किराएदार की व्यथा: एक हास्य-व्यंग्य रचना

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 16, 2025 Blogs 0

इस रचना में किराएदार की ज़िंदगी की उन अनकही व्यथाओं को हास्य और व्यंग्य के लहज़े में उजागर किया गया है, जिन्हें हम सभी कभी न कभी भुगत चुके हैं। मकान मालिक की एक्स-रे दृष्टि, दूध की बाध्यता, रद्दी की एफडी और ‘बेटे समान’ किराएदार बनने की त्रासदी — सबकुछ इतने रोचक ढंग से बुना गया है कि हँसी के साथ एक टीस भी उभरती है।

क्रौंच पक्षी और वाल्मीकि: संवेदना से जन्मा साहित्य

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 16, 2025 हिंदी लेख 2

महर्षि वाल्मीकि और क्रौंच पक्षी का ऐतिहासिक प्रसंग संस्कृत साहित्य में भावनात्मक संवेदना का महत्व कालिदास की काव्य कृतियों का मूल्य और समकालीन साहित्य साहित्य का उद्देश्य और संवेदनशीलता

बरसात की बूंदे -कविता-रचना

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 15, 2025 हिंदी कविता 0

बारिश की धीमी बूँदें जैसे प्रेम पत्र हों, जो धरती पर उतरते ही एक गीत बन जाएं। डॉ. मुकेश असीमित की कविता "बरसात की बूंदे" न केवल प्रकृति की कोमलता को दर्शाती है, बल्कि उसमें छिपे प्रेम, आत्मिक जुड़ाव और आशाओं को भी खूबसूरती से रचती है।

बाढ़ में डूबकर भी कैसे तरें-हास्य व्यंग्य रचना

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 15, 2025 व्यंग रचनाएं 6

बाढ़ आई नहीं कि सरकारी महकमें ‘आपदा प्रबंधन’ में ऐसे सक्रिय हो गए जैसे ‘मनौती’ पूरी हो गई हो। नदी उफनी नहीं कि पोस्टर लग गए, हेलिकॉप्टर उड़ गए, और राहत की थैलियाँ गिरने लगीं। मगरमच्छ तक घरों में घुस आए और मंत्रीजी बोले—“हर घर नल-जल योजना अब पूरी हो चुकी है।” प्रेस कांफ्रेंस में ठंडा पिलाकर सवाल बंद करवाना ही शायद सरकार का असली राहत प्रबंधन है।

गिरने में क्या हर्ज़ है-किताब समीक्षा-प्रभात गोश्वामी

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 15, 2025 Book Review 3

डॉ. मुकेश असीमित का व्यंग्य संग्रह ‘गिरने में क्या हर्ज़ है’ न केवल भाषा की रवानगी दिखाता है, बल्कि विसंगतियों की गहरी पड़ताल भी करता है। समकालीन व्यंग्य की धारा में यह संग्रह एक उम्मीद की रेखा खींचता है।

“स्वतंत्रता के शेष रहे प्रश्न”— डॉ. मुकेश असीमित

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 14, 2025 हिंदी कविता 2

क्या आज़ादी सिर्फ कैलेंडर की छुट्टी बनकर रह गई है? डॉ. मुकेश असीमित द्वारा स्वरचित और स्वरांजलि में प्रस्तुत यह समकालीन कविता "स्वतंत्रता के शेष प्रश्न" — आज़ादी के अर्थ पर एक गूढ़, विचारोत्तेजक और आत्ममंथन कराती रचना है। जब पूरा देश तिरंगे के नीचे झूम रहा है, कुछ सवाल अब भी हवा में तैर रहे हैं... यह वीडियो स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर, भारत की आज़ादी की वर्तमान व्याख्या को लेकर एक भावपूर्ण प्रस्तुति है। पूरी कविता ज़रूर सुनिए — शायद इन सवालों में कहीं आपका भी एक सवाल छुपा हो।

कालीधर लापता — एक आधी-अधूरी भावुकता की खोज-फ़िल्म समीक्षा

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 14, 2025 Cinema Review 2

कालीधर लापता में कुंभ मेला बनारस के घाटों तक सिमट गया, अल्ज़ाइमर से पीड़ित किरदार अंग्रेज़ी बोलने लगा, और एक मासूम बच्चा शराब का इंतज़ाम करता दिखा! इन विसंगतियों ने कहानी की संवेदनशीलता को झकझोर दिया। फिल्म भावनात्मक हो सकती थी, पर बेमेल दृश्यों और स्क्रिप्ट की भूलों ने इसके असर को कमज़ोर कर दिया।

मेरी बे-टिकट रेल यात्रा-यात्रा संस्मरण

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 14, 2025 संस्मरण 2

हॉस्टल की 'थ्रिल भरी' दुनिया से निकली एक रोमांचक रेल यात्रा की कहानी, जहाँ एक मेडिकल छात्र पुरानी आदतों के नशे में बिना टिकट कोटा पहुँचने की जुगत भिड़ाता है। कभी पचास के खुले न मिलने की मजबूरी, कभी टीटी से आँख-मिचौली, तो कभी जनरल डिब्बे में ‘इंच भर की सीट’ पर संतुलन साधना — हर दृश्य हास्य से लबरेज़ है। डर की कई 'किश्तों' के बीच चलती ट्रेन में 'किक' का अहसास, और आखिर में स्टेशन पर छलांग मारकर जीत का रोमांच। एक बेधड़क, बेपरवाह, लेकिन दिलचस्प रेल यात्रा — सिर्फ़ व्यंग्य की भाषा में!

Grand Conclusion of the Free RO Water Facility by Lions Club Sarthak

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 14, 2025 News and Events 0

Lions Club Sarthak successfully concluded its three-month-long free RO water service at Church Ground, Gangapur City. Initiated on May 15, the project benefited morning walkers, children, job aspirants, and rural travelers. On the final day, club members distributed buttermilk to mark the occasion. Despite rainy weather, member participation remained strong, reflecting true community spirit. The project was coordinated by Dr. Mukesh Garg with support from dedicated volunteers.

From Thorns of Truth to Roses of Laughter

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 13, 2025 Book Review 0

“In today’s democracy, it’s not votes but bar graphs that count.” From buffaloes and NGOs to spreadsheets and spiritual records, “Numbers Speak” unveils how statistics are polished and presented as truth. Part of Roses and Thorns, this satire pierces through media hype and political spin with wit and bite—translated from Hindi with soul intact.