नासदीय सूक्त की दार्शनिक व्याख्या

डॉ मुकेश 'असीमित' Oct 28, 2025 Darshan Shastra Philosophy 0

ऋग्वेद का नासदीय सूक्त ब्रह्मांड की उत्पत्ति पर विश्व के सबसे प्राचीन दार्शनिक चिंतन में से एक है। यह कहता है कि जब न अस्तित्व था न अनस्तित्व, तभी कुछ अप्रकट ऊर्जा ने सृष्टि का आरंभ किया। “काम” या इच्छा पहली हलचल थी जिसने ब्रह्मांड को गति दी। यह सूक्त हमें सिखाता है कि प्रश्न ही ज्ञान का प्रथम चरण हैं—और रहस्य ही सृष्टि की सबसे बड़ी सुंदरता।

भारतीय दर्शनशास्त्र: जब प्रश्न व्यवस्था माँगते हैं — आत्मबोध से विश्वबोध तक

डॉ मुकेश 'असीमित' Oct 15, 2025 Darshan Shastra Philosophy 0

भारतीय दर्शन उस अनूठी यात्रा का नाम है जो व्यक्ति के “मैं” से शुरू होकर “हम” तक पहुँचती है। न्याय बुद्धि को कसौटी देता है, वैशेषिक जगत की रचना को व्यवस्थित करता है, सांख्य भीतर के साक्षी को पहचानता है, योग उस साक्षी में ठहरना सिखाता है, मीमांसा कर्म की पवित्रता को जोड़ती है, और वेदांत बताता है कि यह सब एक ही ब्रह्म की विभिन्न अभिव्यक्तियाँ हैं। यह ज्ञान का नहीं, अनुभव का मार्ग है — जहाँ आत्मबोध विश्वबोध में बदल जाता है।

आत्मबोध से विश्वबोध तक — चेतना की वह यात्रा जो मनुष्य को ‘मैं’ से ‘हम’ बनाती है

डॉ मुकेश 'असीमित' Oct 15, 2025 Darshan Shastra Philosophy 0

"जब मनुष्य अपने भीतर के ‘मैं’ से जागता है, तभी उसके बाहर का ‘हम’ जन्म लेता है। आत्मबोध से विश्वबोध की यह यात्रा केवल ध्यान या साधना नहीं, बल्कि समरसता, करुणा और दायित्व का जागरण है — जहाँ व्यक्ति स्वयं से उठकर सम्पूर्ण सृष्टि का अंग बन जाता है।"

भीतर का समुद्र-मंथन: विष से अमृत तक की आत्मिक यात्रा

डॉ मुकेश 'असीमित' Sep 30, 2025 Culture 0

समुद्र-मंथन की कथा हमें बताती है कि जीवन की साधना सबसे पहले विष का सामना है—आलोचना, उपहास और असुविधा का। लेकिन यही विष जब धारण कर लिया जाए तो भीतर से रत्न प्रकट होते हैं—प्रतिभा, विवेक, गरिमा, समृद्धि और अंततः अमृत। यह कथा हमें याद दिलाती है कि हर संघर्ष एक नया जागरण है और भीतर की देवी ही हमारी असली शक्ति है।

उठो, जागो: विवेकानंद का व्यावहारिक वेदांत—युवाओं के लिए जीवन-मंत्र

डॉ मुकेश 'असीमित' Sep 29, 2025 Darshan Shastra Philosophy 1

विवेकानंद का संदेश युवाओं को भीतर की अनंत शक्ति पहचानने, निडर होकर लक्ष्य चुनने और सेवा को पूजा मानने का आह्वान है। व्यावहारिक वेदांत बताता है—अपने कर्म को समर्पण बनाओ, हर व्यक्ति में दिव्यता देखो, और अनुशासन से मन को साधो। चार योग—कर्म, भक्ति, ज्ञान, राज—अलग रास्ते होते हुए भी एक मंज़िल तक ले जाते हैं। उठो, जागो, और तब तक मत रुको जब तक चरित्र, करुणा और कर्म एक जीवन बन न जाएँ।

यजुर्वेद: कर्म, यज्ञ और जीवन संतुलन का शाश्वत वेद

डॉ मुकेश 'असीमित' Sep 27, 2025 Darshan Shastra Philosophy 0

यजुर्वेद कर्म और यज्ञ का वेद है। यह हमें बताता है कि जीवन का हर कार्य एक यज्ञ है—घर चलाना, समाज सेवा करना या प्रकृति का सम्मान करना। इसमें अनुष्ठानों के नियम ही नहीं, बल्कि जीवन जीने का संतुलित दृष्टिकोण भी है। यजुर्वेद यह सिखाता है कि जब कर्म श्रद्धा और नियम के साथ किए जाएं, तो वे साधारण कर्म न रहकर ब्रह्मांडीय संतुलन का हिस्सा बन जाते हैं।

अथर्ववेद : जीवन, स्वास्थ्य, प्रेम, संरक्षण और ब्रह्मांडीय ज्ञान

डॉ मुकेश 'असीमित' Sep 27, 2025 Darshan Shastra Philosophy 0

अथर्ववेद जीवन का सबसे व्यावहारिक वेद है—जहाँ स्वास्थ्य के लिए औषधियों और मंत्रों का संगम मिलता है, रिश्तों को संवारने के सूत्र हैं, भय और नकारात्मकता से रक्षा के कवच हैं, और राष्ट्र निर्माण से लेकर ब्रह्मज्ञान तक की शिक्षाएँ हैं। यह बताता है कि असली आध्यात्मिकता भागने में नहीं, बल्कि जीवन के बीच संतुलन साधने में है। अथर्ववेद हर इंसान का साथी है—जन्म से मृत्यु तक।

“ऋग्वेद: ज्ञान के आदिम सागर की यात्रा”

डॉ मुकेश 'असीमित' Sep 27, 2025 Darshan Shastra Philosophy 0

भाग 1 कल्पना कीजिए वह समय, जब हाथ में कलम नहीं, कंधों पर कथा थी; जब ज्ञान कागज़ पर नहीं, स्मृति की नसों में दौड़ता था। वही समय, वही स्वर, वही अनुगूँज है जिसे हम आज ऋग्वेद कहते हैं—ऐसी धरोहर जो लिखे जाने से पहले सुनी गई, गुनगुनाई गई, श्वासों में बसाई गई। श्रुति इसलिए […]

सामवेद—नाद ब्रह्म, ध्वनि से समाधि तक

डॉ मुकेश 'असीमित' Sep 26, 2025 Culture 0

सामवेद हमें सिखाता है कि शब्द तभी पूर्ण होते हैं जब वे सुर और लय में ढलकर कंपन बनें—वही कंपन मन को विन्यस्त करता है, ऊर्जा को संतुलित करता है और चेतना को निर्मल करता है। नाद-ब्रह्म का अर्थ है: ध्वनि ही दिव्य है; सुर से भीतर का शोर शांत होता है और मौन में अनहद नाद प्रकट होता है। जीवन को राग बनाइए—काम यज्ञ बने, संबंध उत्सव, और प्रकृति गुरु।