“सिसकियों से स्वर तक”-कविता रचना

“सिसकियों से स्वर तक”
रुदन कर रही स्मृतियाँ,
वेदना अनंत है।
दायित्वों ने घेरा मुझको,
दमन अभिलाषा का हो गया।
धुंध में अस्तित्व को खोज रही,
विस्मृत पथ हो गया।
मै जीवंत हूँ या मृत,
साँसे साक्ष्य दें रही।
आँसुओ का पलकों पर बसेरा बन गया,
हर गीत नम आँखों में गूंगा हो गया।
घड़ी की सुई मानो रुक गयी
तम की चादर में बादल घनेरा छा गया।
पर दृश्य विचित्र सम्मुख आ रहा,
आशाओं की नाव खड़ी अब भी द्वार है।
आवेग, संवेग की उथल पुथल,
अंतः में लक्ष्य की पुकार है।
मै सुन रही हूँ
एक ही प्रश्न बार बार,
क्यों जड़ हो गयी है तू?
वो चेतना कहाँ गईं,
मौन मै निः शब्द मै
दर्पण को देखती।
अश्रु से संबंध तोड़कर,
शौर्य से नाता जोड़कर।
हाँ चली हूँ मै,
अब स्त्री का नया पर्याय बन
सफलता के सोपान पर…
न रुकूंगी प्रण लिया बार बार है,
साकार करुँगी वो स्वप्न जो देखा बार बार है।
कायरता के वस्त्र आज त्यागकर,
ओढ़ लिया दुशाला आत्मविश्वास का।
सिसकियों से स्वर तक,
विजय का पहनना अब हार है..

रचनाकार -नेहा जैन जन्मस्थान-ललितपुर उत्तरप्रदेश

शिक्षा -बी. एस. सी बायो, एम एस सी.फ़ूड टेक्नोलॉजी, एम. ए.अंग्रेजी, बी. टी. सी., बी. एड., प्राविधिक कला डिप्लोमा

संप्रति -शिक्षिका और मंच संचालिका

नवाचारी शिक्षिका के रूप मे जिले मे सम्मानित।

Neha Jain

Content Writer at Baat Apne Desh Ki

Neha Jain is a passionate writer who shares insights and knowledge about various topics on Baat Apne Desh Ki.

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