वो घर… जहाँ मोहब्बत बिखर गई

Wasim Alam Aug 10, 2025 कहानी 1

गाँव का आधा-अधूरा घर, जहाँ कभी ढोलक की थाप और हँसी गूँजती थी, अब दो चूल्हों की दूरी में बँट चुका है। नशे, गरीबी और कटुता ने आँगन की मिट्टी से खुशबू खींच ली है। यह कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं, सैकड़ों बिखरे घरों की गवाही है।

पानी है… मजा है! कहानी -बात अपने देश की

Wasim Alam Jun 29, 2025 कहानी 4

पटना से गाँव लौटते वक्त एक छोटे स्टेशन पर मिला वह नन्हा पानी बेचता लड़का — थकी हुई आँखें, टूटी चप्पलें और एक मासूम हँसी। उसकी बोतल में पानी था, पर आँखों में प्यास। वह हँसी आज भी याद है, जिसने सिखाया कि इंसानियत भी प्यास बुझाती है।

तीन रोटियों की माँ”(कमी, ममता और संघर्ष)

Wasim Alam Jun 25, 2025 कहानी 2

इस चित्र में झलकती है एक ऐसी औरत की कहानी, जो दिन भर अस्पताल की सफ़ाई करती है लेकिन असल में अपने जीवन की जद्दोजहद भी झाड़ती है। उसकी थकी आँखों में तीन बच्चों की ज़िम्मेदारी, माँ की ममता और पति की मजबूरी का बोझ साफ़ झलकता है। वह औरत कोई शिकायत नहीं करती, न ही अपने हालात पर रोती है — बस मुस्कराकर कहती है “सब ठीक है।” यह दृश्य सिर्फ़ एक कामवाली की नहीं, बल्कि उन लाखों स्त्रियों की प्रतिछाया है, जो अपनी पीड़ा को चुपचाप पी जाती हैं, लेकिन पूरे परिवार की रीढ़ बनी रहती हैं — बिना दिखावे के, बिना थमे।