ख्वाहिश थी दिल में कि, कवियों को सुनेंगे
रात भर जाग कर कुछ हासिल करेंगे
कवियों को बुलाया हमने बड़े सम्मान से
नोटों भरी थैलियां सौंपी, बड़े मान से,
चुटकुलों को सुनकर चोट कुछ ऐसी लगी
राष्ट्र कवियों के रुप में मसखरों से भेंट थी।
नाम था जितना बड़ा, खोखली जमीन थी
बहुत शोर सुनते थे हाथी की पूंछ का
निकट आके देखा तो डोर हिल रही थी
Ram Kumar Joshi
Jan 5, 2026
हिंदी कविता
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