छतरियों के साये में-कविता रचना

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 13, 2025 हिंदी कविता 0

बरसात की एक शाम, एक बूढ़ा अपनी बीमार पत्नी को लिए डॉक्टर के क्लिनिक के बाहर खड़ा है। डॉक्टर छतरी देता है, पर बूढ़े की आँखों की बारिश नहीं रुकती। यह कविता सामाजिक विषमता, करुणा और आत्मचिंतन की सघन अनुभूति कराती है।