कबीर निर्गुण भजन और भक्ति भजन संग्रह | Soulful Hindi Bhajans
संत कबीर की निर्गुण वाणी से लेकर शिव, कृष्ण, हनुमान, गणेश, लक्ष्मी और दुर्गा स्तुति तक—सुनिए Dr Mukesh Aseemit Creations की दो भावपूर्ण YouTube भजन playlists।
संत कबीर की निर्गुण वाणी से लेकर शिव, कृष्ण, हनुमान, गणेश, लक्ष्मी और दुर्गा स्तुति तक—सुनिए Dr Mukesh Aseemit Creations की दो भावपूर्ण YouTube भजन playlists।
“मैं कौन हूँ?” एक मौलिक निर्गुण सूफ़ियाना भजन है, जो नाम, धर्म, देह और सामाजिक पहचानों से आगे मनुष्य के वास्तविक अस्तित्व की खोज करता है। जानिए गीत का भाव, दर्शन और इसके पीछे छिपा आत्मबोध का संदेश।
वादा एक ऐसी भविष्य की मुद्रा है, जिसे आज खर्च करके भुगतान कल पर छोड़ दिया जाता है। प्रेम, परिवार और राजनीति से लेकर चुनावी घोषणाओं तक फैले वायदों की दुनिया पर एक तीखा एवं रोचक व्यंग्य।
कलेक्ट्रेट के दो बाबू ऊपरी कमाई से एक तोला सोना खरीदने की शर्त लगाते हैं। मगर जब बेईमानी की प्रतियोगिता में भी बेईमानी होने लगती है, तो रिश्वतखोरी का पूरा खेल सार्वजनिक हो जाता है। डा. राम कुमार जोशी की यह व्यंग्य रचना सरकारी दफ्तरों, भ्रष्टाचार, अनुकंपा नियुक्ति और व्यवस्था की विडंबनाओं पर तीखा प्रहार करती है।
सनातन धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि सृष्टि, आत्मा, परमात्मा, वेद, उपनिषद, दर्शन, भक्ति, योग और मानव जीवन को समझने वाली विशाल ज्ञान-परंपरा है। इस लेख में पंचमहाभूत, चार वेद, षड्दर्शन, नवधा भक्ति, सप्तर्षि, 33 देवता, नवग्रह, मन्वंतर और अन्य प्रमुख वैदिक-वेदोत्तर अवधारणाओं को सरल भाषा में समझिए।
सरसों, सोयाबीन, पाम और सूरजमुखी तेल के दाम फिर बढ़ रहे हैं। आखिर खाने का तेल महंगा क्यों हुआ? जानिए वैश्विक युद्ध, आयात-निर्भरता, कमजोर रुपये, बायोफ्यूल और त्योहारी मांग का आपकी रसोई के बजट पर पड़ने वाला असर।
रैपिडो बुक करते ही आदमी बाद में मिलता है, लेकिन उसका नाम, बाइक नंबर, रेटिंग और लोकेशन पहले पहुँच जाती है। डिजिटल मैप, लाइव लोकेशन और बाइक टैक्सी के इस दौर पर पढ़िए एक चुटीला हास्य-व्यंग्य।
आज साहित्य में लेखक बढ़ रहे हैं, पाठक घट रहे हैं और पुरस्कारों की संख्या दोनों से तेज़ी से बढ़ रही है। उम्र, वजन, लेखन गति से लेकर डिजिटल रिचार्ज तक—यदि सम्मान बाँटने की यही रफ्तार रही तो हर लेखक के लिए कोई-न-कोई पुरस्कार तय मिलेगा। साहित्यिक पुरस्कार संस्कृति पर एक चुटीला और धारदार व्यंग्य।
राजस्थान की सड़कों पर आवारा सांड राहगीरों और वाहन चालकों के लिए जानलेवा खतरा बन चुके हैं। वर्ष 2019 के बाद आधिकारिक समेकित आँकड़े तक उपलब्ध नहीं—आखिर नंदी सड़क पर और व्यवस्था समाधि में कब तक रहेगी?
कवी भूषन – “कविता में रणभेरी “ कवि भूषण—वीररस के ओजस्वी शिल्पी, भाषा के बाजीगर और अलंकार-विधान के विलक्षण साधक—का नाम लेते ही आँखों के सामने युद्ध-डमरू की ध्वनि, नगाड़ों की गड़गड़ाहट, तोपों का गर्जन और अश्वारोही सेनाओं का प्रवाह जाग उठता है। यही तो वह काव्य-संसार है जहाँ “साजि चतुरंग वीर रंग में तुरंग […]