श्री नृसिंह स्तुति डॉ मुकेश 'असीमित' August 30, 2025 भजन -रचनाएँ 0 Comments नृसिंह भगवान का रूप भय और करुणा का अद्भुत संगम है। हिरण्यकशिपु का वध कर उन्होंने धर्म की रक्षा की और प्रह्लाद को अभय दिया।… Spread the love
काम करने वाला कोई नहीं घर में-satire-humor डॉ मुकेश 'असीमित' August 30, 2025 व्यंग रचनाएं 0 Comments मरीज की असली तकलीफ़ टूटी हुई हड्डी नहीं, बल्कि टूटा हुआ घर-गृहस्थी का संतुलन है। डॉक्टर जब पक्का प्लास्टर लगाने का हुक्म सुनाता है तो… Spread the love
मम्मी रिटर्न्स: ए सी कोच एडिशन-हास्य व्यंग्य रचना डॉ मुकेश 'असीमित' August 29, 2025 हास्य रचनाएं 0 Comments *”ए.सी. डिब्बे की यात्रा कई बार हॉरर फिल्म जैसी लग सकती है। सफेद चादर ओढ़े यात्री ममी जैसे लगते हैं, और चौकीदार हाथ में लालटेन… Spread the love
“महारास: राधा–कृष्ण की लीलाओं में कवियों का अमर रस” डॉ मुकेश 'असीमित' August 29, 2025 India Story 4 Comments गणेश झांकी में महारास का आयोजन बचपन की रासलीला की याद दिला गया। परंपरागत पदावली और छंदों की जगह आज डीजे और पैरोडी ने ले… Spread the love
गणेश चतुर्थी विशेष-स्तुति डॉ मुकेश 'असीमित' August 28, 2025 हिंदी कविता 0 Comments गणेश चतुर्थी विशेष अवसर पर प्रस्तुत वंदना में गणपति को विघ्नहरण प्रथमेश्वर, पार्वतीसुत, मोदकप्रिय, गजवदन और सिद्धिदाता के रूप में नमन किया गया है। वे… Spread the love
रिश्ते आईसीयू में-व्यंग्य लघु कथा डॉ मुकेश 'असीमित' August 28, 2025 लघु कथा 4 Comments शहर के सात सितारा आईसीयू के बाहर रिश्तेदार चाय की चुस्कियों और तानों में लगे हैं। अमन का दिल पिता की वेंटिलेटर पर गिनती करती… Spread the love
मूषक राज स्तुति-हास्य व्यंग्य रचना डॉ मुकेश 'असीमित' August 27, 2025 हास्य रचनाएं 0 Comments गणेश चतुर्थी पर जहाँ सब गणपति की स्तुति करते हैं, वहीं उनके वाहन मूषकराज की महिमा भी अद्वितीय है। छोटे आकार में विराट शक्ति का… Spread the love
चंदागिरी –चौथ वसूली-व्यंग्य रचना डॉ मुकेश 'असीमित' August 27, 2025 व्यंग रचनाएं 0 Comments शहर में चंदागिरी का धंधा खूब फल-फूल रहा है—यह दरअसल हफ्तावसूली का ही सभ्य संस्करण है। देवी-भक्त मंडल से लेकर राम-गौ-गणेश मंडल तक सबके चूल्हे… Spread the love
किसी के लिए मरना आसान नहीं होता -कविता रचना Vidya Dubey August 26, 2025 Poems 2 Comments जीवन की कठिनाइयाँ कभी धूप की तपिश, कभी आँधियों की मार, तो कभी अपनों की बेरुख़ी के रूप में सामने आती हैं। हारना आसान है,… Spread the love
डूबने की फिलासफी-छंद रचना Ram Kumar Joshi August 26, 2025 Hindi poems 6 Comments डॉ. राम कुमार जोशी की कविता डूबने की फिलॉसफी जीवन के गहन व्यंग्य को सरल शब्दों में उभारती है। जीवित व्यक्ति काम-क्रोध-अभिमान के भार से… Spread the love