अभी विश्राम में रहें — रिश्वतखोर अफसरों के नाम गोपनीय सावधानी-पत्र

Ram Kumar Joshi Jul 13, 2026 व्यंग रचनाएं 1

प्रदेश के रिश्वतखोर अधिकारियों को एक अत्यंत गोपनीय ई-मेल मिलता है। उसमें चेतावनी दी गई है कि फिलहाल सरकार, एसीबी और ग्रह-नक्षत्र—तीनों प्रतिकूल चल रहे हैं। इसलिए कुछ समय रिश्वत से विश्राम लेकर भजन-कीर्तन में मन लगाना ही सुरक्षित है। अफसरशाही, भ्रष्टाचार और सत्ता के बदलते चरित्र पर तीखा व्यंग्य।

यूएनओ की माफ़िक: ताकतवर के पक्ष में खड़ी पंचायत पर तीखा व्यंग्य

Ram Kumar Joshi Jun 24, 2026 व्यंग रचनाएं 2

गांव का धन्ना सेठ अमरीक सिंह धन, भय और प्रभाव के बल पर पंचायत को अपने पक्ष में कर चुका था। जब उसके अत्याचारों से त्रस्त ऐनाराम न्याय की उम्मीद लेकर पंचों के सामने पहुंचा, तो फैसला भी उसी शक्तिशाली व्यक्ति के हित में सुनाया गया। यह व्यंग्य-कथा बताती है कि निष्पक्षता का मुखौटा पहनी संस्थाएं किस तरह कमजोर से समर्पण और ताकतवर से शांति की अपेक्षा करती हैं।

क्या लौटाऊँगा? — जीवन की असली कमाई का प्रश्न

Ram Kumar Joshi Jun 24, 2026 हिंदी लेख 3

जीवनभर नौकरी, परिवार और प्रतिष्ठा के लिए काम करने वाला व्यक्ति जब साठ वर्ष की आयु में अपनी वास्तविक कमाई का हिसाब करता है, तो उसके सामने एक गहरा प्रश्न खड़ा होता है—मृत्यु के बाद वह ईश्वर के पास क्या लेकर जाएगा?

चौबे जी हो गये डब्बे जी-आरोप, गाली और गले मिलन की व्यंग्य गाथा

Ram Kumar Joshi Jun 9, 2026 व्यंग रचनाएं 1

लोकतंत्र, राजनीतिक बहस, आरोप-प्रत्यारोप और पंचायत की अराजकता पर आधारित डॉ. राम कुमार जोशी का तीखा एवं हास्यपूर्ण हिंदी व्यंग्य।

कर्म ठोक : शेयर मार्केट, सरकारी नौकरी और किस्मत पर व्यंग्य

Ram Kumar Joshi May 29, 2026 हास्य रचनाएं 1

सरकारी नौकरी में रहते हुए अतिरिक्त कमाई के सपने देखने वाले दो प्रवक्ता शेयर बाजार के एफ एंड ओ में अपनी किस्मत आजमाते हैं। नतीजा वही निकलता है जो अक्सर बिना समझदारी के निवेश करने वालों का होता है। हास्य, कटाक्ष और जीवन की विडंबनाओं से भरा यह व्यंग्य सरकारी तंत्र और त्वरित अमीरी के मोह पर तीखा प्रहार करता है।

भूत इश्क का-हास्य रचना

Ram Kumar Joshi May 25, 2026 हास्य रचनाएं 1

छोटे से गांव में फैले प्रेम प्रसंग, पंचायत की चिंता और एक चतुर कोतवाल की अनोखी परीक्षा—“भूत इश्क का” हास्य, विडंबना और देसी मनोविज्ञान से भरपूर व्यंग्य कथा है, जो इश्क़ के चढ़ते और उतरते बुखार का मज़ेदार चित्रण करती है।

अफसरों सेवा धर्म-हास्य व्यंग्य रचना

Ram Kumar Joshi May 5, 2026 व्यंग रचनाएं 1

नई दिल्ली की ट्रेनिंग में उन्हें सिखाया गया था— “धीरे-धीरे खाओ, ठंडा करके खाओ…” लेकिन जब सिस्टम गरम हुआ, तो सबसे पहले जल गया—एक ‘बाबू’।

हुकूमत बदली और हवेलियाँ काँपी: बुलडोज़र राजनीति पर तीखा व्यंग्य

Ram Kumar Joshi Apr 18, 2026 हिंदी कविता 1

एक तीखा व्यंग्य जो सत्ता परिवर्तन, बुलडोज़र राजनीति और रसूखदारों के बदलते चेहरे पर करारा कटाक्ष करता है। पढ़ें यह समकालीन सामाजिक-राजनीतिक कविता।

ऊर्जा का आवेशन

Ram Kumar Joshi Apr 2, 2026 व्यंग रचनाएं 1

“ऊर्जा स्वयं न पाजिटिव होती है न नेगेटिव—वह तो मात्र साधन है। फर्क सिर्फ इतना है कि उसे साधु साधे या ‘साहिब’ साधे।”

महिलाओं की टीवी बहस!

Ram Kumar Joshi Feb 26, 2026 हास्य रचनाएं 1

एक ज्वलंत विषय पर बहस करवाने की योजना स्टूडियो प्रबंधन के लिए अप्रत्याशित परीक्षा बन गई। वर्णमाला क्रम, विशेषज्ञता और समय-सारिणी सब धरी रह गईं—और बहस का मंच देखते ही देखते शक्ति प्रदर्शन में बदल गया।