वैलेंटाइन घाट पर ढेंचू-ढेंचू प्रेमकथा

डॉ मुकेश 'असीमित' Feb 16, 2026 व्यंग रचनाएं 0

फरवरी की गुलाबी ठंडक में वैलेंटाइन घाट पर इंसान प्रेम का प्रदर्शन कर रहे थे, और दो भोले गधे इंसान बनने की कोशिश में पकड़े गए। भला हो धोबी का—कम से कम दो गधों को इंसान बनने से बचा लिया!

वैलेंटाइन महात्म्य कथा

डॉ मुकेश 'असीमित' Feb 15, 2026 व्यंग रचनाएं 0

“भद्रा में ‘आई लव यू’ न बोलें, केवल ‘हम्म’ प्राप्त होगा।” “शुक्र उच्च का हो तो गुलाब महँगा होगा।” “वचन लाभ में, आलिंगन अमृत में।” “ग्रह नहीं, बजट वक्री था।”

सरसों के चेपे और मेरी पीली टी-शर्ट

डॉ मुकेश 'असीमित' Feb 14, 2026 व्यंग रचनाएं 0

“मैं सरसों के खेत का चलता-फिरता प्रतिनिधि बन गया।” “जहाँ पीला, वहाँ हमारा।” बसंत का सौंदर्य दूर से अद्भुत, पास से लोकतांत्रिक चेपा-आक्रमण। कालिदास ने कोयल लिखी, चेपों पर अभी शोध शेष है।

वैलेंटाइन डे: एक भारतीय परिप्रेक्ष्य

डॉ मुकेश 'असीमित' Feb 14, 2026 India Story 0

“पता है, कौन सा वीक चल रहा है?” “विशेष वैलेंटाइन डिश” दिल के आकार में, पर स्वाद में विस्फोटक! क्या भारत में वैलेंटाइन डे का उन्माद सच में कम हो रहा है? अब सवाल यह है—दिल लाल रहेगा या बसंत पीला?

शिव चतुर्दशी : शिव का अर्थ, शिवत्व का रहस्य और हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी

डॉ मुकेश 'असीमित' Feb 13, 2026 Culture 1

शिव केवल देवता नहीं, एक आंतरिक अवस्था हैं। मन, बुद्धि, अहंकार और चित्त के पार जो शुद्ध प्रेम बचता है, वही शिवत्व है। शिव चतुर्दशी पर पढ़ें — शिव के वास्तविक अर्थ, निराकार-साकार स्वरूप और आत्मसाधना पर एक गहन विचार।

रेडियो साक्षात्कार –बॉक्स ऍफ़ एम् पर

डॉ मुकेश 'असीमित' Feb 13, 2026 Interview 0

गंगापुर सिटी के वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक सर्जन, लेखक और समाजसेवी डॉ. मुकेश चंद गर्ग ने बॉक्स एफएम पर अपनी 25 वर्षों की चिकित्सा यात्रा, साहित्यिक लेखन, आधुनिक ऑर्थोपेडिक तकनीकों और समाज सेवा के अनुभव साझा किए। यह प्रेरणादायक संवाद चिकित्सा और मानवीय मूल्यों के सुंदर संतुलन को उजागर करता है।

इलाज की भरमार, बीमारी ज़िंदा है

डॉ मुकेश 'असीमित' Feb 11, 2026 Health And Hospitals 0

“यह समस्या केवल चिकित्सा जगत तक सीमित नहीं है। यह समाज, मनुष्य, राजनीति, पर्यावरण और नैतिकता—सबमें एक साथ फैली हुई बीमारी है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि हर जगह इलाज चल रहा है, पर बीमारी ठीक नहीं हो रही—क्योंकि इलाज ही ग़लत है।” आज की दुनिया में सबसे बड़ा संकट बीमारी का नहीं, बल्कि बीमारी की पहचान का संकट है। मन की बीमारियों के लिए मोटिवेशनल वीडियो, पर्यावरण के लिए सम्मेलन, राजनीति के लिए भावनात्मक नारे— ये सब प्लेसीबो हैं। जब नक़ली इलाज सामान्य हो जाता है, तब असली मौतें सिर्फ़ आँकड़े बनकर रह जाती हैं।

कीमतें आसमान नहीं छू रहीं—असल में हमारी मान्यताएँ उछल रही हैं।

डॉ मुकेश 'असीमित' Feb 10, 2026 समसामयिकी 0

सोना कोई उपयोगी वस्तु नहीं, बल्कि मानव आकांक्षाओं और असुरक्षाओं का सबसे चमकदार प्रतीक है। न वह भूख मिटाता है, न ठंड से बचाता है, फिर भी सदियों से उसे सबसे अधिक मूल्य दिया गया। इस लेख में सोने की बढ़ती कीमतों को बाज़ार की चाल नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक मान्यताओं का परिणाम बताया गया है। कैसे हमने सोने को सम्मान, सुरक्षा, प्रतिष्ठा और विश्वास का पर्याय बना दिया—और बाज़ार ने इन्हीं भावनाओं को भुनाना सीख लिया। मंदिरों, बैंकों और आभूषणों में सिमटे सोने के माध्यम से यह रचना भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और अर्थव्यवस्था के अंतर्संबंधों पर गहन वैचारिक दृष्टि डालती है। यह लेख सोने से ज़्यादा मानव मन की कीमत पर सवाल उठाता है।

गोयल डेंटल अस्पताल में निशुल्क दंत चिकित्सा शिविर

डॉ मुकेश 'असीमित' Feb 9, 2026 News and Events 0

गोयल डेंटल क्लिनिक में डॉ. हिमांशु गोयल द्वारा 1 फरवरी से 31 मार्च 2026 तक संचालित निःशुल्क दंत चिकित्सा शिविर के अंतर्गत लायंस क्लब सार्थक परिवार के लिए विशेष शिविर आयोजित किया गया, जिसमें आधुनिक तकनीक से दंत परीक्षण, स्केलिंग एवं डिजिटल एक्स-रे की सुविधाएँ प्रदान की गईं।

खाओ और खाने दो-पापी पेट का सवाल

डॉ मुकेश 'असीमित' Feb 9, 2026 व्यंग रचनाएं 0

पेट की राजनीति बड़ी सीधी है—खाली पेट सिर्फ़ खाना माँगता है, भरा पेट सवाल। बब्बन चाचा के पेट से देश की प्रगति नापी जा सकती है, क्योंकि जहाँ खाना दिखा, वहाँ लोकतंत्र अपने आप चुप हो जाता है।