डिजिटल लत और परिवारों के बिखरते ताने-बाने

Dr Shailesh Shukla Apr 19, 2026 समसामयिकी 0

भारत में डिजिटल क्रांति ने जहां अवसर दिए, वहीं एक नई चुनौती भी खड़ी कर दी—डिजिटल लत। यह लेख बताता है कि कैसे स्क्रीन के बढ़ते समय ने बच्चों, रिश्तों और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित किया है।

गिरती गरिमा, गढ़ती गणना — भारतीय अर्थव्यवस्था का छठे स्थान पर फिसलना और विकास की विडंबना

Dr Shailesh Shukla Apr 19, 2026 समसामयिकी 0

भारत की अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ रही है, फिर भी वैश्विक रैंकिंग में वह छठे स्थान पर खिसक गई—यह विरोधाभास केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि विकास, वितरण और वास्तविक समृद्धि की गहरी कहानी है।

हुकूमत बदली और हवेलियाँ काँपी: बुलडोज़र राजनीति पर तीखा व्यंग्य

Ram Kumar Joshi Apr 18, 2026 हिंदी कविता 1

एक तीखा व्यंग्य जो सत्ता परिवर्तन, बुलडोज़र राजनीति और रसूखदारों के बदलते चेहरे पर करारा कटाक्ष करता है। पढ़ें यह समकालीन सामाजिक-राजनीतिक कविता।

The Tail of Caste: Democracy’s Most Reliable Organ

डॉ मुकेश 'असीमित' Apr 17, 2026 Humour 0

What if humans never lost their tails—or worse, replaced them with something far more powerful? This biting satire explores how caste has become the invisible tail that defines identity, power, and democracy in India.

बी.पी.एल. संस्कृति-हास्य व्यंग्य रचना

डॉ मुकेश 'असीमित' Apr 17, 2026 व्यंग रचनाएं 0

भारत की बी.पी.एल. संस्कृति पर तीखा व्यंग्य—जहाँ लग्ज़री कार वाले भी गरीब हैं और असली गरीब सिस्टम में फंसे हैं। पढ़ें लोकतंत्र की विडंबनाओं पर हास्य-व्यंग्य से भरपूर लेख।

समकालीन व्यंग्य की नई पहचान : गिरने में क्या हर्ज़ है (पुस्तक समीक्षा)

डॉ मुकेश 'असीमित' Apr 17, 2026 Book Review 0

डॉ. मुकेश असीमित का व्यंग्य संग्रह “गिरने में क्या हर्ज़ है” समकालीन समाज की विसंगतियों पर तीखा प्रहार करता है। वरिष्ठ व्यंग्यकार श्रवण कुमार उर्मलिया की यह समीक्षा न केवल इस संग्रह की साहित्यिक शक्ति को उजागर करती है, बल्कि व्यंग्य लेखन के मूल तत्वों और उसकी सामाजिक भूमिका पर भी गहन दृष्टि प्रस्तुत करती है।

नाजिम वाला तालाब: गंगापुर सिटी का छुपा हुआ बर्ड पैराडाइज़ | प्रवासी पक्षियों का स्वर्ग

डॉ मुकेश 'असीमित' Apr 16, 2026 Blogs 0

गंगापुर सिटी के पास स्थित नाजिम वाला तालाब—जहां 60 से अधिक प्रवासी पक्षी हर सर्दी में अपना बसेरा बनाते हैं। प्रकृति प्रेमियों और बर्ड वॉचर्स के लिए यह एक अनमोल धरोहर है।

सत्य बनाम सफलता: साध्य–साधन की कसौटी पर जीवन

डॉ मुकेश 'असीमित' Apr 16, 2026 Blogs 0

सत्य बनाम सफलता: साध्य–साधन की कसौटी पर जीवन जीवन के चौराहों पर सबसे पेचीदा प्रश्न यही उठता है  सत्य चुनें या सफलता? अनुभव कहता है कि झूठ, छल और शॉर्टकट से लोग जीतते दिखते हैं; मन डगमगाता है। पर इतिहास, संस्कृति और अंतरात्मा तीनों मिलकर धीरे-धीरे एक ही निष्कर्ष पर लाते हैं: साध्य तभी पवित्र […]

वाराणसी यात्रा: काशी विश्वनाथ, गंगा घाट और आध्यात्मिक अनुभव का अद्भुत संगम

डॉ मुकेश 'असीमित' Apr 16, 2026 संस्मरण 0

वाराणसी—जहां गंगा के तट पर बसता है इतिहास, आध्यात्म और जीवन का अनोखा दर्शन। इस यात्रा-वृत्तांत में जानिए काशी विश्वनाथ मंदिर, गंगा घाटों और बनारसी संस्कृति की गहराई।

लाइन में खड़े रहने का हुनर: भारतीय जीवन की सबसे बड़ी स्किल पर व्यंग्य

Prem Chand Dwitiya Apr 15, 2026 व्यंग रचनाएं 1

भारतीय समाज में लाइन में लगना एक कला बन चुकी है—गैस सिलेंडर से लेकर ऑनलाइन बुकिंग तक। पढ़िए एक रोचक और तीखा व्यंग्य “लाइन में खड़े रहने का हुनर”।