मोबाइल फोन की आंच में-हास्यम्- व्यंग्यम्


वह जब भी मिलता है अकेला मिलता है
उसके मिलते ही फरमाइशों का मेला मिलता है!
उपभोक्ता हक्का-बक्का है विज्ञापनबाजी से
पके आम की जगह कच्चा केला मिलता है!
आकर्षण निराला राजनीति के बाजारों का
पुराने वादों के नये रूप का ठेला मिलता है!
दुनियादारी में मजबूरी का मजा अनोखा
उधार मांगने जरूरतों का रेला मिलता है!
मधुमेह अर्थात डायबिटीज शुगर की बलिहारी
उदास लड्डू बर्फी से हंसते हुए करेला मिलता है!
आतंकी अपने ही घर में आतंकित हो जाता
आक्रोशित बच्चे के हाथों में ढेला मिलता है!
राजनीतिक संबंध और संबंधों में राजनीति
मिलन प्रस्ताव अक्सर जुदाई की वेला मिलता है!
अहंकारी महत्वाकांक्षाओं की मार भयंकर भारी
घर-घर राजनीतिबाजी का झमेला मिलता है!
कच्ची आयु देख जिसे माना जाता मासूम
मोबाइल फोन की आंच में पकेला मिलता है!
कुदरत की गड़बड़ नहीं,मतलब का है बोलबाला
गीदड़ के आगे बेचारा शेर दबेला मिलता है!
निकम्मों निठल्लों को यह कामचोरी की सजा
आराम की लत से आलसी थकेला मिलता है!
लगती अटकलें,परदे के पीछे है ताकत किसकी
बिल्ली के सामने चूहा जब अडेला मिलता है!
मुहब्बत में खजाना लुटाने वाले सुकून पा जाते
बेवफा की अंटी से छिपा हुआ धेला मिलता है!
पत्थरबाजी करते पत्थर बेचारे खुद पथरा जाते
कड़ी कार्रवाई से गुब्बारा पिचकेला मिलता है!
चालाकी होशियारी कुटिलता सारी धरी रह जाती
कुंठित खिलाड़ी को जब खाया-खेला मिलता है!
शिक्षण में दूध का महत्व तब समझ में आता
जांच में पाठशाला की जगह तबेला मिलता है!
खुद पर गर्व करना तब हो जाता लाजमी
गुरु बनकर राजनीति में जब चेला मिलता है!
आजादी तब आबादी से कसमसाती घबराती
रेल में जब बेटिकट यात्रियों का रेला मिलता है!
सोशल मीडिया से आवारा दिल खट्टा हो जाता
अलबेली के चक्कर में जब अलबेला मिलता है!

                      -प्रहलाद श्रीमाली
Prahalad Shrimali

Prahalad Shrimali

परिचय प्रहलाद श्रीमाली जन्मः 01.02.1956, चेन्नई शिक्षाः हाई स्कूल प्रकाशन…

परिचय प्रहलाद श्रीमाली जन्मः 01.02.1956, चेन्नई शिक्षाः हाई स्कूल प्रकाशन विषयक: साहित्यिक पत्रिकाओं, समाचार पत्रों में कहानियां, लघुकथाएं, व्यंग्य एवं कविताएं प्रकाशित। राजस्थानी व्यंग्य संग्रह ‘‘आवळ कावळ’’ 1992 में प्रकाशित एवं ‘‘मारवाडी सम्मेलन, मुम्बई’’ द्वारा पुरस्कृत। . कहानी ‘उत्तरहीन’ पर जनदर्शन संस्थान, भिलाई द्वारा शिक्षणार्थ लघु वीडियो फिल्म निर्मित। कहानी ‘‘कमलजी कहानी में कला नहीं घुसाते’’ 2002 को किताबघर प्रकाशन नई दिल्ली द्वारा ‘‘आर्य स्मृति साहित्य सम्मान’’ प्राप्त। उपन्यास ‘‘पापा मुस्कुराइए ना!’’ को 2010 का ‘‘आर्य स्मृति साहित्य सम्मान’’। कहानी संग्रह ‘‘अज्ञातवास में सिद्ध’’ ‘जनसुलभ’ पेपरबैक्स द्वारा अखिल भारतीय स्तर पर आमंत्रित पाण्डुलिपियों में से चयनित व प्रकाशित (2011) नवभारत टाइम्स में मनोहर श्याम जोशी के व्यंग्य टिप्पणी स्तंभ ‘मेरा भारत महान’ में कई बार पुरस्कृत। व्यंग्य संग्रह ‘‘मोती जैसी घुन‘‘ ‘सदीनामा प्रकाशन‘ कोलकाता द्वारा प्रकाशित (2012) कहानी संग्रह ‘‘मुन्ना रो रहा है! ‘‘ ‘अमरसत्य प्रकाशन‘ (किताबघर प्रकाशन का उपक्रम) (2014) राजस्थानी कहानी ' महाभारत रा अजुआळा में ' को वर्ष 2015 का ' डॉ. नृसिंह राजपुरोहित स्मृति पुरस्कार '। लघुकथा ' जिंदगी की रफ्तार ' वर्ष 2019 में ' कथादेश अखिल भारतीय हिन्दी लघुकथा प्रतियोगिता -11' में पुरस्कृत।

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