डॉ मुकेश 'असीमित'
Feb 28, 2026
Lifestyle
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अकेलापन बीमारी नहीं, संकेत है—कि हम स्वयं से दूर हो गए हैं।”
“भीड़ में रहकर भी आदमी अकेला हो सकता है, और मौन में रहकर भी पूर्ण।”
“हम रिश्ते बनाते हैं—पर क्या हम स्वयं से भी रिश्ता बनाते हैं?”
“असली महामारी दूरी की है—दुनिया से नहीं, अपने ही अस्तित्व से।”
डॉ मुकेश 'असीमित'
Nov 11, 2025
Darshan Shastra Philosophy
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“मनुष्य की सबसे लंबी यात्रा कोई भौगोलिक नहीं होती — वह भीतर जाती है।
आत्मबोध से विश्वबोध तक की यह यात्रा ‘मैं’ से ‘हम’ बनने की प्रक्रिया है — जहाँ व्यक्ति स्वयं को जानकर समस्त सृष्टि से एकात्म हो जाता है।
जब ‘स्व’ का दीप जलता है, तब ‘सर्व’ का सूरज उगता है — यही चेतना की परिपूर्णता है।”
Mahadev Prashad Premi
May 1, 2024
हिंदी कविता
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जब रिश्तों में स्वार्थ और लोभ का ज़हर घुल जाता है, तब वर्षों से सहेजे संबंध भी टूटने लगते हैं। मनुष्यता की नींव पर जब निजी लाभ हावी हो जाता है, तो नाते सिर्फ समझौते बनकर रह जाते हैं। यह पंक्ति आज के स्वार्थी सामाजिक परिवेश की सच्चाई बयां करती है।