बॉलीवुड द्वारा गढ़े गए मिथकों को तोड़कर देशभक्ति की भावना को मजबूत करती हैं “धुरंधर 2”

बॉलीवुड द्वारा गढ़े गए मिथकों को तोड़कर देशभक्ति की भावना को मजबूत करती हैं “धुरंधर 2”
समकालीन हिंदी सिनेमा में देशभक्ति का विषय हमेशा से आकर्षण का केंद्र रहा है, लेकिन इसके चित्रण का
तरीका समय के साथ बदलता रहा है। लंबे समय तक मुख्यधारा के सिनेमा में देशभक्ति को एक सीमित,
भावनात्मक और कई बार रूढ़ छवि के रूप में प्रस्तुत किया गया, जहाँ नायक अकेले ही सब कुछ बदल देता
है, दुश्मन को एक ही रंग में दिखाया जाता है और राष्ट्रप्रेम केवल ऊँचे स्वर में बोले गए संवादों और नाटकीय
दृश्यों तक सीमित रह जाता है। इस तरह की प्रस्तुति दर्शकों को तत्काल रोमांच तो देती है, लेकिन वह
देशभक्ति की गहराई और उसके वास्तविक अर्थ को पूरी तरह नहीं समझा पाती। ऐसे माहौल में “धुरंधर 2”
जैसी प्रवृत्तियाँ एक नई दिशा की ओर संकेत करती हैं, जहाँ सिनेमा स्थापित मिथकों को चुनौती देकर
देशभक्ति को अधिक यथार्थवादी, संतुलित और विचारशील रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास करता है।
भारतीय फिल्मों में लंबे समय तक देशभक्ति को एक भावनात्मक नारे की तरह प्रस्तुत किया गया, जिसमें
जटिल सामाजिक और राजनीतिक वास्तविकताओं को सरल बना दिया जाता था। इसके कारण दर्शकों के
मन में देशभक्ति की एक सतही छवि बनती चली गई, जिसमें त्याग, जिम्मेदारी और नैतिकता की गहराई
की बजाय तात्कालिक उत्साह को अधिक महत्व मिला। “धुरंधर 2” इस प्रवृत्ति से हटकर देशभक्ति को
केवल युद्ध या सीमा तक सीमित नहीं रखती, बल्कि इसे नागरिक जीवन, जिम्मेदार आचरण और
संस्थागत मजबूती से जोड़ती है। यह दृष्टिकोण इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसी भी राष्ट्र की मजबूती
केवल सैनिकों के साहस पर नहीं, बल्कि नागरिकों की ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और सामाजिक चेतना पर
भी निर्भर करती है।
बॉलीवुड के बारे में एक महत्वपूर्ण आलोचना यह भी रही है कि कई फिल्मों में समाज के कुछ वर्गों और
समुदायों का चित्रण एकतरफा या रूढ़ तरीके से किया गया। कभी-कभी यह आरोप लगाया गया कि
जानबूझकर कुछ पात्रों को नकारात्मक और कुछ को सकारात्मक रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जिससे
समाज के बारे में एक विशेष धारणा बनती है। यह समझना आवश्यक है कि सिनेमा एक रचनात्मक
माध्यम है और इसमें पात्रों का निर्माण कहानी, समय और दृष्टिकोण के आधार पर होता है, लेकिन इसके
साथ यह जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है कि किसी भी समुदाय या वर्ग के बारे में स्थायी पूर्वाग्रह न बनाए जाएँ।
“धुरंधर 2” जैसी प्रवृत्तियाँ इस संदर्भ में संतुलन स्थापित करने का प्रयास करती दिखाई देती हैं, जहाँ पात्रों
को उनकी परिस्थितियों, व्यक्तित्व और कर्मों के आधार पर प्रस्तुत किया जाता है, न कि केवल उनकी
पहचान के आधार पर।

देशभक्ति के चित्रण में एक और बड़ा मिथक यह रहा है कि यह केवल बाहरी दुश्मन के खिलाफ आक्रामकता
से जुड़ी होती है। इस सोच में “हम बनाम वे” की मानसिकता को बढ़ावा मिलता है, जो समाज में विभाजन
पैदा कर सकती है। “धुरंधर 2” इस धारणा को तोड़ते हुए यह दिखाने की कोशिश करती है कि सच्ची
देशभक्ति केवल विरोध में नहीं, बल्कि निर्माण में निहित होती है। इसमें भ्रष्टाचार, प्रशासनिक कमियाँ,
सामाजिक असमानता और नैतिक गिरावट जैसी आंतरिक चुनौतियों को भी उतनी ही गंभीरता से लिया
जाता है। यह दृष्टिकोण दर्शकों को यह समझने में मदद करता है कि देशभक्ति केवल भावना नहीं, बल्कि
एक निरंतर जिम्मेदारी है, जिसमें सुधार और आत्ममंथन दोनों शामिल हैं।
पारंपरिक फिल्मों में नायक को अक्सर एक ऐसे व्यक्ति के रूप में दिखाया जाता रहा है, जो अकेले ही पूरे
तंत्र को बदल देता है। यह प्रस्तुति प्रेरणादायक जरूर होती है, लेकिन यह वास्तविकता से दूर भी होती है।
“धुरंधर 2” इस मिथक को तोड़ते हुए सामूहिक प्रयास की भावना को सामने लाती है, जहाँ परिवर्तन किसी
एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि समाज के कई लोगों के सहयोग से संभव होता है। यह दृष्टिकोण लोकतांत्रिक
मूल्यों के अधिक करीब है और यह संदेश देता है कि हर नागरिक राष्ट्रनिर्माण में भागीदार है।
फिल्मों में स्त्री पात्रों की भूमिका भी लंबे समय तक सीमित रही है, जहाँ उन्हें केवल सहायक या प्रतीकात्मक
रूप में दिखाया जाता था। लेकिन बदलते समय के साथ यह धारणा भी चुनौती के घेरे में आई है। “धुरंधर 2”
जैसी कथाएँ स्त्री पात्रों को अधिक सक्रिय, सक्षम और निर्णायक भूमिका में प्रस्तुत करने की दिशा में आगे
बढ़ती हैं। इससे न केवल कथा अधिक यथार्थवादी बनती है, बल्कि समाज में समानता और सम्मान का
संदेश भी मजबूत होता है।
देशभक्ति के नाम पर भावनाओं के अतिरंजित प्रदर्शन की प्रवृत्ति भी हिंदी सिनेमा का एक हिस्सा रही है।
ऊँचे स्वर, नाटकीय संगीत और बड़े-बड़े संवादों के माध्यम से दर्शकों को प्रभावित करने की कोशिश की
जाती रही है। लेकिन अब दर्शक अधिक परिपक्व हो रहे हैं और वे ऐसी कहानियों को पसंद कर रहे हैं, जो
सच्चाई के करीब हों। “धुरंधर 2” इस बदलाव को दर्शाती है, जहाँ भावनाएँ स्वाभाविक रूप से उभरती हैं और
दर्शक उनसे गहराई से जुड़ पाते हैं।
मीडिया और सिनेमा का समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है। यह केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि
सोच और दृष्टिकोण को आकार देने वाला साधन भी है। जब फिल्में देशभक्ति को संतुलित और जिम्मेदार
तरीके से प्रस्तुत करती हैं, तो वे दर्शकों को अपने जीवन में भी ऐसे मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित करती

हैं। “धुरंधर 2” जैसी प्रवृत्तियाँ दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि देशभक्ति का वास्तविक अर्थ
क्या है और वे अपने दैनिक जीवन में इसे कैसे जी सकते हैं।
हालाँकि, यह भी जरूरी है कि किसी भी फिल्म का मूल्यांकन संतुलित दृष्टिकोण से किया जाए। सिनेमा
एक रचनात्मक और व्यावसायिक माध्यम है, जिसमें कई प्रकार के दबाव होते हैं। इसलिए किसी भी
बदलाव को अंतिम सत्य मान लेने के बजाय उसे एक सकारात्मक दिशा के रूप में देखना अधिक उचित
होगा। “धुरंधर 2” इस दिशा में एक संकेत है कि सिनेमा अब केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहना
चाहता, बल्कि समाज के महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी गंभीरता से विचार करना चाहता है।
अंततः, यह कहा जा सकता है कि “धुरंधर 2” जैसी फिल्में हिंदी सिनेमा में एक आवश्यक परिवर्तन का
प्रतिनिधित्व करती हैं। वे पारंपरिक मिथकों को तोड़ते हुए देशभक्ति को अधिक यथार्थवादी, जिम्मेदार और
समावेशी रूप में प्रस्तुत करती हैं। यह बदलाव केवल सिनेमा के लिए नहीं, बल्कि समाज के लिए भी
महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह हमें अपने विचारों, धारणाओं और मूल्यों पर पुनर्विचार करने का अवसर देता है।
यदि इस प्रकार की प्रवृत्ति आगे भी जारी रहती है, तो यह न केवल सिनेमा को समृद्ध करेगी, बल्कि समाज
में एक अधिक जागरूक, संतुलित और जिम्मेदार नागरिकता के निर्माण में भी सहायक होगी।

Dr Shailesh Shukla

Dr Shailesh Shukla

राजभाषा अधिकारी, एनएमडीसी लिमिटेड [भारत सरकार का उद्यम] हीरा खनन…

राजभाषा अधिकारी, एनएमडीसी लिमिटेड [भारत सरकार का उद्यम] हीरा खनन परियोजना, मझगवाँ, पन्ना (मध्य प्रदेश) शिक्षा : एम.ए.(हिंदी), एम.ए.(जनसंचार), पीएचडी प्रकाशन : भारत सहित विश्व के अनेक देशों से प्रकाशित विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं - अस्मिता, राजभाषा भारती,

Comments ( 0)

Join the conversation and share your thoughts

No comments yet

Be the first to share your thoughts!