Prahalad Shrimali
Sep 29, 2025
व्यंग रचनाएं
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दशहरे की शाम थाने में बैठे नशे में धुत्त दारोगा ने चौकीदार से पूछा — "गांव में क्या चल रहा है?" चौकीदार बोला — "हुजूर, रावण जल रहा है!" दारोगा उखड़ पड़ा — "आत्महत्या रोकनी चाहिए! जात बताओ रावण की!" चौकीदार ने तंज कसा — "हुजूर, रावण तो हर जात में है, नेता से लेकर पुलिस तक!" आईने में झाँकते ही दारोगा को खुद ही रावण नजर आया।
डॉ मुकेश 'असीमित'
May 30, 2024
व्यंग रचनाएं
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यह लेख गर्मी की तीव्रता और उसके व्यंग्यात्मक पहलुओं पर केंद्रित है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे व्हाट्सएप पर गलतफहमियाँ फैलाने वाले संदेश गर्मी की वास्तविकता से अलग होते हैं। एक राजनेता भाषण के दौरान खुद पर ठंडा पानी डालते हुए दिखाई देता है, जबकि जनता पसीने में तरबतर है। बिजली कटौती, गर्मी से जूझते लोग, और ट्रांसफार्मर को ठंडा करने के प्रयासों का वर्णन है। लेख में चुनावी गर्मी और वैश्विक तापमान वृद्धि के प्रभावों पर भी व्यंग्य किया गया है, जिसमें गर्मी के कारण होने वाली परेशानियों का जिक्र है।