‘डिजिटल इंडिया’ से ‘डिजिटल असमानता’ तक : क्या सबको मिल रहा है बराबरी का लाभ?

Dr Shailesh Shukla Jul 29, 2025 समसामयिकी 1

डिजिटल इंडिया के दस वर्षों बाद, आज़ादी और समानता का वादा अधूरा प्रतीत होता है। ग्रामीण भारत अब भी डिजिटल संसाधनों की कमी, तकनीकी अक्षमता और भाषा बाधाओं से जूझ रहा है। सरकारी ऐप्स और योजनाएं केवल कागज़ों में प्रभावी हैं, ज़मीनी स्तर पर आमजन तकनीकी अंधेरे में हैं। क्या यह समावेशी सशक्तिकरण है या डिजिटल बहिष्करण?

जल संकट : टिकाऊ प्रबंधन की अनिवार्यता

Dr Shailesh Shukla Jul 24, 2025 समसामयिकी 1

भारत में जल संकट गहराता जा रहा है। 18% जनसंख्या के बावजूद भारत के पास मात्र 4% जल संसाधन हैं। जलवायु परिवर्तन, अति-दोहन और नीतिगत असफलताओं ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। दिल्ली, बेंगलुरु जैसे शहर "डे ज़ीरो" झेल चुके हैं। प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता चिंताजनक स्तर तक घट चुकी है। अब यह केवल पर्यावरण नहीं, एक सामाजिक-राजनीतिक संकट बन चुका है।

हिंदी प्रयोग, सहयोग, विरोध और गतिरोध-कविता

Dr Shailesh Shukla Jul 17, 2025 हिंदी कविता 1

यह कविता हिंदी भाषा को राजभाषा का दर्जा मिलने के बावजूद उसके व्यावहारिक उपयोग में आने वाली चुनौतियों और उपेक्षा को दर्शाती है। यह बताती है कि कैसे हिंदी केवल कागजी कार्यवाही और भाषणों तक सीमित है, जबकि दैनिक जीवन, प्रशासन और तकनीकी क्षेत्रों में अंग्रेजी का वर्चस्व है। कविता हिंदी के प्रति दिखावे के सम्मान और वास्तविक उपेक्षा के बीच के अंतर को उजागर करती है, और इस बात पर जोर देती है कि हिंदी को सही मायने में सम्मान तभी मिलेगा जब वह जन-जन की भाषा बने और हर क्षेत्र में उसका सच्चा उपयोग हो।

भाषा एवं राजभाषा के रूप में हिंदी की विकास यात्रा

Dr Shailesh Shukla Jul 3, 2025 हिंदी लेख 0

यह आलेख हिंदी भाषा की ऐतिहासिक जड़ों, संवैधानिक स्थिति, डिजिटल युग में इसकी भूमिका और वैश्विक पहचान की गहराई से पड़ताल करता है। हिंदी के सामाजिक, तकनीकी और प्रशासनिक विकास को रेखांकित करते हुए, इसे एक प्रभावी राजभाषा और सांस्कृतिक संवाहक के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

संविधान सभा में हिंदी पर हुई बहसें और उनके विविध परिणाम

Dr Shailesh Shukla Jun 28, 2025 Blogs 0

यह लेख भारतीय संविधान सभा में राष्ट्रभाषा पर हुए विमर्श की जटिलता को रूपायित करती है — जहाँ हिंदी को एकता का प्रतीक मानने वालों और भाषाई विविधता के पक्षधर विचारों में संघर्ष स्पष्ट है। यह भाषाई नीति, पहचान और संवैधानिक समझ का प्रतीकात्मक चित्रण है।

काश मैं सामग्री विभाग का प्रमुख होता-डॉ शैलेश

Dr Shailesh Shukla Jun 24, 2025 Blogs 0

जब हम छोटे थे तो समझते थे कि सबसे ताकतवर लोग पुलिसवाले होते हैं, फिर बड़े हुए तो लगा कि मंत्री सबसे ताकतवर होते हैं। लेकिन जैसे ही किसी सरकारी या कॉरपोरेट दफ्तर में कदम रखा, सच्चाई की बिजली गिरी— सबसे ताकतवर तो सामग्री विभाग का प्रमुख (Head of Material Department) होता है! यह कोई […]