चाँद हो या..कविता रचना

Sanjaya Jain Jul 27, 2025 हिंदी कविता 3

इस कविता में एक रात का भावचित्र है — जहाँ चाँद नहीं निकला, फिर भी कोई और "चाँद सा" मौजूद है जो सबका ध्यान खींच रहा है। उसकी अदाएँ, शर्मीलापन, सौंदर्य और भावनाओं की सजीवता से पूरी महफिल रोशन है। वह निराशा के अंधेरे में भी एक दीपक सा जगमगा रहा है — शान-ए-महफिल बनकर।

हिन्दी की बेटी-कविता

Babita Kumawat Jun 25, 2025 Poems 2

हिंदी केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मा की पहचान है। यह भाषा नहीं, सृजन की प्रेरणा है — जो प्रतिभा को आकार देती है और अज्ञान को मिटाती है। हिंदी का इतिहास, उसका सौंदर्य, और उसका वैश्विक व्यक्तित्व, हमें गर्व से भर देता है।