में-रोजेज एंड थोर्न्स -(एक व्यंग्य संग्रह ) नोशन प्रेस से –गिरने में क्या हर्ज है -(५१ व्यंग्य रचनाओं का संग्रह ) भावना प्रकाशन से प्रकाशनाधीन -व्यंग्य चालीसा (साझा संकलन ) किताबगंज प्रकाशन से देश विदेश के जाने माने दैनिकी,साप्ताहिक पत्र और साहित्यिक पत्रिकाओं में नियमित रूप से लेख प्रकाशित सम्मान एवं पुरस्कार -स्टेट आई एम ए द्वारा प्रेसिडेंशियल एप्रिसिएशन अवार्ड ”
लायंस क्लब सार्थक की बीओडी बैठक में वर्ष 2026–27 के लिए नई कार्यकारिणी की घोषणा की गई, जिसमें लायन उमेश शर्मा को अध्यक्ष, डॉ. चंद्रकांत सिंघल को सचिव और राजेश मंगल को कोषाध्यक्ष चुना गया।
चीखें हवा में तैर रही थीं, पर सायरनों की आवाज़ ने उन्हें ढँक लिया—व्यवस्था का संगीत शुरू हो चुका था। लाशें लाइन में सजा दी गईं—मृत्यु के बाद भी अनुशासन लागू था। कैमरे तैयार थे, आँसू भी—बस ‘सीन’ सेट होना बाकी था। और अंत में वही वाक्य—“हालात काबू में हैं।”
“मैं उस दौर का अनाम प्रेमाचार्य था, जिसने प्रेम के सर्वहारा वर्ग के लिए जनहित याचिका की तरह प्रेमपत्र लिखे—निःशुल्क, निस्वार्थ और निस्संग।” “बिना शायरी के प्रेमपत्र ऐसा ही होता जैसे दाल बिना तड़के।” “एक ही प्रेमिका के लिए लिखते-लिखते हम भी ऊब गए—पर प्रेमियों के दिलों में आग बराबर जलती रही।”
क्या मनुष्य वास्तव में स्वतंत्र है या प्रकृति और परिस्थितियों की कठपुतली? यह लेख फ्री विल की अवधारणा को गहराई से समझाते हुए बताता है कि असली स्वतंत्रता हमारे चुनाव में छिपी है।
बब्बन चाचा ने परदादा की संदूक में रखी मूँछें निकालकर इतिहास को चेहरे पर चिपका लिया। अब वे हर सुबह ‘इतिहास अलाप’ करते हैं और वर्तमान को ताले में बंद कर देते हैं—क्योंकि आजकल असली मेहनत से ज्यादा आसान है विरासत पहन लेना।
लायंस क्लब सार्थक एवं डीएस साइंस अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित रक्तदान शिविर में 31 यूनिट रक्त संग्रहित कर समाजसेवा का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया गया।
देवर्षि नारद इंद्र को बताते हैं कि मृत्युलोक में मूर्खता अब योग्यता, नीति और प्रमोशन का आधार बन चुकी है। बुद्धिमान अल्पसंख्यक हो चुके हैं और प्रश्न करना अपराध माना जाने लगा है। इस व्यंग्यात्मक संवाद में मूर्खता के सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक स्वरूप का तीखा और हास्यपूर्ण चित्रण किया गया है।
हनुमान जयंती पर प्रस्तुत यह लेख हनुमान जी के पराक्रम से आगे बढ़कर उनके भक्ति, विश्वास और आंतरिक शक्ति के स्वरूप को समझने का प्रयास है—जहाँ हर मनुष्य के भीतर छिपे सामर्थ्य को जगाने का संदेश मिलता है।
अप्रैल फूल अब एक दिन का त्योहार नहीं रहा, बल्कि समाज का स्थायी चरित्र बन चुका है—जहाँ राजनीति, मीडिया और सोशल मीडिया मिलकर रोज़ाना जनता को नए-नए रूपों में मूर्ख बनाते हैं, और जनता इसे मनोरंजन समझकर स्वीकार भी कर लेती है।
फ्री विल पूर्ण स्वतंत्रता नहीं, बल्कि दिशा चुनने की क्षमता है—जहाँ मनुष्य प्रकृति के प्रवाह से ऊपर उठने का साहस करता है।स्वतंत्र इच्छा वहीं जन्म लेती है, जहाँ मनुष्य अपने भीतर उठे विचारों को केवल देखना नहीं, बल्कि सजगता से चुनना सीखता है।