ईरान युद्ध से बहुध्रुवीय दुनिया का मार्ग हुआ मज़बूत

Adv. Sanjaya Pandey Jun 24, 2026 Foreign Affair 0

ईरान युद्ध के बाद चीन, रूस और ईरान का बढ़ता रणनीतिक सहयोग केवल पश्चिम एशिया का समीकरण नहीं बदल रहा, बल्कि अमेरिकी प्रभुत्व से अलग एक बहुध्रुवीय विश्व-व्यवस्था के निर्माण को भी गति दे रहा है।

यूएनओ की माफ़िक: ताकतवर के पक्ष में खड़ी पंचायत पर तीखा व्यंग्य

Ram Kumar Joshi Jun 24, 2026 व्यंग रचनाएं 1

गांव का धन्ना सेठ अमरीक सिंह धन, भय और प्रभाव के बल पर पंचायत को अपने पक्ष में कर चुका था। जब उसके अत्याचारों से त्रस्त ऐनाराम न्याय की उम्मीद लेकर पंचों के सामने पहुंचा, तो फैसला भी उसी शक्तिशाली व्यक्ति के हित में सुनाया गया। यह व्यंग्य-कथा बताती है कि निष्पक्षता का मुखौटा पहनी संस्थाएं किस तरह कमजोर से समर्पण और ताकतवर से शांति की अपेक्षा करती हैं।

क्या लौटाऊँगा? — जीवन की असली कमाई का प्रश्न

Ram Kumar Joshi Jun 24, 2026 हिंदी लेख 1

जीवनभर नौकरी, परिवार और प्रतिष्ठा के लिए काम करने वाला व्यक्ति जब साठ वर्ष की आयु में अपनी वास्तविक कमाई का हिसाब करता है, तो उसके सामने एक गहरा प्रश्न खड़ा होता है—मृत्यु के बाद वह ईश्वर के पास क्या लेकर जाएगा?

लोकतंत्र : संवैधानिक प्रावधान और वास्तविक व्यवहार में बड़ा अंतर

Dr Shailesh Shukla Jun 23, 2026 समसामयिकी 0

लोकतंत्र : संवैधानिक प्रावधान और वास्तविक व्यवहार में बड़ा अंतर डॉ. शैलेश शुक्ला लोकतंत्र को विश्व की सर्वाधिक जनोन्मुख और उत्तरदायी शासन व्यवस्था माना जाता है। इसकी मूलअवधारणा अत्यंत सरल और आकर्षक है—सत्ता का वास्तविक स्रोत जनता होती है। जनता अपनेप्रतिनिधियों का चुनाव करती है, सरकार बनाती है और अंततः वही शासन की अंतिम स्वामिनी होती […]

बचा हुआ लोकतंत्र | वोट, जनता और सत्ता पर तीखा राजनीतिक व्यंग्य

Pradeep Audichya Jun 23, 2026 व्यंग रचनाएं 0

बचा हुआ लोकतंत्र,, – लोकतंत्र किसके पास है ? ये प्रश्न मंच ने नीचे भरी सभा में फेंका ।इतनी जोर से फेंका कि तंत्र द्वारा घेरकर लाए गए लोक ( लोग) डर गए। लोग सोचने लगे शायद कुछ चोरी हो गया और इसका इल्ज़ाम हमपर आयेगा ।सभा में लोग एक दूसरे को संदेह की निगाह […]

राम, बाहर तो निकल! | कोचिंग हादसों और सिस्टम की नाकामी पर तीखा व्यंग्य

डॉ मुकेश 'असीमित' Jun 23, 2026 व्यंग रचनाएं 0

बरसात में कोचिंग के तहखाने पानी से भर जाते हैं, गर्मी में बंद इमारतें आग का गोला बन जाती हैं और जर्जर स्कूलों की छतें बच्चों के सिर पर गिरती हैं। दुर्घटना के बाद मुआवजा, बयान और जाँच समिति तैयार मिलते हैं—सिर्फ जवाबदेही नहीं मिलती। इसी संवेदनहीन व्यवस्था पर करारा प्रहार है व्यंग्य रचना—“राम, बाहर तो निकल!”

चौबे जी हो गये डब्बे जी-आरोप, गाली और गले मिलन की व्यंग्य गाथा

Ram Kumar Joshi Jun 9, 2026 व्यंग रचनाएं 1

लोकतंत्र, राजनीतिक बहस, आरोप-प्रत्यारोप और पंचायत की अराजकता पर आधारित डॉ. राम कुमार जोशी का तीखा एवं हास्यपूर्ण हिंदी व्यंग्य।

टैंकर देखकर प्यास बुझाओ

Pradeep Audichya Jun 7, 2026 व्यंग रचनाएं 0

"टैंकर देखकर प्यास बुझाओ" प्रसिद्ध व्यंग्यकार प्रदीप औदिच्य की एक मार्मिक और तीखी व्यंग्य रचना है, जिसमें ग्रामीण भारत की जल समस्या, सरकारी विभागों की लालफीताशाही, कागजी विकास, हैंडपंपों की दुर्दशा और फोटो-आधारित राजनीति पर करारा कटाक्ष किया गया है।

मर्द में छिपा हुआ ए आई एजेंडा पहचानों !

Prem Chand Dwitiya Jun 7, 2026 व्यंग रचनाएं 1

क्या पुरुष सचमुच महिलाओं की उन्नति चाहते हैं या उनके भीतर कोई छिपा हुआ 'एआई एजेंडा' काम करता है? सुंदरता, आरक्षण, सामाजिक व्यवहार और पुरुष मानसिकता पर एक धारदार व्यंग्य।

रिश्वत के नए मॉडल – रिश्वत अब एप-आधारित है

डॉ मुकेश 'असीमित' May 30, 2026 व्यंग रचनाएं 0

क्या होगा जब रिश्वत भी UPI, EMI और क्रेडिट स्कोर पर मिलने लगे? प्रस्तुत है एक तीखा हास्य-व्यंग्य, जिसमें भ्रष्टाचार 2.0, BribeSync, रिश्वत क्रेडिट स्कोर और डिजिटल घूस की कल्पना के माध्यम से व्यवस्था की विडंबनाओं पर करारा कटाक्ष किया गया है।