रिश्वत के नए मॉडल – रिश्वत अब एप-आधारित है

डॉ मुकेश 'असीमित' May 30, 2026 व्यंग रचनाएं 0

क्या होगा जब रिश्वत भी UPI, EMI और क्रेडिट स्कोर पर मिलने लगे? प्रस्तुत है एक तीखा हास्य-व्यंग्य, जिसमें भ्रष्टाचार 2.0, BribeSync, रिश्वत क्रेडिट स्कोर और डिजिटल घूस की कल्पना के माध्यम से व्यवस्था की विडंबनाओं पर करारा कटाक्ष किया गया है।

कर्म ठोक : शेयर मार्केट, सरकारी नौकरी और किस्मत पर व्यंग्य

Ram Kumar Joshi May 29, 2026 हास्य रचनाएं 1

सरकारी नौकरी में रहते हुए अतिरिक्त कमाई के सपने देखने वाले दो प्रवक्ता शेयर बाजार के एफ एंड ओ में अपनी किस्मत आजमाते हैं। नतीजा वही निकलता है जो अक्सर बिना समझदारी के निवेश करने वालों का होता है। हास्य, कटाक्ष और जीवन की विडंबनाओं से भरा यह व्यंग्य सरकारी तंत्र और त्वरित अमीरी के मोह पर तीखा प्रहार करता है।

बात में वज़न होना चाहिए

डॉ मुकेश 'असीमित' May 29, 2026 व्यंग रचनाएं 0

आज के समय में सिर्फ बात करना काफी नहीं है, बात में वज़न भी होना चाहिए। राजनीति से लेकर मीडिया, ज्योतिष, अर्थव्यवस्था और चिकित्सा जगत तक हर जगह "भारी" शब्द का बोलबाला है। डॉ. मुकेश असीमित का यह व्यंग्य उसी मानसिकता पर चुटीला कटाक्ष है, जहाँ हल्की बातों की कोई कीमत नहीं और हर चीज़ को खबर बनने के लिए भारी होना ज़रूरी है।

आखिर क्यों राजनीतिक विकल्प की निरंतर तलाश में हैं भारतीय नागरिक

Dr Shailesh Shukla May 29, 2026 समसामयिकी 1

भारतीय लोकतंत्र में मतदाता अब केवल परंपरागत राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं रहना चाहता। बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार, राजनीतिक ध्रुवीकरण और जनसमस्याओं के समाधान की कमी ने नागरिकों को नए राजनीतिक विकल्पों की तलाश के लिए प्रेरित किया है। आम आदमी पार्टी, टीवीके और सोशल मीडिया आधारित अभियानों की लोकप्रियता इसी बदलती जनभावना का संकेत है। यह लेख भारतीय मतदाता की मनोवृत्ति, राजनीतिक विश्वास के संकट और लोकतंत्र में उभरते नए विकल्पों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है।

टाइम ट्रैवल: ब्रह्मांड की पुरानी फाइल में नई नोटशीट

डॉ मुकेश 'असीमित' May 28, 2026 ललित निबंध 0

टाइम ट्रैवल का सपना हर आदमी ने कभी-न-कभी देखा है—काश अतीत में जाकर दो-चार गलतियाँ सुधार आते। लेकिन ब्रह्मांड कोई तहसील का बाबू नहीं कि पुरानी फाइल में नई नोटशीट लगाकर मामला निपटा दे।

आम का मौसम : मधुमेही मनुष्य का मीठा महाभारत

डॉ मुकेश 'असीमित' May 27, 2026 ललित निबंध 0

आम कोई आम फल नहीं जी। खासकर हम जैसे डायबिटीज़ के मारे लोगों के लिए आम वैसा है जैसे सामने महबूबा खड़ी हो—महकती, मुस्कराती, रस टपकाती—और हम ग्लूकोमीटर की अदालत में अपराधी की तरह खड़े हों।

पावरलेस बर्थडे के फूल : राजनीति, होर्डिंग्स और भीड़तंत्र पर तीखा हास्य-व्यंग्य

Prem Chand Dwitiya May 25, 2026 व्यंग रचनाएं 1

जब सत्ता चली जाती है तो फूल भी कृत्रिम लगने लगते हैं। “पावरलेस बर्थडे के फूल” राजनीति, भीड़तंत्र, होर्डिंग संस्कृति और लोकतांत्रिक नौटंकी पर करारा हास्य-व्यंग्य प्रस्तुत करती है।

भूत इश्क का-हास्य रचना

Ram Kumar Joshi May 25, 2026 हास्य रचनाएं 1

छोटे से गांव में फैले प्रेम प्रसंग, पंचायत की चिंता और एक चतुर कोतवाल की अनोखी परीक्षा—“भूत इश्क का” हास्य, विडंबना और देसी मनोविज्ञान से भरपूर व्यंग्य कथा है, जो इश्क़ के चढ़ते और उतरते बुखार का मज़ेदार चित्रण करती है।

लोकतंत्र में सरकार की आलोचना देशद्रोह नहीं: प्रेस स्वतंत्रता पर गंभीर विमर्श

Dr Shailesh Shukla May 22, 2026 शोध लेख/विमर्श 0

लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति सत्ता से प्रश्न पूछने की स्वतंत्रता में निहित होती है। यह लेख अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, प्रेस की स्वायत्तता, मीडिया की जिम्मेदारी और लोकतांत्रिक मूल्यों पर गहन चिंतन प्रस्तुत करता है।

हिंदी पत्रकारिता में महिलाएं : 200 साल बाद भी अधूरी यात्रा

Dr Shailesh Shukla May 22, 2026 आलोचना ,समीक्षा 1

हिंदी पत्रकारिता के दो सौ वर्षों के इतिहास में महिलाओं की भागीदारी अब भी बेहद सीमित है। यह लेख हिंदी मीडिया में महिला पत्रकारों की स्थिति, नेतृत्व में असमानता, लैंगिक पूर्वाग्रह और बदलाव की संभावनाओं का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है।