Ram Kumar Joshi
Aug 25, 2026
व्यंग रचनाएं
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कलेक्ट्रेट के दो बाबू ऊपरी कमाई से एक तोला सोना खरीदने की शर्त लगाते हैं। मगर जब बेईमानी की प्रतियोगिता में भी बेईमानी होने लगती है, तो रिश्वतखोरी का पूरा खेल सार्वजनिक हो जाता है। डा. राम कुमार जोशी की यह व्यंग्य रचना सरकारी दफ्तरों, भ्रष्टाचार, अनुकंपा नियुक्ति और व्यवस्था की विडंबनाओं पर तीखा प्रहार करती है।
Ram Kumar Joshi
Jul 28, 2026
व्यंग रचनाएं
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रिश्वत कांड में बड़े साहब की मृत्यु के बाद मुआवजे, सरकारी बंगले और अनुकम्पा नियुक्ति के लिए हुए समझौते पर आधारित तीखा हिंदी व्यंग्य।
Ram Kumar Joshi
Jul 13, 2026
व्यंग रचनाएं
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प्रदेश के रिश्वतखोर अधिकारियों को एक अत्यंत गोपनीय ई-मेल मिलता है। उसमें चेतावनी दी गई है कि फिलहाल सरकार, एसीबी और ग्रह-नक्षत्र—तीनों प्रतिकूल चल रहे हैं। इसलिए कुछ समय रिश्वत से विश्राम लेकर भजन-कीर्तन में मन लगाना ही सुरक्षित है। अफसरशाही, भ्रष्टाचार और सत्ता के बदलते चरित्र पर तीखा व्यंग्य।
Ram Kumar Joshi
Jun 24, 2026
व्यंग रचनाएं
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गांव का धन्ना सेठ अमरीक सिंह धन, भय और प्रभाव के बल पर पंचायत को अपने पक्ष में कर चुका था। जब उसके अत्याचारों से त्रस्त ऐनाराम न्याय की उम्मीद लेकर पंचों के सामने पहुंचा, तो फैसला भी उसी शक्तिशाली व्यक्ति के हित में सुनाया गया। यह व्यंग्य-कथा बताती है कि निष्पक्षता का मुखौटा पहनी संस्थाएं किस तरह कमजोर से समर्पण और ताकतवर से शांति की अपेक्षा करती हैं।
Ram Kumar Joshi
Jun 24, 2026
हिंदी लेख
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जीवनभर नौकरी, परिवार और प्रतिष्ठा के लिए काम करने वाला व्यक्ति जब साठ वर्ष की आयु में अपनी वास्तविक कमाई का हिसाब करता है, तो उसके सामने एक गहरा प्रश्न खड़ा होता है—मृत्यु के बाद वह ईश्वर के पास क्या लेकर जाएगा?
Ram Kumar Joshi
Jun 9, 2026
व्यंग रचनाएं
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लोकतंत्र, राजनीतिक बहस, आरोप-प्रत्यारोप और पंचायत की अराजकता पर आधारित डॉ. राम कुमार जोशी का तीखा एवं हास्यपूर्ण हिंदी व्यंग्य।
Ram Kumar Joshi
May 29, 2026
हास्य रचनाएं
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सरकारी नौकरी में रहते हुए अतिरिक्त कमाई के सपने देखने वाले दो प्रवक्ता शेयर बाजार के एफ एंड ओ में अपनी किस्मत आजमाते हैं। नतीजा वही निकलता है जो अक्सर बिना समझदारी के निवेश करने वालों का होता है। हास्य, कटाक्ष और जीवन की विडंबनाओं से भरा यह व्यंग्य सरकारी तंत्र और त्वरित अमीरी के मोह पर तीखा प्रहार करता है।
Ram Kumar Joshi
May 25, 2026
हास्य रचनाएं
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छोटे से गांव में फैले प्रेम प्रसंग, पंचायत की चिंता और एक चतुर कोतवाल की अनोखी परीक्षा—“भूत इश्क का” हास्य, विडंबना और देसी मनोविज्ञान से भरपूर व्यंग्य कथा है, जो इश्क़ के चढ़ते और उतरते बुखार का मज़ेदार चित्रण करती है।
Ram Kumar Joshi
May 5, 2026
व्यंग रचनाएं
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नई दिल्ली की ट्रेनिंग में उन्हें सिखाया गया था—
“धीरे-धीरे खाओ, ठंडा करके खाओ…”
लेकिन जब सिस्टम गरम हुआ,
तो सबसे पहले जल गया—एक ‘बाबू’।
Ram Kumar Joshi
Apr 18, 2026
हिंदी कविता
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एक तीखा व्यंग्य जो सत्ता परिवर्तन, बुलडोज़र राजनीति और रसूखदारों के बदलते चेहरे पर करारा कटाक्ष करता है। पढ़ें यह समकालीन सामाजिक-राजनीतिक कविता।