साठ साल का आदमी-कविता रचना

बुजुर्ग दिखता साठ साल का आदमी
दिल से है युवक
यह जीवंत राज बताता तो है,पर इशारों से
विवेक भरा उत्साह,होश के साथ जोश
सहयोग में सद्भाव,ये संकेत समझने वाले
कायल हैं, उसकी जवानी के!

सौ साल का अनुभव है
साठ साल के आदमी के पास
ये प्रसाद है,बुजुर्गों की संगत का
जिससे बचता बिदकता है
नई पीढ़ी का स्मार्ट अहंकार!

सनकी लगता है
साठ साल का आदमी,जुगाली करता हुआ
तीन-चार दशक पुरानी बातों का रस
बढ़ाता है,उसकी खुशी की उम्र
ध्यान देकर सुनने वालों के आगे
बौना हो जाता है, वर्तमान!

संपर्क में आने वाले की जरूरत के लिए
झरना झील नदी सागर जो चाहे,हो जाता है
जादूगर नहीं,अनुभूति सिद्ध है
साठ साल का आदमी!

जीवन-मंच सजाकर,चाहे अनचाहे
उसने कई नाटक खेले हैं
बहते टपकते रहते हैं,कविता के तमाम रस
उसकी भाव भंगिमा से
कहानी है,उसके आचरण में
व्यवहार में उपन्यास है
यकीनन,साठ साल का आदमी
साहित्य के लिहाज से बहुत खास है!

बहुत अच्छा है,साठ साल का आदमी
देश-दुनिया कुटुंब-समाज की सेहत के लिए
अब,जब बच्चे भी बच्चे नहीं रहे
उसके भीतर आज भी एक प्यारा बच्चा है
समय की सच्चाई के साथ
दरअसल साठ साल का आदमी है
साठ साल का चलता फिरता पेड़ !

प्रहलाद श्रीमाली

Prahalad Shrimali

Prahalad Shrimali

परिचय प्रहलाद श्रीमाली जन्मः 01.02.1956, चेन्नई शिक्षाः हाई स्कूल प्रकाशन…

परिचय प्रहलाद श्रीमाली जन्मः 01.02.1956, चेन्नई शिक्षाः हाई स्कूल प्रकाशन विषयक: साहित्यिक पत्रिकाओं, समाचार पत्रों में कहानियां, लघुकथाएं, व्यंग्य एवं कविताएं प्रकाशित। राजस्थानी व्यंग्य संग्रह ‘‘आवळ कावळ’’ 1992 में प्रकाशित एवं ‘‘मारवाडी सम्मेलन, मुम्बई’’ द्वारा पुरस्कृत। . कहानी ‘उत्तरहीन’ पर जनदर्शन संस्थान, भिलाई द्वारा शिक्षणार्थ लघु वीडियो फिल्म निर्मित। कहानी ‘‘कमलजी कहानी में कला नहीं घुसाते’’ 2002 को किताबघर प्रकाशन नई दिल्ली द्वारा ‘‘आर्य स्मृति साहित्य सम्मान’’ प्राप्त। उपन्यास ‘‘पापा मुस्कुराइए ना!’’ को 2010 का ‘‘आर्य स्मृति साहित्य सम्मान’’। कहानी संग्रह ‘‘अज्ञातवास में सिद्ध’’ ‘जनसुलभ’ पेपरबैक्स द्वारा अखिल भारतीय स्तर पर आमंत्रित पाण्डुलिपियों में से चयनित व प्रकाशित (2011) नवभारत टाइम्स में मनोहर श्याम जोशी के व्यंग्य टिप्पणी स्तंभ ‘मेरा भारत महान’ में कई बार पुरस्कृत। व्यंग्य संग्रह ‘‘मोती जैसी घुन‘‘ ‘सदीनामा प्रकाशन‘ कोलकाता द्वारा प्रकाशित (2012) कहानी संग्रह ‘‘मुन्ना रो रहा है! ‘‘ ‘अमरसत्य प्रकाशन‘ (किताबघर प्रकाशन का उपक्रम) (2014) राजस्थानी कहानी ' महाभारत रा अजुआळा में ' को वर्ष 2015 का ' डॉ. नृसिंह राजपुरोहित स्मृति पुरस्कार '। लघुकथा ' जिंदगी की रफ्तार ' वर्ष 2019 में ' कथादेश अखिल भारतीय हिन्दी लघुकथा प्रतियोगिता -11' में पुरस्कृत।

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