लोकसमाज ने मकर संक्रांति को एक दिन का उत्सव नहीं,बल्कि सामूहिक भावबोध का पर्व बनाया

Priyanka Ghumara Jan 12, 2026 Culture 0

“यह पर्व केवल मौसम नहीं बदलता, जीवन की दृष्टि बदलता है।” “लोहड़ी संघर्ष के बाद आने वाली राहत और संभावना का लोकउत्सव है।” “लोकपर्वों की सादगी ही उनकी सबसे बड़ी सुंदरता है।” “परंपरा तब जीवित रहती है, जब वह समय से संवाद करती है।”