अफसरों सेवा धर्म-हास्य व्यंग्य रचना

Ram Kumar Joshi May 5, 2026 व्यंग रचनाएं 1

नई दिल्ली की ट्रेनिंग में उन्हें सिखाया गया था— “धीरे-धीरे खाओ, ठंडा करके खाओ…” लेकिन जब सिस्टम गरम हुआ, तो सबसे पहले जल गया—एक ‘बाबू’।

पति चाहिए: एक आधिकारिक वैवाहिक विज्ञप्ति

डॉ मुकेश 'असीमित' May 5, 2026 व्यंग रचनाएं 0

जब पति भी नौकरी की तरह “फुल-टाइम वैकेंसी” बन जाए, तो समझिए वैवाहिक जीवन ने नया स्टार्टअप मॉडल पकड़ लिया है। यह व्यंग्य न केवल हँसाता है, बल्कि शादी की सच्चाइयों का आईना भी दिखाता है।

थर्ड एसी में दो बाल-आतंकियों के संग – एक हास्य-व्यंग्यात्मक रेल यात्रा संस्मरण

डॉ मुकेश 'असीमित' May 4, 2026 संस्मरण 0

थर्ड एसी की एक साधारण-सी यात्रा कैसे दो बच्चों की वजह से हास्य और अराजकता का महाकाव्य बन जाती है—यह संस्मरण उसी अविस्मरणीय रात की कहानी है, जहाँ नींद शहीद हो जाती है और व्यंग्य जन्म लेता है।

शब्द से एल्गोरिद्म तक : हिंदी पत्रकारिता की 200 वर्षों की तकनीकी यात्रा

Dr Shailesh Shukla May 3, 2026 शोध लेख/विमर्श 0

हिंदी पत्रकारिता की दो शताब्दियों की यात्रा केवल समाचारों का इतिहास नहीं, बल्कि तकनीकी विकास, सामाजिक परिवर्तन और विचारों के विस्तार की जीवंत गाथा है—जो आज कृत्रिम बुद्धि के युग तक पहुँच चुकी है।

हिंदी पत्रकारिता में कृत्रिम मेधा के प्रयोग का भारतीय समाज पर प्रभाव

Dr Shailesh Shukla May 3, 2026 शोध लेख/विमर्श 0

हिंदी पत्रकारिता में कृत्रिम मेधा का प्रवेश केवल तकनीकी परिवर्तन नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक, भाषिक और नैतिक चुनौती भी है। यह लेख इसी बदलाव के प्रभावों का गंभीर विवेचन करता है।

ब्रज की एयरलाइंस: ब्रज भाषा में मजेदार फ्लाइट अनाउंसमेंट

डॉ मुकेश 'असीमित' May 3, 2026 हास्य रचनाएं 0

कल्पना कीजिए, अगर ब्रज क्षेत्र की अपनी एयरलाइन होती और पायलट, एयरहोस्टेस, क्रू सब ब्रज भाषा में घोषणाएँ करते—तो सीट बेल्ट से लेकर लैंडिंग तक हर बात रस, ठिठोली और जय श्रीराधे में भीग जाती।

वादों की कोख से पैदा होते तोहफे: चुनावी फ्रीबीज राजनीति पर तीखा व्यंग्य

Prem Chand Dwitiya Apr 28, 2026 Blogs 0

यह व्यंग्य चुनावी तोहफों और फ्रीबीज राजनीति की उस विडंबना को उजागर करता है, जहाँ वादों की फेहरिस्त से जन्मे तोहफे मतदाताओं को लुभाते हैं और लोकतंत्र को एक अलग ही दिशा में ले जाते हैं।

हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष: संघर्ष, चेतना और डिजिटल युग की नई दिशा

Dr Shailesh Shukla Apr 28, 2026 India Story \बात अपने देश की 0

1826 के उदन्त मार्तण्ड से लेकर डिजिटल और AI युग तक हिंदी पत्रकारिता की 200 वर्षों की यात्रा, संघर्ष, विकास और चुनौतियों का विस्तृत विश्लेषण।

पार्टी अध्यक्ष का विलाप-कुर्सी, विश्वासघात और लोकतंत्र का तमाशा

डॉ मुकेश 'असीमित' Apr 28, 2026 व्यंग रचनाएं 0

“मंच सूना है, माइक उदास है, और अध्यक्ष महोदय की कुर्सी… बस वही एक चीज़ है जिसे वे पूरे विश्वास से पकड़कर बैठे हैं—जैसे लोकतंत्र की आखिरी उम्मीद उसी के चार पैरों पर टिकी हो।”

मुख्य अतिथि बनने की राह – बड़े धोखे हैं इन राहों में

डॉ मुकेश 'असीमित' Apr 27, 2026 व्यंग रचनाएं 0

मुख्य अतिथि बनना केवल सम्मान नहीं, एक कला है—जिसमें मुस्कान सार्वजनिक होती है और असहजता निजी। यह व्यंग्य उसी ‘कुर्सी’ के इर्द-गिर्द घूमती सामाजिक सच्चाइयों को उजागर करता है।