Dr Shailesh Shukla
May 6, 2026
India Story \बात अपने देश की
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लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति उसकी आलोचना सहने की क्षमता होती है। न्यायपालिका संविधान की संरक्षक अवश्य है, किंतु क्या वह आलोचना से ऊपर हो सकती है? यह लेख न्यायपालिका की गरिमा, अवमानना कानून, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक जवाबदेही के बीच संतुलन की गंभीर पड़ताल करता है।
Ram Kumar Joshi
May 5, 2026
व्यंग रचनाएं
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नई दिल्ली की ट्रेनिंग में उन्हें सिखाया गया था—
“धीरे-धीरे खाओ, ठंडा करके खाओ…”
लेकिन जब सिस्टम गरम हुआ,
तो सबसे पहले जल गया—एक ‘बाबू’।
डॉ मुकेश 'असीमित'
May 5, 2026
व्यंग रचनाएं
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जब पति भी नौकरी की तरह “फुल-टाइम वैकेंसी” बन जाए, तो समझिए वैवाहिक जीवन ने नया स्टार्टअप मॉडल पकड़ लिया है। यह व्यंग्य न केवल हँसाता है, बल्कि शादी की सच्चाइयों का आईना भी दिखाता है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
May 4, 2026
संस्मरण
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थर्ड एसी की एक साधारण-सी यात्रा कैसे दो बच्चों की वजह से हास्य और अराजकता का महाकाव्य बन जाती है—यह संस्मरण उसी अविस्मरणीय रात की कहानी है, जहाँ नींद शहीद हो जाती है और व्यंग्य जन्म लेता है।
Dr Shailesh Shukla
May 3, 2026
शोध लेख/विमर्श
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हिंदी पत्रकारिता की दो शताब्दियों की यात्रा केवल समाचारों का इतिहास नहीं, बल्कि तकनीकी विकास, सामाजिक परिवर्तन और विचारों के विस्तार की जीवंत गाथा है—जो आज कृत्रिम बुद्धि के युग तक पहुँच चुकी है।
Dr Shailesh Shukla
May 3, 2026
शोध लेख/विमर्श
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हिंदी पत्रकारिता में कृत्रिम मेधा का प्रवेश केवल तकनीकी परिवर्तन नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक, भाषिक और नैतिक चुनौती भी है। यह लेख इसी बदलाव के प्रभावों का गंभीर विवेचन करता है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
May 3, 2026
हास्य रचनाएं
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कल्पना कीजिए, अगर ब्रज क्षेत्र की अपनी एयरलाइन होती और पायलट, एयरहोस्टेस, क्रू सब ब्रज भाषा में घोषणाएँ करते—तो सीट बेल्ट से लेकर लैंडिंग तक हर बात रस, ठिठोली और जय श्रीराधे में भीग जाती।
Prem Chand Dwitiya
Apr 28, 2026
Blogs
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यह व्यंग्य चुनावी तोहफों और फ्रीबीज राजनीति की उस विडंबना को उजागर करता है, जहाँ वादों की फेहरिस्त से जन्मे तोहफे मतदाताओं को लुभाते हैं और लोकतंत्र को एक अलग ही दिशा में ले जाते हैं।
Dr Shailesh Shukla
Apr 28, 2026
India Story \बात अपने देश की
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1826 के उदन्त मार्तण्ड से लेकर डिजिटल और AI युग तक हिंदी पत्रकारिता की 200 वर्षों की यात्रा, संघर्ष, विकास और चुनौतियों का विस्तृत विश्लेषण।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Apr 28, 2026
व्यंग रचनाएं
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“मंच सूना है, माइक उदास है, और अध्यक्ष महोदय की कुर्सी… बस वही एक चीज़ है जिसे वे पूरे विश्वास से पकड़कर बैठे हैं—जैसे लोकतंत्र की आखिरी उम्मीद उसी के चार पैरों पर टिकी हो।”