ये बारिश की बूंदे-हिंदी कविता

Vidya Dubey Jul 15, 2025 हिंदी कविता 2

बारिश की हर बूंद, प्रतीक्षा की तपिश से दहकती है। पेड़-पत्ते जवां हैं, बगिया महकी है, लेकिन प्रेमी नहीं आया। बूंदें अब फूल नहीं, अंगारे बन गई हैं। विद्या पोखरियाल की स्वरचित कविता प्रेम, विरह और मानसून की इस जटिल रागिनी को भावभीने ढंग से उजागर करती है।