पुस्तक समीक्षा-भारत का आदिवासी राबिनहुड टंट्या मामा

लेखक विवेक रंजन श्रीवास्तव

प्रकाशक ज्ञानमुद्रा, भोपाल

भारत का आदिवासी राबिनहुड टंट्या मामा पुस्तक एक एतिहासिक कथा साहित्य है। यह उपन्यासिक कृति 19वीं सदी के महान आदिवासी जननायक के संघर्ष, अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ उनके विद्रोह और गरीबों के प्रति उनकी दरियादिली को रेखांकित करती है। यह भारत के आदिवासी राबिनहुड टंट्या मामा , देश भक्त स्वतंत्रता सेनानी की खोई पहचान को सामने लाती है। विवेक रंजन श्रीवास्तव ने राबिनहुड टंट्या मामा को एक योद्धा, आध्यात्मिक मार्गदर्शक और दूरदर्शी नेता के रुप में प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक में दमनकारी जमींदारी प्रथा और अंग्रेजी शासन के खिलाफ आदिवासी समुदाय के एकजुट संघर्ष को दर्शाया गया है। वह राबिनहुड की तरह जंगलों में रहता है। उसके साथी भो वैसे ही गरीब, वंचित जुल्म के शिकार पर अदम्य साहसी लोग हैं। वह अमीरों और अंग्रेज अधिकारियों पर धावा बोलता है और उनकी दौलत लूटकर आदिवासी बस्तियों में बांट देता है। टंट्या मामा को लोक मानस में एक ईश्वर तुल्य जननायक, मसीहा और आदिवासी नायक के रुप में जो पहचान मिली थी उसे उसी स्वरूप में सफलता पूर्वक प्रस्तुत किया गया है। यह पुस्तक न केवल एक स्वतंत्रता सेनानी की कहानी है बल्कि यह अन्याय के खिलाफ संघर्ष करने वाले प्रतीक को सजीव करती है। टंट्या ने जल-जंगल-जमीन की लडाई के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया था , किन्तु उन पर अब तक कोई भी कथा साहित्य नहीं था , परिचयात्मक जीवनीयों को पढ़कर उसे कथा रूप में लेखक ने रोचक प्रवाहमान प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया है। पुस्तक की भाषा सरल है, जिससे यह बच्चों और किशोरों के लिए भी पढ़ने योग्य है। पुस्तक आज के समय भी आदिवासी अधिकारों और अस्मिता के संघर्ष को उजागर करती है। यह पुस्तक उन पाठकों के लिए आवश्यक है, जो भारतीय स्वतंत्रता सग्राम के अनसुने नायकों और आदिवासी संघर्षों के बारे में जानना चाहते हैं। भारत के बहुसंख्यक बहुजनों के न केवल इतिहास बल्कि उनके बेहतर भविष्य की चाहत रखने वाले हर व्यक्ति को यह किताब जरुर पढ़ना चाहिए, पुस्तक भारतीय इतिहास को देखने के लिए नई दृष्टि प्रदान करती है। भारत का आदिवासी राबिनहुड टंट्या मामा के लेखक विवेक रंजन श्रीवास्तव ने कठिन परिश्रम कर टटया मामा का इतिहास खोजकर उसका पुस्तक रुप दिया है, मैं उन्हें इस कार्य की बधाई देता हूं।

डा. विजय चौरसिया

लोकसंस्कृतिकार चौरसिया सदन गाडासरई जिला

डिन्डौरी मध्यप्रदेश

Vivek Ranjan Shreevastav

विवेक रंजन श्रीवास्तव ,वरिष्ठ व्यंग्यकार, स्वतंत्र लेखक ( हिंदी व…

विवेक रंजन श्रीवास्तव ,वरिष्ठ व्यंग्यकार, स्वतंत्र लेखक ( हिंदी व अंग्रेजी ) २८ जुलाई १९५९ में मण्डला के एक साहित्यिक परिवार में जन्म . माँ ... स्व दयावती श्रीवास्तव ...सेवा निवृत प्राचार्या पिता ... प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव विदग्ध ... वरिष्ठ साहित्यकार, कवि अनुवादक पत्नी ... श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव ... स्वतंत्र लेखिका इंजीनियरिंग की पोस्ट ग्रेडुएट शिक्षा के बाद विद्युत मण्डल में शासकीय सेवा . संप्रति जबलपुर मुख्यालय में मुख्य अभियंता के रूप में सेवा निवृत्त . परमाणु बिजली घर चुटका जिला मण्डला के प्रारंभिक सर्वेक्षण से स्वीकृति , सहित अनेक उल्लेखनीय लघु पन बिजली परियोजनाओ , १३२ व ३३ कि वो उपकेंद्रो , केंद्रीय प्रशिक्षण केंद्र जबलपुर आदि के निर्माण का तकनीकी गौरव . बिजली का बदलता परिदृश्य , जल जंगल जमीन आदि तकनीकी किताबें . हिन्दी में वैज्ञानिक विषयों पर निरंतर लेखन , हिन्दी ब्लागिंग . १९९२ में नई कविताओ की पहली किताब आक्रोश तार सप्तक अर्ध शती समारोह में भोपाल मे विमोचित , इस पुस्तक को दिव्य काव्य अलंकरण मिला .. व्यंग्य की किताबें रामभरोसे , कौआ कान ले गया , मेरे प्रिय व्यंग्य , धन्नो बसंती और बसंत , बकवास काम की , जय हो भ्रष्टाचार की ,समस्या का पंजीकरण , खटर पटर व अन्य प्रिंट व किंडल आदि प्लेटफार्म पर . समस्या का समाधान का अंग्रेजी अनुवाद किंडल पर सुलभ मिली भगत , एवं लाकडाउन नाम से सँयुक्त वैश्विक व्यंग्य संग्रह का संपादन . व्यंग्य के नवल स्वर , आलोक पौराणिक व्यंग्य का ए टी एम , बता दूं क्या , अब तक 75 , इक्कीसवीं सदी के 131 श्रेष्ठ व्यंग्यकार , 251 श्रेष्ठ व्यंग्यकार , निभा आदि अनेक संग्रहो में सहभागिता भगत सिंह , उधमसिंह , रानी दुर्गावती आदि महान विभूतियों पर चर्चित किताबें लिखीं हैं जलनाद नाटक संग्रह विश्ववाणी से राष्ट्रिय स्तर पर पुरस्कृत , हिन्दोस्तां हमारा , जादू शिक्षा का नाटक संग्रह चर्चित व म. प्र. साहित्य अकादमी से सम्मानित, तथा पुरस्कृत पाठक मंच के माध्यम से नियमित पुस्तक समीक्षक e - abivyakti के साहित्य सम्पादक म प्र साहित्य अकादमी ,पाथेय मंथन ,वर्तिका , हिन्दी साहित्य सम्मेलन , तुलसी साहित्य अकादमी व अनेक साहित्यिक़ संस्थाओं , से सम्मानित सामाजिक लेखन के लिये रेड एण्ड व्हाईट सम्मान से सम्मानित . वर्तिका पंजीकृत साहित्यिक सामाजिक संस्था के राष्ट्रीय संयोजक टी वी , रेडियो , यू ट्यूब , पत्र पत्रिकाओ में निरंतर प्रकाशन . व अन्य ब्लॉग संपर्क... ए २३३ , ओल्ड मिनाल रेजीडेंसी , भोपाल , म प्र , ४६२०२३

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