धरम पाजी-फ़िर नहीं आएँगे ऐसे “ही-मैन

डॉ मुकेश 'असीमित' Nov 25, 2025 Cinema Review 0

धर्मेंद्र सिर्फ़ परदे के हीरो नहीं थे—वे देहाती मासूमियत, पंजाबी दिलेरी और रोमांटिक चमक का चलता-फिरता रूपक थे। वीरू की टंकी, खेतों की पगडंडियाँ, शोले की गूंज और फ़िल्मी किस्से—सब आज उनकी स्मृति बनकर रह गए हैं। पर कलाकार कभी नहीं मरते, धर्मेंद्र भी नहीं। वे हर मुस्कान में लौट आएँगे।

होमबाउंड: ऑस्कर की जुगाली, लॉकडाउन की धूल और सच्चाई का सिनेमा–संग्राम

डॉ मुकेश 'असीमित' Nov 23, 2025 Cinema Review 0

“होमबाउंड एक ऐसी फ़िल्म है जो दो दोस्तों की लॉकडाउन यात्रा के बहाने भारतीय समाज की गहरी परतों—जाति, धर्म, बेरोज़गारी और व्यवस्था—को छूती है। बेहतरीन अभिनय के बावजूद फिल्म कई जगह ऑस्कर-फ्रेंडली एजेंडा और सजावटी दुखों में उलझती दिखती है। पढ़िए एक ईमानदार, रोचक और व्यंग्यात्मक समीक्षा।”

इंस्पेक्टर जेंडे –रिव्यु“Inspector Zende Review: मनोज बाजपेयी की क्राइम-कॉमेडी

डॉ मुकेश 'असीमित' Sep 11, 2025 Cinema Review 1

Netflix की फिल्म Inspector Zende में मनोज बाजपेयी एक ईमानदार लेकिन दिलचस्प पुलिस इंस्पेक्टर के रूप में नज़र आते हैं। यह 1980 के दशक की पृष्ठभूमि पर आधारित क्राइम-कॉमेडी है, जो न खून-खराबे से भारी है और न गालियों से बोझिल। हल्की-फुल्की हास्यपूर्ण ट्रीटमेंट, दमदार अभिनय और जिम सरब के खलनायक रूप ने इसे परिवार संग देखने योग्य बना दिया है। यह फिल्म ताज़गी का एहसास कराती है।

ब्लडी रेटिंग्स ‘Zwigato’ में गिग वर्ल्ड की सच्चाई

डॉ मुकेश 'असीमित' Sep 8, 2025 Cinema Review 0

‘Zwigato’ एक गिग-इकॉनॉमी राइडर की रोज़मर्रा की जद्दोजहद का सधी हुई, मानवीय चित्रपट है—जहाँ ऐप का एल्गोरिदम नई फैक्ट्री है, रेटिंग नया ठप्पा, और बारिश में भी चलती है रोज़ी-रोटी की बाइक। कपिल-शाहाना की बिना शोर वाली अदाकारी बेरोज़गारी, शोषण और शहरी पलायन की सच्चाइयों को नरमी से काटती है।

कालीधर लापता — एक आधी-अधूरी भावुकता की खोज-फ़िल्म समीक्षा

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 14, 2025 Cinema Review 2

कालीधर लापता में कुंभ मेला बनारस के घाटों तक सिमट गया, अल्ज़ाइमर से पीड़ित किरदार अंग्रेज़ी बोलने लगा, और एक मासूम बच्चा शराब का इंतज़ाम करता दिखा! इन विसंगतियों ने कहानी की संवेदनशीलता को झकझोर दिया। फिल्म भावनात्मक हो सकती थी, पर बेमेल दृश्यों और स्क्रिप्ट की भूलों ने इसके असर को कमज़ोर कर दिया।

पंचायत सीज़न 4: फुलेरा की मिट्टी में राजनीति की महक!

डॉ मुकेश 'असीमित' Jun 28, 2025 Cinema Review 1

पंचायत सीज़न 4 फुलेरा की उसी मिट्टी से शुरू होता है, जिसमें पहले हँसी और सादगी उगती थी — लेकिन इस बार राजनीति की परतें ज़्यादा गाढ़ी हैं। सचिव जी की सीएटी में सफलता, रिंकी का प्रेम प्रस्ताव, और प्रधान जी की हार – सब मिलकर इसे इमोशन, ड्रामा और स्थानीय राजनीति का दिलचस्प मिश्रण बनाते हैं। कहानी में थोड़ी खिंचावट ज़रूर है, लेकिन अंतिम दो एपिसोड्स में जो भावनात्मक टर्न है, वो पूरी सीरीज़ को देखने लायक बना देता है। “गाँव वही है, कहानी गहरी हो गई है।”