व्यंग्य चिंतन में मुंगेरीलाल

व्यंग्य चिंतन में मुंगेरीलाल रंगीन दिखती संगीन दुनिया में आम आदमी द्वारा हसीन सपने देखना वाकई है कमाल। फिर भी पाखंडी जमाने की नजरों में इसके लिए हास्यास्पद है मुंगेरीलाल!माना कि हर वक्त मुंगेरीलाल मोड में रहना सही नहीं है।किंतु भीतर झांक कर देखें,थोड़ा बहुत मुंगेरीलाल कौन नहीं है!वैसे भी वर्तमान में महा महत्वाकांक्षाओं का ऐसा पगलाया हुआ दौर है।कि कभी-कभी मुंगेरीलाल होने का मजा ही कुछ और है!बेशक यह सच है कि शायद ही मुंगेरीलाल कोई सुनहरा इतिहास रचा पाएगा।किंतु मुंगेरीलाल होने के क्या फायदे हैं! क्या कायदे हैं!यह कोई पक्का मुंगेरीलाल ही बता पाएगा! मुंगेरीलाल वक्त का तकाजा है।समय की जरूरत है। मुंगेरीलाल से कुछ-कुछ मिलती-जुलती सभी की सूरत है!गौर करें तो मुंगेरीलाल एक बहाना है।जिसके सहारे लोगों को अपनी मानसिक आवश्यकता अनुसार भाव-लोक में जाना है! चतुर चालाक तिकड़मी दुनिया में सीधे-साधे आदमी के लिए मुंगेरीलाल होना सुखद काल्पनिक वसीयत है। मुंगेरीलाल कठोर जमाने की कोमल हकीकत है।और ले पाएं तो बड़े काम की नसीहत है! कुछ कुटिल,क्रूर तो कुछ महा विद्वान,जहीन होते हैं।

अलबत्ता सारे मुंगेरी लालों के सपने हसीन होते हैं!बहुत समृद्ध है,विशाल है उसके सुनहरे सपनों का बही-खाता।पर नेता की तरह मुंगरीलाल जनता को अपने सपने बेचने नहीं जाता!सिद्ध-संत अपनी प्रसिद्धि नहीं चाहता है।मुंगेरीलाल भी बिल्कुल यही चाहता है!समाज में ऐसे साधु संतों का बड़ा नाम है।किंतु इसी गुण के बावजूद मुंगेरीलाल या तो गुमनाम है या फिर बदनाम है!दोहरे मानदंड भारी शातिर दुनिया का यह मासूम अंजाम है। हानिरहित,राहत-दायक मुंगेरीलाल-चिंतन गुप्त मुंगेरी लालों द्वारा ही बदनाम है! ऐसे तत्व मुखर होकर मुंगेरीलाल का मजाक उड़ाते हैं।किंतु खुद बिना नींद के जीते-जागते सपने में बढ़-चढ़कर मुंगेरीलाल हो जाते हैं! मान कि मुंगेरी लालों ने कहीं कोई खास झंडा नहीं गाड़ा है।किंतु उन्होंने गद्दारों की तुलना में भला देश का क्या कुछ बिगड़ा है!भले ही बचकाना है,दिमागी तौर पर कच्चा है।लेकिन देश के दुश्मनों का दलाल होने की तुलना में मुंगेरीलाल होना बहुत अच्छा है! बेशक देशभक्त क्रांतिकारियों ने आजादी का सपना साकार कर लोकतंत्र के मजबूत सांचे में ढाला है।किंतु देश की स्वतंत्रता की सुरक्षा और खुशहाली का सपना मुंगेरीलालों ने भी शिद्दत से पाला है!देश के सर्वांगीण विकास के सपने मुंगेरीलाल भी देख रहे हैं। और भारत माता के कर्मवीर सपूत उन्हें साकार कर रहे हैं! यही हमारे महान भारत की शान है। सच हो रहे राष्ट्रहित के हर सपने में मुंगरी लालों के अरमानों की भी जान है! इस लिहाज से देखें तो मुंगेरीलाल देश पर बड़े मेहरबान हैं!

– प्रहलाद श्रीमाली

Prahalad Shrimali

Prahalad Shrimali

परिचय प्रहलाद श्रीमाली जन्मः 01.02.1956, चेन्नई शिक्षाः हाई स्कूल प्रकाशन…

परिचय प्रहलाद श्रीमाली जन्मः 01.02.1956, चेन्नई शिक्षाः हाई स्कूल प्रकाशन विषयक: साहित्यिक पत्रिकाओं, समाचार पत्रों में कहानियां, लघुकथाएं, व्यंग्य एवं कविताएं प्रकाशित। राजस्थानी व्यंग्य संग्रह ‘‘आवळ कावळ’’ 1992 में प्रकाशित एवं ‘‘मारवाडी सम्मेलन, मुम्बई’’ द्वारा पुरस्कृत। . कहानी ‘उत्तरहीन’ पर जनदर्शन संस्थान, भिलाई द्वारा शिक्षणार्थ लघु वीडियो फिल्म निर्मित। कहानी ‘‘कमलजी कहानी में कला नहीं घुसाते’’ 2002 को किताबघर प्रकाशन नई दिल्ली द्वारा ‘‘आर्य स्मृति साहित्य सम्मान’’ प्राप्त। उपन्यास ‘‘पापा मुस्कुराइए ना!’’ को 2010 का ‘‘आर्य स्मृति साहित्य सम्मान’’। कहानी संग्रह ‘‘अज्ञातवास में सिद्ध’’ ‘जनसुलभ’ पेपरबैक्स द्वारा अखिल भारतीय स्तर पर आमंत्रित पाण्डुलिपियों में से चयनित व प्रकाशित (2011) नवभारत टाइम्स में मनोहर श्याम जोशी के व्यंग्य टिप्पणी स्तंभ ‘मेरा भारत महान’ में कई बार पुरस्कृत। व्यंग्य संग्रह ‘‘मोती जैसी घुन‘‘ ‘सदीनामा प्रकाशन‘ कोलकाता द्वारा प्रकाशित (2012) कहानी संग्रह ‘‘मुन्ना रो रहा है! ‘‘ ‘अमरसत्य प्रकाशन‘ (किताबघर प्रकाशन का उपक्रम) (2014) राजस्थानी कहानी ' महाभारत रा अजुआळा में ' को वर्ष 2015 का ' डॉ. नृसिंह राजपुरोहित स्मृति पुरस्कार '। लघुकथा ' जिंदगी की रफ्तार ' वर्ष 2019 में ' कथादेश अखिल भारतीय हिन्दी लघुकथा प्रतियोगिता -11' में पुरस्कृत।

Comments ( 1)

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विद्या पोखरियाल

6 months ago

👍👍👍