आज रपट जाएँ तो हमें न उठइयो

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 24, 2026 व्यंग रचनाएं 0

“भाइयो-बहनो, आज अगर हम रपट जाएँ… तो हमें न उठइयो।” लोकतंत्र के इस विचित्र महोत्सव में हर वर्ग अपनी-अपनी शैली में फिसल रहा है—कोई वादों पर, कोई सच्चाई पर, कोई सिद्धांत पर… और आम आदमी, वह तो रोज़ की आदत से फिसल ही रहा है।

कृत्रिम मेधा आधारित शिक्षा : क्या शिक्षक की भूमिका बदलेगी या समाप्त होगी?

Dr Shailesh Shukla Mar 24, 2026 शोध लेख 1

कृत्रिम मेधा शिक्षा को तेज़, व्यक्तिगत और सुलभ बना रही है, लेकिन इसके साथ ही रचनात्मकता, नैतिकता और समानता जैसी चुनौतियाँ भी सामने आ रही हैं। इस बदलते दौर में शिक्षक की भूमिका समाप्त नहीं, बल्कि और अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है—एक मार्गदर्शक और संवेदनशील निर्माता के रूप में।

विकास का विस्तृत वितान: सूक्ष्म उद्योगों से सशक्त होता उत्तर प्रदेश और सुदृढ़नेतृत्व की सार्थक साधना

Dr Shailesh Shukla Mar 23, 2026 शोध लेख 0

उत्तर प्रदेश ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। 2000 करोड़ से अधिक के ऋण स्वीकृति, हजारों इकाइयों को सहायता और उच्च स्ट्राइक रेट के साथ यह मॉडल न केवल आर्थिक विकास बल्कि सामाजिक सशक्तिकरण का भी प्रतीक बनकर उभरा है।

आखिर क्यों देश भर में निरंतर लोकप्रिय हो रहा है विकास का उत्तर प्रदेश मॉडल

Dr Shailesh Shukla Mar 22, 2026 शोध लेख 1

क्या कारण है कि उत्तर प्रदेश का विकास मॉडल आज पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है? आर्थिक प्रगति, निवेश, अवसंरचना और प्रशासनिक सुधारों का यह समन्वित मॉडल विकास की नई परिभाषा प्रस्तुत करता है।

राष्ट्रीय सुरक्षा और एआई: साइबर युद्ध के नए दौर की चुनौती

Dr Shailesh Shukla Mar 20, 2026 शोध लेख 0

कृत्रिम मेधा (AI) ने युद्ध की परिभाषा बदल दी है। साइबर हमले अब केवल तकनीकी खतरे नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और सामाजिक स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन चुके हैं। यह लेख साइबर युद्ध के बदलते स्वरूप, भारत की स्थिति और एआई की दोधारी भूमिका पर गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है।

भारतीय कैलेंडर और उसका वैज्ञानिक आधार: समय का जीवित व्याकरण

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 17, 2026 Darshan Shastra Philosophy 0

“यहाँ समय केवल गिना नहीं जाता, समझा भी जाता है—भारतीय पंचांग इसी जीवंत विज्ञान का प्रमाण है।”“चंद्र और सूर्य के संतुलन में बसता है भारतीय कालज्ञान—जहाँ तिथि भी बदलती है और सोच भी।”

नाम में क्या रखा है? — बहुत कुछ रखा है

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 17, 2026 व्यंग रचनाएं 0

“आजकल आपका नाम वो नहीं होता जो माता-पिता ने रखा था, बल्कि वो होता है जो किसी अज्ञात व्यक्ति ने अपने मोबाइल में सेव कर रखा है… और तभी आप डॉक्टर से सीधे ‘HD Wallpaper’ बन जाते हैं।”

बोनसाई की कला

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 16, 2026 हिंदी लेख 0

बोनसाई केवल बागवानी की कला नहीं है, यह समाज की एक गहरी रूपकात्मक सच्चाई भी है। कई लोग और संस्थाएँ हमें सींचते तो हैं, पर उतना ही बढ़ने देते हैं जितना उनके लिए सुविधाजनक हो। जैसे चाय के बागानों में एक संभावित वृक्ष को बार-बार काटकर पौधा बनाए रखा जाता है, वैसे ही जीवन के कई क्षेत्रों में प्रतिभाओं को सीमित रखने की अदृश्य व्यवस्था काम करती रहती है।

कदमोपाख्यान : देवसभा में कड़े क़दमों पर कशमकश 

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 16, 2026 व्यंग रचनाएं 0

मृत्युलोक की राजनीति में “कड़े कदम” उठाने की अद्भुत तकनीक विकसित हो चुकी है। हर संकट में घोषणा होती है कि कड़े कदम उठाए जाएंगे—और जनता आश्वस्त हो जाती है। जब इस तकनीक की चर्चा देवलोक पहुँची, तो इंद्रदेव ने नारद मुनि को इसकी तहकीकात के लिए भेजा। उनकी रिपोर्ट सुनकर देवसभा भी सोच में पड़ गई—कहीं यह तकनीक देवलोक को भी मृत्युलोक न बना दे।

संवेदना , में छिपी अपनी वेदना !

Prem Chand Dwitiya Mar 16, 2026 व्यंग रचनाएं 1

आज के सार्वजनिक जीवन में संवेदना भी एक सार्वजनिक प्रदर्शन बन गई है। किसी की पीड़ा कम हो या न हो, पर फोटो, पोस्ट और लाइक-शेयर की दुनिया में संवेदना का बाजार खूब गर्म है। यह व्यंग्य उसी विडंबना को पकड़ता है जहाँ असली वेदना से ज्यादा महत्व संवेदना की तस्वीरों को मिल जाता है।