पायोजी मैंने ,सिलेंडर पायो ,!

Prem Chand Dwitiya Mar 29, 2026 व्यंग रचनाएं 1

वैश्विक युद्ध की चिंगारी जब चूल्हे तक पहुँची, तो गैस सिलेंडर अचानक ‘राम रतन धन’ बन गया—और आम आदमी लाइन, लाचारी और व्यंग्य के बीच झूलता रह गया।

सड़कों से गायब हुए फुटपाथ : अतिक्रमण पर आँख बंद करके बैठा प्रशासन

Dr Shailesh Shukla Mar 29, 2026 India Story \बात अपने देश की 0

भारत के शहरों में फुटपाथों का गायब होना सिर्फ अव्यवस्था नहीं, बल्कि शहरी नियोजन की विफलता और सामाजिक असमानता का प्रतीक बन चुका है।

होरमुज जलडमरूमध्य के बंद होने से उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा संकट

Dr Shailesh Shukla Mar 28, 2026 समसामयिकी 0

होरमुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण केंद्र है, जिसके बंद होने से तेल कीमतों में भारी वृद्धि, वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और विशेष रूप से ऊर्जा आयातक देशों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

भगवान बचाए ऐसे रिश्तेदारों से!

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 28, 2026 व्यंग रचनाएं 0

बीमारी से ज्यादा थका देने वाला होता है रिश्तेदारों का हाल-चाल महाकुंभ—जहाँ हर कोई डॉक्टर भी है, जज भी और जांच अधिकारी भी।

राम तत्व: सत्ता से संवेदना तक – एक आंतरिक यात्रा

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 27, 2026 Culture 0

क्या राम केवल एक ऐतिहासिक पात्र हैं या हमारे भीतर की एक चेतना? यह लेख राम को देह से तत्व तक समझने की एक गहन यात्रा है, जो बताता है कि राम किसी धर्म तक सीमित नहीं बल्कि मानवता की सर्वोच्च संवेदनशील अवस्था हैं।

धुरंधर: जासूसी नहीं, मनुष्य निर्माण की मास्टर क्लास | आदित्य धर का सिनेमा

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 27, 2026 Cinema Review 1

धुरंधर फिल्म अंडरकवर एजेंट्स की उस सच्चाई को सामने लाती है, जिसे सिनेमा अक्सर नजरअंदाज कर देता है। आदित्य धर ने यहाँ मिशन नहीं, बल्कि उस मनुष्य की यात्रा दिखाई है, जो दर्द, अन्याय और संघर्ष से गुजरकर एक ऑपरेटिव बनता है। यह फिल्म ग्लैमर नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और त्याग की कठोर सच्चाई कहती है।

मक्खनमहापुराण-चापलूस्योपनिषद् का उत्तर आधुनिक खंड

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 26, 2026 व्यंग रचनाएं 0

“मक्खनमहापुराण” चापलूस्योपनिषद् का उत्तर-आधुनिक संस्करण है, जहाँ प्रशंसा और चाटुकारिता के बीच की महीन रेखा पर तीखा व्यंग्य किया गया है। यह रचना दिखाती है कि कैसे ‘मक्खनयोग’ आज के दफ्तर, साहित्य, राजनीति और सामाजिक जीवन का अनिवार्य शास्त्र बन चुका है—जहाँ योग्यता से ज्यादा ‘लोचदार जीभ’ और सही समय पर किया गया लेपन ही सफलता की असली कुंजी है।

मंचीय कवि सम्मेलन की मच मच

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 26, 2026 व्यंग रचनाएं 0

आज का मंचीय कवि सम्मेलन कविता का नहीं, प्रदर्शन का उत्सव बन गया है—जहाँ कविता घूंघट में सिमटी रहती है और चुटकुले, अभिनय और जुगाड़ का नाच चलता रहता है।

कृत्रिम मेधा और पारिवारिक जीवन : बच्चों के विकास पर प्रभाव

Dr Shailesh Shukla Mar 26, 2026 Culture 0

आज का बच्चा कहानियों से नहीं, एल्गोरिद्म से सीख रहा है। क्या हम सुविधा के नाम पर उसके भावनात्मक विकास से समझौता कर रहे हैं?

आज रपट जाएँ तो हमें न उठइयो

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 24, 2026 व्यंग रचनाएं 1

“भाइयो-बहनो, आज अगर हम रपट जाएँ… तो हमें न उठइयो।” लोकतंत्र के इस विचित्र महोत्सव में हर वर्ग अपनी-अपनी शैली में फिसल रहा है—कोई वादों पर, कोई सच्चाई पर, कोई सिद्धांत पर… और आम आदमी, वह तो रोज़ की आदत से फिसल ही रहा है।