डॉ मुकेश 'असीमित'
Jul 22, 2025
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लायंस क्लब सार्थक की 'सीता माता धाम' वन-विहार यात्रा केवल एक पिकनिक नहीं, बल्कि एक जीवन्त अनुभव था—हास्य, रोमांच, संग-साथ और जलविहार से भरपूर। झरने में स्नान, अंत्याक्षरी की नोकझोंक, चलती बस में नृत्य, तीखे स्वाद की कचौरी, और अंत में दाल-बाटी-चूरमा की सुवास! कहीं कोई लंगूरों से गठजोड़ करता दुकानदार, तो कहीं टाइटैनिक स्टाइल में लेटे झरना-प्रेमी। स्मृतियों की सरिता में यह एक अविस्मरणीय दिवस था—‘एक दिन, एक जीवन’।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jul 11, 2025
Travel
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यात्रा संस्मरण में लेखक ने अमरनाथ यात्रा के अनुभव को व्यंग्य, यथार्थ और करुणा के त्रिकोण में पिरोया है। हेलिकॉप्टर टिकट से लेकर खच्चर की पीठ तक, और फिर पालकी से 500 सीढ़ियों तक की इस यात्रा में न केवल शरीर की थकान है, बल्कि मन के द्वंद्व भी हैं। दर्शन की लालसा, टपकती टेंट, टूटती कोहनी, और बाबा बर्फानी की एक झलक—सब कुछ मानो एक दर्शनशास्त्र बन जाता है। अंत में लेखक का वाक्य “बाबा जिसे बुलाते हैं, वही जाता है” इस पूरे अनुभव को आध्यात्मिक रूप में समेट देता है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jul 11, 2025
Travel
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इस व्यंग्यात्मक यात्रा संस्मरण में लेखक ने अमरनाथ यात्रा के अनुभव को व्यंग्य, यथार्थ और करुणा के त्रिकोण में पिरोया है। हेलिकॉप्टर टिकट से लेकर खच्चर की पीठ तक, और फिर पालकी से 500 सीढ़ियों तक की इस यात्रा में न केवल शरीर की थकान है, बल्कि मन के द्वंद्व भी हैं। दर्शन की लालसा, टपकती टेंट, टूटती कोहनी, और बाबा बर्फानी की एक झलक—सब कुछ मानो एक दर्शनशास्त्र बन जाता है। अंत में लेखक का वाक्य “बाबा जिसे बुलाते हैं, वही जाता है” इस पूरे अनुभव को आध्यात्मिक रूप में समेट देता है।