मैं तेरे नाम से अपना नाम कमाना चाहती हूं ।
मैं तेरे लिए अपना हर वक्त गवाना चाहती हूं।।
जहां तुमने अभी आंखें खोली है,
वहां मैंने खेली आंख मिचौली है ,
मैं तुझे तेरा एक सपना दिखाना चाहती हूं ।
मैं तेरे नाम से अपना नाम कमाना चाहती हूं।
तेरे जीते जीत है मेरी ,तेरे हारे हार,
तू ही तो है ,मेरा पूरा संसार,
मैं तुझे तेरा वह संसार दिखाना चाहती हूं।
मैं तेरे नाम से अपना नाम कमाना चाहती हूं ।
तेरी दुनिया दोस्तों की टोली है ,
यह दुनिया कई रंगों की रंगोली है,
मैं दुनिया के अनदेखा रंग दिखाना चाहती हूं ।
मैं तेरे नाम से अपना नाम कमाना चाहती हूं।
मेरे दिल ,दिमाग में घमासान युद्ध चल रहा,
तुझे कैसे सही डगर दिखाऊं , मन मचल रहा,
मैं तुझे हर जीत का योद्धा बनना चाहती हूं ।
मैं तेरे नाम से अपना नाम कमाना चाहती हूं ।
मैं तेरे कठिन राह के आड़े आ जाऊंगी ,
मैं तेरे हर मुकाम में तेरा साथ निभाऊंगी,
मैं तुझे तेरे सपने का अडिग बनाना चाहती हूं ।
मैं तेरे नाम से अपना नाम कमाना चाहती हूं ।

विद्या पोखरियाल स्वरचित रचना ✍️
बैकुंठपुर छत्तीसगढ़
Comments ( 2)
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विद्या पोखरियाल
8 months agoआभार आपका आदरणीय 🙏
डॉ मुकेश 'असीमित'
8 months agoबहुत शानदार कविता