माटी की गगरी: कबीर-दर्शन से पर्यावरण संरक्षण का संदेश
कबीर-दर्शन और निर्गुण परंपरा से प्रेरित “माटी की गगरी” के माध्यम से माटी, जल, जंगल और पर्यावरण संरक्षण का भावपूर्ण संदेश।
India Ki Baat
कबीर-दर्शन और निर्गुण परंपरा से प्रेरित “माटी की गगरी” के माध्यम से माटी, जल, जंगल और पर्यावरण संरक्षण का भावपूर्ण संदेश।
लंबी ड्यूटी, वार्ड, ओटी और इमरजेंसी के बीच डॉक्टरों को भी खुलकर जीने और जश्न मनाने का अधिकार है। प्रस्तुत हैं डॉ. मुकेश असीमित की “Happy Jolly Medicos” श्रृंखला के छह जोशीले Doctors Day dance songs।
सावन की बूँदें जब तन के साथ मन को भी भिगोती हैं, तब शब्द कविता बनकर कागज पर उतरते हैं। पढ़िए विशंभर पाण्डेय ‘व्यग्र’ के काव्य-गीत का भाव, संपूर्ण गीत और उसकी संगीतमय प्रस्तुति की कहानी।
राजस्थान की सड़कों पर आवारा सांड राहगीरों और वाहन चालकों के लिए जानलेवा खतरा बन चुके हैं। वर्ष 2019 के बाद आधिकारिक समेकित आँकड़े तक उपलब्ध नहीं—आखिर नंदी सड़क पर और व्यवस्था समाधि में कब तक रहेगी?
नारी शक्ति: ना रुके, ना झुके—साहस, ममता और संकल्प को समर्पित प्रेरणादायक गीत नारी केवल एक संबंध या भूमिका का नाम नहीं है। वह ममता भी है, संघर्ष भी; करुणा भी है, साहस भी; परिवार की धुरी भी है और समाज के भविष्य को दिशा देने वाली शक्ति भी। इसी बहुआयामी व्यक्तित्व, आत्मविश्वास और अदम्य […]
कवी भूषन – “कविता में रणभेरी “ कवि भूषण—वीररस के ओजस्वी शिल्पी, भाषा के बाजीगर और अलंकार-विधान के विलक्षण साधक—का नाम लेते ही आँखों के सामने युद्ध-डमरू की ध्वनि, नगाड़ों की गड़गड़ाहट, तोपों का गर्जन और अश्वारोही सेनाओं का प्रवाह जाग उठता है। यही तो वह काव्य-संसार है जहाँ “साजि चतुरंग वीर रंग में तुरंग […]
नशामुक्ति, बाल-सुरक्षा, रक्तदान, योग, पर्यावरण, मोबाइल की लत, धूम्रपान-मुक्ति और चिकित्सकों के मानवीय पक्ष पर आधारित Music with Mukesh की सामाजिक जागरूकता गीत-प्लेलिस्ट सुनें।
राजस्थान सहित देश के छोटे शहरों की टूटी सड़कें, खुले मैनहोल और प्रशासनिक लापरवाही कैसे रोज़ नागरिकों की जान जोखिम में डाल रही हैं—एक तथ्यपरक और विचारोत्तेजक लेख।
कबीर भजन ‘मेरा–तेरा मनुआ रे’ में अनुभव और किताबी ज्ञान का अंतर जानिए। पढ़ें इसके पदों का भावार्थ और निर्गुण फोक–रॉक संगीत-शैली का परिचय।
क्या भारत की आरक्षण व्यवस्था का लाभ सबसे जरूरतमंद नागरिकों तक पहुँच रहा है? सामाजिक न्याय, आर्थिक अभाव, अनाथ और दिव्यांग बच्चों के लिए आवश्यकता-आधारित अवसरों पर संतुलित विमर्श।