तेरा लाल मां तुझे पुकारे

Vidya Dubey Oct 4, 2025 हिंदी कविता 2

कविता “तेरा लाल मां तुझे पुकारे” मां और पुत्र के भावनात्मक रिश्ते का सुंदर चित्र है। इसमें भक्त पुत्र अपने लाल वस्त्रों, फूलों, चुनरिया और माला के साथ मां से विनती करता है कि वह अपने नौ रूपों में आकर उसका जीवन प्रकाशमय करे। भक्ति, प्रेम और समर्पण से भरी यह कविता मां और भक्त के आत्मिक संवाद की मधुर प्रस्तुति है।

काश दीवारें बोल उठतीं

डॉ मुकेश 'असीमित' Sep 15, 2025 हिंदी कविता 2

एक धनाढ्य व्यक्ति, जिसने माँ के लिए महल जैसा घर बनाया था, आज बेसुध विलाप कर रहा है। माँ की हल्की करवट पर जाग जाने वाली वही माँ, महल की ऊँची दीवारों में पुकारते-पुकारते खो गई। उसकी पीड़ा यही थी—“काश ये दीवारें बोल उठतीं।” यह कहानी महज़ शोक नहीं, आधुनिक सुविधाओं में खोई मानवीय संवेदनाओं और मौन की त्रासदी का सजीव प्रतीक है।

मैं तेरे नाम से-कविता -हिंदी

Vidya Dubey Jul 3, 2025 Poems 2

विद्या पोखरियाल की यह कविता एक माँ की गहन भावनाओं की अभिव्यक्ति है, जो अपने बच्चे के नाम से अपना अस्तित्व गढ़ना चाहती है। वह उसका पथप्रदर्शक बनना चाहती है, उसका संसार संवारना चाहती है और हर कठिनाई में साथ निभाने को तत्पर है — पूर्ण समर्पण की अद्वितीय अभिव्यक्ति।

तीन रोटियों की माँ”(कमी, ममता और संघर्ष)

Wasim Alam Jun 25, 2025 कहानी 2

इस चित्र में झलकती है एक ऐसी औरत की कहानी, जो दिन भर अस्पताल की सफ़ाई करती है लेकिन असल में अपने जीवन की जद्दोजहद भी झाड़ती है। उसकी थकी आँखों में तीन बच्चों की ज़िम्मेदारी, माँ की ममता और पति की मजबूरी का बोझ साफ़ झलकता है। वह औरत कोई शिकायत नहीं करती, न ही अपने हालात पर रोती है — बस मुस्कराकर कहती है “सब ठीक है।” यह दृश्य सिर्फ़ एक कामवाली की नहीं, बल्कि उन लाखों स्त्रियों की प्रतिछाया है, जो अपनी पीड़ा को चुपचाप पी जाती हैं, लेकिन पूरे परिवार की रीढ़ बनी रहती हैं — बिना दिखावे के, बिना थमे।

मातृत्व का आधार – संसार का संचालन -The basis of motherhood – the running of the world

Dr Shree Gopal Kabra Jun 11, 2021 Blogs 0

स्त्रीत्व, नारीत्व और मातृत्व का संचालन केन्द्र - डिम्बग्रन्थि है? -कि स्त्रीत्व का व्यक्त रूप होता है, रोएं विहीन कोमल त्वचा, आकर्षक शरीर सौष्ठव, स्तन और नितम्ब, प्रजनन-सृजन की इच्छा, आतुरता, और ममत्व एवम् वात्सल्य के कोमल भावों की प्रकृति व प्रवृत्ति। स्त्रीत्व की इस नैसर्गिक और भावनात्मक अभिव्यक्ति की प्रेरणा, संचालन और संवर्द्धन का केन्द्र होती है डिम्बग्रन्थि।