Dr. Mukesh Aseemit Creations—शब्द, स्वर और संवेदना का संसार
शब्दों में व्यंग्य, सुरों में संवेदना और रचनाओं में अपने समय की धड़कन—‘Dr. Mukesh Aseemit Creations’ साहित्य, मौलिक संगीत, कविता, भक्ति और सामाजिक चिंतन का एक रचनात्मक YouTube मंच है।
लेखक का नाम: डॉ. मुकेश गर्ग निवास स्थान: गंगापुर सिटी, राजस्थान पिन कोड -३२२२०१ मेल आई डी -thefocusunlimited€@gmail.com पेशा: अस्थि एवं जोड़ रोग विशेषज्ञ लेखन रुचि: कविताएं, संस्मरण, व्यंग्य और हास्य रचनाएं प्रकाशित पुस्तक “नरेंद्र मोदी का निर्माण: चायवाला से चौकीदार तक” (किताबगंज प्रकाशन से ) काव्य कुम्भ (साझा संकलन ) नीलम पब्लिकेशन से काव्य ग्रन्थ भाग प्रथम (साझा संकलन ) लायंस पब्लिकेशन से अंग्रेजी भाषा में-रोजेज एंड थोर्न्स -(एक व्यंग्य संग्रह ) नोशन प्रेस से –गिरने में क्या हर्ज है -(५१ व्यंग्य रचनाओं का संग्रह ) भावना प्रकाशन से प्रकाशनाधीन -व्यंग्य चालीसा (साझा संकलन ) किताबगंज प्रकाशन से देश विदेश के जाने माने दैनिकी,साप्ताहिक पत्र और साहित्यिक पत्रिकाओं में नियमित रूप से लेख प्रकाशित सम्मान एवं पुरस्कार -स्टेट आई एम ए द्वारा प्रेसिडेंशियल एप्रिसिएशन अवार्ड ”
शब्दों में व्यंग्य, सुरों में संवेदना और रचनाओं में अपने समय की धड़कन—‘Dr. Mukesh Aseemit Creations’ साहित्य, मौलिक संगीत, कविता, भक्ति और सामाजिक चिंतन का एक रचनात्मक YouTube मंच है।
सड़क चौड़ी करने की सरकारी मुहिम में एक टीन की छोटी दुकान उजड़ जाती है। उसके साथ बिखर जाते हैं एक विधवा माँ के सपने, दो पढ़े-लिखे बेरोज़गार बेटों की उम्मीदें और वर्षों की मेहनत। यह व्यंग्य विकास के नाम पर होने वाले मानवीय विस्थापन की संवेदनशील पड़ताल है।
डॉक्टर्स डे के अवसर पर आईएमए गंगापुर सिटी ने सेवा एवं सामाजिक सरोकार से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए। 11 टीबी मरीजों को निक्षय पोषण किट वितरित की गई, 11 पौधों का वृक्षारोपण किया गया और फन क्रिकेट मैच का आयोजन हुआ।
बजट आया, बसंत आया, सत्ता ने इसे बहार कहा, विपक्ष ने पतझड़ और आम आदमी ने अपनी खाली थाली देखी। इसी बीच राष्ट्रपति भवन में दिवंगत कवियों का काल्पनिक महासम्मेलन सजता है, जहाँ हर कवि अपने अंदाज़ में बजट का हिसाब पूछता है।
“कैसे चुप रहूँ मैं” अन्याय, भ्रष्टाचार और सामाजिक उदासीनता के विरुद्ध उठी एक शक्तिशाली जनचेतना की आवाज़ है। डॉ. मुकेश असीमित द्वारा रचित यह देशभक्ति गीत सत्य, साहस, नागरिक जिम्मेदारी और सकारात्मक परिवर्तन का संदेश देता है।
बरसात में कोचिंग के तहखाने पानी से भर जाते हैं, गर्मी में बंद इमारतें आग का गोला बन जाती हैं और जर्जर स्कूलों की छतें बच्चों के सिर पर गिरती हैं। दुर्घटना के बाद मुआवजा, बयान और जाँच समिति तैयार मिलते हैं—सिर्फ जवाबदेही नहीं मिलती। इसी संवेदनहीन व्यवस्था पर करारा प्रहार है व्यंग्य रचना—“राम, बाहर तो निकल!”
लायंस क्लब सार्थक ने अपना पंचम स्थापना दिवस समारोह हर्षोल्लास से मनाया। नई कार्यकारिणी की घोषणा, नवसदस्यों का सम्मान एवं क्लब की प्रमुख सेवा गतिविधियों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया।
रक्तदान केवल रक्त देना नहीं, बल्कि किसी अनजान व्यक्ति को जीवन का दूसरा अवसर देना है। एक थैली रक्त किसी थैलेसीमिया बच्चे, दुर्घटना पीड़ित या कैंसर मरीज की धड़कन बन सकती है।
विश्व पर्यावरण दिवस पर डॉ. मुकेश असीमित का गीत “पेड़ लगा ले यार रे” एक हरित अभियान है। इस गीत पर रील बनाकर पेड़ लगाने की मुहिम से जुड़ें।
क्या होगा जब रिश्वत भी UPI, EMI और क्रेडिट स्कोर पर मिलने लगे? प्रस्तुत है एक तीखा हास्य-व्यंग्य, जिसमें भ्रष्टाचार 2.0, BribeSync, रिश्वत क्रेडिट स्कोर और डिजिटल घूस की कल्पना के माध्यम से व्यवस्था की विडंबनाओं पर करारा कटाक्ष किया गया है।