एक आंधी आई

“एक आंधी आई” और

उड़ा ले गई गरीबों के चिथडे छप्पर

कल तक जो थे नींव उद्योगों की

आज बने राहों के कंकड़ ।

 

जिनके कारण थे महल चौबारे 

और जिनसे चलते थे कल कारखाने

आज उनकी हालत तो देखो

 मोहताज हुए वो दाने-दाने ।

 

क्या यहीं है मानवता

कहाँ गया वो दीन धरम

 जिनके कारण थी खिली रोशनी 

आज उनके पैरों तले धरा गरम ।

 

यूं तो‌ धार्मिक पदयात्रियों के लिए

हर जगह मौजूद रहते हैं भामाशाह 

फिर इन पदयात्रियों की हालत देख 

क्यूं उनके हृदय से न निकले आह।

 

संवेदनाएं हृदय से न निकालो बाहर 

संवेदनाओं में ही रहता अल्लाह ईश्वर

संवेदनाएं ही है मानवता का आधार 

इस विषय पर कुछ तो करो विचार।

Sunita Sharma

Content Writer at Baat Apne Desh Ki

Sunita Sharma is a passionate writer who shares insights and knowledge about various topics on Baat Apne Desh Ki.

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