सावन आया-हिंदी कविता
इस कविता में सावन का रसभीना चित्र है—जहाँ झूले हैं, कजरी है, और बदरा की फुहारें हैं, वहीं किसी के पिया की दूरी आँखों में तड़प बनकर उतरती है। यह रचना सावन की सौंदर्याभिव्यक्ति और विरह के भाव का सुंदर संगम है।
नाम. :- उत्तम कुमार तिवारी " उत्तम " पिता का नाम :- स्व० पंडित देवी दयाल तिवारी माता का नाम :- स्व० श्री मती राम निहोरी तिवारी पत्नी का नाम :- श्री मती नीलम राजे तिवारी निवास :- ३४७/३६१ क पुराना टिकैत गंज पोस्ट राजा जी पुरम , लखनऊ , उ प्र पिन न० २२६०१७ सम्पर्क सूत्र :- 7452015444 शिक्षा :- परास्नातक ( विषय - समाज शास्त्र ) रुचि :- गद्य पद्य लेखन , पाठन प्रकाशन :- साझा संकलन :- अर्धपृष्ठ , कलम की ज़ुबानी , भूले बिसरे गीत , स्वभिमान , जगमगाते खद्योत , शब्दों की उड़ान , स्वाभिमान ई पत्रिका , राज श्री साहित्य अकादमी ई पत्रिका , जोहार दर्पण ई पत्रिका , अरुणीता ई पत्रिका , प्रणाम पर्यटन पत्रिका , अमर उजाला काव्य मे ३४२ रचनाओ का प्रकाशन सम्मान पत्र :- विभिन्न काव्य मंच द्वारा सम्मान पत्र ऑन लाइन मंच एवं ऑफ लाइन मंच द्वारा दूरदर्शन वन्स मोर कार्यक्रम के काव्य पाठ शिविका झरोखा डाट काम द्वारा कई बार नगद उपहार राशि प्राप्त हुई । कई देशो मे मेरी रचनाओ को पढ़ा जाता है एवं सराहा जाता है । उत्तम कुमार तिवारी "उत्तम" ३६१ " का पुराना टिकैत गंज लखनऊ पिन कोड २२६०१७
इस कविता में सावन का रसभीना चित्र है—जहाँ झूले हैं, कजरी है, और बदरा की फुहारें हैं, वहीं किसी के पिया की दूरी आँखों में तड़प बनकर उतरती है। यह रचना सावन की सौंदर्याभिव्यक्ति और विरह के भाव का सुंदर संगम है।
द्रोपदी की पुकार, कृष्ण की कृपा और महारथियों की चुप्पी — यह कविता महाभारत की उस घड़ी का चित्रण है जहाँ न्याय मौन हो गया, और एक स्त्री की पीड़ा ने देवता को पुकारा। चीरहरण नहीं रुका, पर चीर बढ़ता गया — और मौन महारथियों की हार दिखी।
यह कविता जीवन की उस रहस्यमय दिशा की तलाश है, जहाँ कोई पदचिन्ह नहीं और कोई उत्तर नहीं। कवि उस अज्ञात छोर की ओर देखता है, जहाँ जीवन कभी मुस्कराता, कभी मौन चलता चला जाता है। यह आत्ममंथन की यात्रा है — जिसमें कवि न केवल जीवन को खोजता है, बल्कि स्वयं से भी प्रश्न करता है। हर पंक्ति एक सूक्ष्म पीड़ा को उद्घाटित करती है, जहाँ जीवन का मौन गूंजता है। कविता एक प्रतीक है उस क्षण का, जब मनुष्य समझना चाहता है — क्या सच में जीवन कुछ कहे बिना ही चला जाता है, और पीछे छोड़ जाता है... एक खालीपन।